कभी आपने सोचा है कि आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड बनवाने की कोई फीस नहीं लगती है, लेकिन पासपोर्ट बनवाने के लिए एक फीस देनी होती है. अब ये फीस भी बढ़ाकर 2500 रुपये कर दी गई है, जिसके भुगतान के बाद पासपोर्ट बनता है. अगर आप तत्काल पासपोर्ट बनवाने जाते हैं तो फीस और भी ज्यादा लगती है. ऐसे में सवाल है कि आखिर सरकार पासपोर्ट बनाते वक्त एक तय फीस क्यों लेती है. इसका जवाब सरकार ने संसद में दिया है और बताया है कि एक पासपोर्ट बनवाने में सरकार को कितने तरह के भुगतान करने होते हैं, जिसके बाद पासपोर्ट बनकर तैयार होता है.
दरअसल, संसद के मौजदा तत्र के दौरान जब सरकार से पासपोर्ट की फीस बढ़ाने को लेकर सवाल पूछा गया तो सदन में पासपोर्ट बनाने में होने वाले खर्चे के बारे में बताया गया. सरकार ने बताया कि पासपोर्ट बनाने की फीस समय-समय पर उसकी सर्विस को अच्छा बनाने के लिए बदली जाती है. पासपोर्ट फीस साल 1971, 1980, 1993, 2002, 2012 में बदली गई है. इसके बाद अब साल 2026 में जून में इसमें संशोधन किया गया है.
इसके साथ ही सरकार ने बताया कि सरकार ने बताया कि पासपोर्ट से जुड़ी सर्विस अच्छी होने का साथी है इन सर्विस की लागत भी बढ़ी है. सरकार की ओर से पासपोर्ट बनाने में पासपोर्ट बुकलेट की लागत, पासपोर्ट बुकलेट में डेटा प्रिंट करने की लागत, सर्विस प्रोवाइडर का चार्ज, पुलिस वेरिफिकेशन के लिए पुलिस डिपार्टमेंट को भुगतान, डाक विभाग को भुगतान, कूरियर फीस का भुगतान, टेक्निकल खर्च का भुगतान और ऑपरेशन, मेंटेंनेंस में काफी भुगतान किया जाता है.
सरकार ने बताया कि इसके अलावा संस्थागत व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर आदि के भी काफी खर्चे होते हैं. कुछ सालों में सर्विस प्रोवाइडर्स को ज्यादा भुगतान किया जा रहा है और सिक्योरिटी प्रेस (ISP) ने चिप आधारित ई-पासपोर्ट बुकलेट की लागत में काफी बढ़ोतरी की है. इसके साथ ही ई-पासपोर्ट बुकलेट से जुड़े कुछ अतिरिक्त खर्च भी हैं. इस वजह से फीस में बढ़ोतरी की गई है.
अब कितने रुपये लगते हैं?
पहले सामान्य कैटेगरी में 36 पेज के पासपोर्ट बनाने के लिए 1500 रुपये लिए जाते थे, जिसे बढ़ाकर अब 2500 कर दिया गया है. इसके अलावा पहले तत्काल फीस 3500 रुपये थी, जो अब 5000 रुपये कर दी गई है. 60 फेज के पासपोर्ट के लिए 3500 रुपये देने होंगे. वहीं, माइनर के 1750 रुपये फीस लगती है, जो पहले 1000 रुपये थी.
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