हर रेलवे स्टेशन पर दो तरह के पानी की सुविधा होती है. एक पानी तो वो होता है, जो ट्रेन के वाटर टैंक में भरा जाता है जबकि एक वो होता है, जिसमें पीने का पानी होता है. कभी आपने सोचा है जो ये पीने वाली पानी है, वो कहां से आता है, क्या ये फिल्टर होकर होता है. दरअसल, हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें पता चला था कि कई रेलवे स्टेशन पर मिलने वाले पीने के पानी में कई बैक्टीरिया मिले थे.
तो आम हम आपको बताते हैं कि रेलवे स्टेशन पर मिलने वाले पानी का क्या गणित है? जानते हैं क्या स्टेशन पर आने वाला पानी सीधे नगर निगम की पाइपलाइन से आता है? अगर पानी में गंदगी हो तो उसे साफ कैसे किया जाता है? और क्या हर स्टेशन पर RO लगा होता है?
कितना शुद्ध है रेलवे का पानी पानी?
पहले जान लीजिए रेलवे के ड्रिंकिंग वाटर को लेकर सामने आई CAG की रिपोर्ट में क्या कहा गया है? CAG) की ऑडिट रिपोर्ट में कई स्टेशनों के वाटर कूलर से लिए गए पानी के सैंपल में E.coli बैक्टीरिया पाया गया है. ये बैक्टीरिया कुछ प्रकार के गंभीर संक्रमण, दस्त और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं.
कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण रेलवे (SR) के कोयंबटूर और पलक्कड़, दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद, मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भीवंडी रोड, कल्याण और लोनावाला और पूर्वी रेलवे के मधुपुर स्टेशन के वाटर कूलर सैंपल में E.coli की मौजूदगी सामने आई.
पानी आता कहां से है?
अब जानते हैं कि रेलवे स्टेशन पर पानी कैसे आता है. बता दें कि हर रेलवे स्टेशन पर पानी का सोर्स अलग अलग होता है. रेलवे के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, स्टेशन पर पानी की व्यवस्था के लिए ट्यूबवेल, कुआं, नदी, नहर की सप्लाई से किया जाता है. अगर कहीं ग्राउंड वॉटर को लेकर कुछ दिक्कत है तो वहां नगर निगम की ओर से पानी की सप्लाई की जाती है. लेकिन, ऐसा नहीं है कि पानी स्टेशन पर आया या फिर ट्यूबवैल से निकाला और सीधा नल में आ गया. इसका अलग सिस्टम होता है.
इसके बाद पानी की गुणवत्ता के हिसाब से उसे ट्रीट किया जाता है. इसके लिए फिल्ट्रेशन, क्लोरीनेशन और जरूरत पड़ने पर दूसरे तरीकों से इसे पीने योग्य बनाया जाता है. इसके बाद पानी को बड़े स्टोरेज टैंक में रखा जाता है और पाइपलाइन के जरिए स्टेशन के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया जाता है. लेकिन, ऐसा नहीं है कि हर स्टेशन पर आरओ के जरिए शुद्ध बनाया जाता है जबकि दूसरे तरीकों से भी इसे पानी लायक बनाया जाता है.
रेलवे की ओर से पानी को लेकर कुछ मानक तय किए गए हैं, उसमें पास होने के बाद पानी की सप्लाई आगे की जाती है. इसमें पानी के कई पैरामीटर देखे जाते हैं. इसमें pH, TDS, Turbidity, हार्डनेस, फ्लोराइड आदि को चेक किया जाता है और तय मानकों पर खरा उतरने के बाद भेजा जाता है. सीधे शब्दों में समझे तो हर स्टेशन पर मौजूद सोर्ससे पानी स्टेशन पर आता है, फिर एक जगह स्टोर किया जाता है और उसे पीने योग्य बनाकर नलों तक भेजा जाता है.
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