ग्राउंड पर लगती है गर्मी तो टॉप फ्लोर पर जम जाती है बर्फ... इतनी ज्यादा ऊंची है ये बिल्डिंग

चीन की सबसे ऊंची बिल्डिंग शंघाई टावर के अंदर अलग- अलग फ्लोर पर मौसम बदल जाता है. ग्राउंड फ्लोर पर अगर उमस है तो टॉप फ्लोर तक जाते- जाते कड़ाके की ठंड महसूस होने लग जाती है.

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इस बिल्डिंग के टॉप फ्लोर पर पहुंचते ही बदल जाता है मौसम (Photo - Pexels) इस बिल्डिंग के टॉप फ्लोर पर पहुंचते ही बदल जाता है मौसम (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:08 PM IST

दुनिया में कई ऐसी ऊंची इमारतें हैं, जिनके अंदर का वातावरण अलग- अलग फ्लोर पर बदल जाता है. इनमें से एक है शंघाई टावर. इस स्काईस्क्रैपर के अंदर मौसम काफी तेजी से बदल जाता है और नीचे के फ्लोर और ऊपर वाले मंजिलों पर मौसम में बड़ा अंदर दिखता है. शंघाई टावर चीन की सबसे ऊंची और दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची इमारत है. 

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शंघाई टावर की ऊंचाई करीब 632 मीटर यानी 2,073 फुट है.  शंघाई टावर की सबसे ऊपरी मंजिल पर मौसम में काफी बदलाव आता है. जमीनी स्तर की तुलना में टॉप फ्लोर और उसके नीचे वाले कुछ फ्लोर के पास की हवा काफी ठंडी हो जाती है. यहां तक कि ऊपर का तापमान 0 डिग्री तक पहुंच जाता है और बर्फ जमने लगती है. सर्दियों के दौरान टॉप फ्लोर पर तापमान माइनस में चला जाता है. 

वहीं ग्राउंड फ्लोर या मध्यम ऊंचाई तक जाने पर मौसम नॉर्मल रहता है. तापमान में भी ज्यादा गिरावट नहीं होती है. जैसे- जैसे इस बिल्डिंग में आप ऊपर चढ़ते जाते हैं. हर बार तापमान बदलने के साथ मौसम भी बदलता जाता है. ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने पर तेज ठंडी हवाएं महसूस होने लगती है. खिड़कियों के बाहर बादल दिखाई देने लगते हैं. 

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क्यों बदल जाता है बिल्डिंग का मौसम
वहीं दूसरी तरफ अगर इस बिल्डिंग में नीचे के फ्लोर पर रहने पर ऊपर बादल से भरा आसमान दिखाई दे रहा है.  सूरज की रोशनी भी नहीं आ रही है. लेकिन, जब आप ऊपर के फ्लोर पर पहुंचते हैं तो आसमान साफ दिखाई दे सकता है. सूरज की रोशनी भी आती रहती है. क्योंकि, इसका टॉप फ्लोर वायुमंडल के उस स्तर तक पहुंच जाता है. जहां बादल तैरते रहते हैं. इसलिए जमीन से दिखाई देने वाले बादलों से भी ऊपर टॉप फ्लोर की ऊंचाई चली जाती है. 

चूंकि, यह टावर क्षोभमंडल तक पहुंच जाता है. इसलिए इसकी ऊपरी मंजिलों पर वायुमंडलीय और सूक्ष्म जलवायु परिस्थितियां नीचे सड़कों की बजाय पहाड़ की चोटी की तरह हो जाती हैं. इसलिए इस टावर में जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती है. वातावरण का तापमान स्वाभाविक रूप से कम होता जाता है. नीचे ग्राउंड फ्लोर की तुलना में टॉप फ्लोर के आसपास के टेम्प्रेचर में 8 से 10 डिग्री सेल्सियस का अंतर हो जाता है. 

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शंघाई टावर के ऊपर बर्फ जमने का कारण शंघाई की जलवाई भी है.  सर्दियों के दौरान, ठंडी महाद्वीपीय हवा शंघाई के पूर्वी तट से आने वाली नम तटीय हवा के साथ मिलकर इस विशाल इमारत के ऊपरी बाहरी हिस्से से टकराती है. हवा के साथ आई नमी इमारत के संपर्क में आने पर कम तापमान होने पर जम जाती है. इस वजह से भी शंघाई टावर के टॉप फ्लोर पर बर्फ जमी रहती है. 

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गर्मी या बारिश के मौसम में टावर का टॉप भाग नीचे लटके हुए घने बादलों या बारिश वाले बादलों को सीधे भेदकर चमकदार, साफ धूप में पहुंच जाता है. वहीं सर्दियों में, नम ऊपर उठती हवा ठंडे स्टील और कांच  से टकराकर पाले और बर्फ में बदल जाती है.

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