दिल्ली, नोएडा समेत देश के कई शहरों में एक मॉडल काफी तेजी से बढ़ रहा है, वो ही पीजी मॉडल. दिल्ली जैसे शहरों में तो पीजी मॉडल काफी अच्छा बिजनेस बन गया है लेकिन कई टायर-2 सिटी में भी ये मॉडल तेजी से ग्रो कर रहा है. लोग अपने घरों में एक स्पेस को कुछ लोगों को रहने के लिए दे देते हैं और उनसे अच्छा पैसा मिलता रहता है. लेकिन, सत्य निकेतन की घटना ने इस पीजी मॉडल के काले सच को फिर सामने ला दिया है, जिसके बाद से दिल्ली में पीजी बिल्डिंग्स पर कार्रवाई हो रही है. अब इसे लेकर बिल भी लाया जा रहा है और पीजी को लेकर नियम सेट किए जा रहे हैं. ऐसे में जानते हैं कि अगर आपने भी अपने घर या पीजी खोल रखा है तो किस तरह से ये मुश्किल में खड़ी कर सकता है.
क्या घर में पीजी बना सकते हैं?
घर में पीजी बनाने के लिए कोई तय नियमावली नहीं है और पीजी बनाए जाने को लेकर तय गाइडलाइन नहीं है. अगर आप अपने घर में कुछ लोगों को पीजी के रुप में रख रहे हैं तो कोई दिक्कत नहीं है. आप रिहायशी इलाकों में रहने के लिए अपने घर में किसी को जगह दे सकते हैं. लेकिन, यह स्थिति उस वक्त अलग हो जाती है, जब कोई अपने स्पेस में बड़ी संख्या में लोगों को रहने की जगह देता है. इसे एक पूरे बिजनेस की तरह रन करता है, तो रजिस्ट्रेशन, परमिशन जैसी स्थिति बनती है.
हालांकि, ऐसे कोई तय नियम नहीं है, जिसमें ये कहा गया हो कि कब इसे कॉमर्शियल माना जाएगा और कब इसे नॉर्मल रेजिडेंस माना जाएगा. इसलिए अगर आप बड़े स्केल में पीजी शुरू करना चाह रहे हैं या फिर रन कर रहे हैं तो इसका रजिस्ट्रेशन जरूरी हो जाता है. दिल्ली हाईकोर्ट के वकील के अनुसार, अगर पीजी शुरू कर रहे हैं तो इसके लिए प्रशासन, सरकार से इसकी परमिशन लेनी जरूरी है.
दरअसल, जब ज्यादा लोगों के लिए पीजी चलाते हैं तो उस स्थिति में बिल्डिंग की स्थिति, बिल्डिंग में हवा की स्थिति, फायर सिस्टम, गार्ड, वार्डन, कमरों की चौड़ाई आदि नियम इस पर लागू होते हैं. लेकिन, कुछ लोगों को रख रहे हैं तो ज्यादा शर्तों से गुजरना नहीं पड़ता है.
पीजी की कमाई को लेकर क्या है नियम?
अब बात करते हैं कि पीजी से जो कमाई होती है, उसे लेकर क्या नियम है. इसे लेकर चार्टेड अकाउंटेंट ने बताया कि इसकी कमाई को लेकर विरोधाभास है. अगर आप कुछ लोगों को घर में रख रहे हैं और उनसे पैसे ले रहे हैं तो आपको सिर्फ इनकम टैक्स फाइल करना होगा. आपको बताना होगा कि उससे कितनी कमाई हो रही है, जो नॉर्मल घर किराए देने के वक्त होता है. बस इसमें पुलिस वेरिफिकेशन करवाना होता है और पुलिस को बताना होता है कि आपके घर में कौन रह रहा है. वहीं, कमाई पर इनकम टैक्स के नॉर्मल रूल अप्लाई होंगे.
लेकिन, अगर बड़े स्केल पर पीजी बिजनेस कर रहे हैं तो इसके लिए आपको जीएसटी वाले सिस्टम में घुसना होगा. वैसे आम तौर पर अगर रिहायशी इलाके में आप किसी को रहने के लिए जगह देते हैं तो सामान्य तरीके से टैक्स फाइल करना होता है.
दिल्ली सरकार क्या करने वाली है?
दिल्ली सरकार अब पीजी आवासों को तय नियमों के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है. प्रस्तावित “पेइंग गेस्ट एकॉमोडेशन रेगुलेशन एंड वेलफेयर बिल” के तहत PG के पंजीकरण से लेकर किराया, सुरक्षा और शिकायत निवारण तक के लिए नए नियम बनाने का प्रस्ताव है. इसके बाद पीजी का रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. पीजी संचालकों को 90 दिनों के भीतर जोन अथॉरिटी से ऑपरेटिंग लाइसेंस लेना होगा. इसके लिए पुलिस, नगर निगम और स्थानीय प्रशासन से जरूरी एनओसी लेने का प्रावधान प्रस्तावित है.
रजिस्ट्रेशन के बाद हर पीजी को एक यूनिक पीजी रजिस्ट्रेशन नंबर (PGRN) दिया जाएगा, इससे अधिकारियों और छात्रों के लिए किसी पीजी की पहचान और उसकी वैधता जांचना आसान होगा. इसके साथ ही सीसीटीवी लगाने होंगे, जिन पीजी में 15 से ज्यादा लोग रहते हैं, उन्हें गार्ड की व्यवस्था करनी होगी. वार्डन भी रखना होगा.
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