अगर सामान पसंद आ जाएगा तो रख लेंगे, नहीं तो वापस भेज देंगे. 3 मंगा लेते हैं, जो अच्छा लगेगा, वो रख लेंगे और बाकी वापस भेज देंगे. साइज का कंफ्यूजन है, दो मंगा लेते हैं, जो फिट आएगा, वो रख लेंगे, बाकि भेज देंगे. ऑनलाइन शॉपिंग करके वक्त अक्सर लोग इस तरह के तर्क देते हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि सामान रिटर्न करना भले ही आपके लिए नॉर्मल हो, मगर सामान रिटर्न करने से उस व्यापारी को काफी नुकसान होता है, जो इसे आप तक भेजता है. तो आज समझने की कोशिस करते हैं कि व्यापारियों को सामान रिटर्न करने से काफी नुकसान होता है...
कैसे काम करता है ऑनलाइन शॉपिंग सिस्टम?
एक सेलर पहले किसी ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर आईडी बनाता है. उसके बाद उसे कुछ लिस्टिंग मिलती है यानी सामान लगाने के लिए स्पेस. उसके बाद लोग ऑर्डर देना शुरू करते हैं. कपड़े के हिसाब से देखें तो आपने ऑर्डर किया. व्यापारी के पास ऑर्डर पहुंचा. उसने कपड़े को पैक किया और लॉजिस्टिक्स कंपनी के जरिए आपके घर भेज दिया. यहां व्यापारी के लिए खर्च सिर्फ कपड़े की कीमत तक सीमित नहीं है. पैकिंग मटेरियल लगा.
ऑर्डर को उठाने और आपके पते तक पहुंचाने की लॉजिस्टिक्स लागत लगी. प्लेटफॉर्म के साथ काम करने के हिसाब से दूसरी सर्विस फीस भी होती है. फिर कपड़ा आपके घर तक पहुंचता है. जब आप इसे रिटर्न कर देते हैं तो कपड़े को फिर से वहां से लेना होगा, उसे सेलर तक पहुंचाना होगा. एक ही सामान की फिर से वो ही जर्नी होगी. लेकिन, आपको अपने पैसे पूरे वापस मिल जाते हैं.
कैसे होता है नुकसान?
जब सामान रिटर्न होता है तो व्यापारी का पैकिंग, टैगिंग, बिल, प्रिंटआउट आदि का खर्चा व्यर्थ हो जाता है. इसके बाद आपके घर भेजने का कूरियर या शिपिंग चार्ज देना होता है और प्लेटफॉर्म अपनी फीस लेता है. अगर कोई सामान रिटर्न करता है तो सामान वापस मगंवाने के भी पैसे लग जाते हैं. रिटर्न की स्थिति में व्यापारी का पैकिंग, शिपिंग, रिटर्न का खर्चा एक्सट्रा लग जाता है और पैसे पूरे रिटर्न करने होते हैं. रिटर्न की स्थिति में व्यापारी का माल ही नहीं आता जबकि काफी एक्स्ट्रा पैसा लग जाता है.
अगर व्यापारियों से बात करें तो पता चलता है कि सबसे ज्यादा नुकसान रिटर्न से ही होता है. उसमें सामान भी आ जाता है और नुकसान अलग से होता है. सामान ना बिके तो कम से कम नुकसान तो नहीं होता, इस स्थिति में तो नुकसान हो जाता है.
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