नेपाल में ऊंचे पहाड़ों के खड़ी ढलानों पर एक खास तरह की मधुमक्खियां अपना छत्ता बनाती है. ये छत्ते ऐसी जगहों पर होते हैं कि इनसे शहद निकालना यानी मौत के मुंह में जाने के बराबर होता है. इस शहद को निकालना हर किसी के बस की बात नहीं होती है. इस शहद को निकालना जितना मुश्किल है. इसे खाना उतना ही खतरनाक होता है. क्योंकि, एक चम्मच से ज्यादा इस शहद को खाने से आप पूरे दिन बेसुध या बेहोश रह सकते हैं.
इस शहद को बनाने वाली मधुमक्खियों के छत्ते इतनी मुश्किल जगह पर होते हैं कि वहां से शहद निकालना मौत के मुंह में जाने जैसा होता है. इस शहद को 'मैड हनी', 'रेड हनी' और 'डेली बाल' भी कहा जाता है. यह एम्बर लाल रंग का होता है और इसकी सुगंध तीखी होती है. इसे खाने से लोगों में मतिभ्रम यानी होलोसिनेशन होने लगता है.
इस शहद को निकाल पाना सबके बस की बात नहीं होती है. कुछ माहिर लोग ही डेली बाल को छत्ते से निकाल पाते हैं. पूर्वी नेपाल में, कुलुंग जनजाति के कुछ चुनिंदा लोग 300 फुट ऊंची चट्टानों पर बांस की रस्सियों से बनी सीढ़ियों से चढ़कर इस शहद को निकालते हैं. वे एक खंभे से बंधी जलती हुई घास से निकलने वाले धुएं से मधुमक्खियों के झुंड को दूर भगाते हैं. इतना जोखिम उठाने के बाद यह शहद इकट्ठा हो पाती है.
आखिर क्यों इतना नशीला होता है ये शहद
इस शहद का स्वाद जिसने भी चखा है, उसने काफी ज्यादा नशे का अहसास किया है. ऐसे में यह समझना भी जरूरी है कि आखिर ये शहद इतनी शक्तिशाली और नशीली क्यों होती है. दरअसल, यह शहद हिमालयी क्षेत्रों में उगने वाले रोडोडेंड्रोन के फूलों के रस से बनता है. इन फूलों के रस में ग्रेयानोटॉक्सिन नामक एक प्राकृतिक विषैला पदार्थ पाया जाता है.
शहद में इसकी मात्रा मौसम और मधुमक्खियों द्वारा खाए गए अन्य फूलों के अनुसार बदलती रहती है, लेकिन एक चम्मच ही आपको हल्की नींद लाने वाला नशा दे सकता है. वहीं दो चम्मच से ज्यादा खाने पर आपको अस्पताल जाना पड़ सकता है.
इस शहद की मिठास के नीचे एक जड़ी-बूटी जैसी कड़वाहट छिपी होती है और गले के पिछले हिस्से में जलन महसूस होती है. इसके सेवन से मतिभ्रम जैसी समस्या होती. बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल के एक लोकल ने बताया था कि अगर आप इसकी तय मात्रा से ज्यादा शहद खा लेते हैं तो आप कभी रोशनी तो कभी अंधेरे में डूब जाते हैं. आप देख पाते हैं, और फिर नहीं देख पाते. आप हिल नहीं सकते, लेकिन फिर भी आप पूरी तरह होश में रहते हैं. यह नशा एक दिन तक रह सकता है.
इस शहद को खाकर पूरी सेना हो गई थी मदहोश
सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह शहद इतना ताकतवर है कि इसने एक पूरी सेना को पस्त कर दिया था. चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में, यूनानी सैन्य कमांडर ज़ेनोफोन ने काला सागर तट पर ट्राबज़ोन के पास यात्रा कर रहे सैनिकों के बारे में लिखा था. उन्होंने इस मीठे शदह का खूब सेवन कर लिया था. उनमें से कोई भी खड़ा नहीं हो पा रहा था, लेकिन जिन्होंने थोड़ा खाया था वे अत्यधिक नशे में धुत लोगों की तरह थे. वहीं जिन लोगों ने बहुत अधिक खाया था वे पागलों की तरह, या कुछ मामलों में तो मरणासन्न लोगों की तरह लग रहे थे. इसलिए वे बड़ी संख्या में वहां ऐसे पड़े रहे मानो सेना को हार का सामना करना पड़ा हो.
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यह मैड हनी दुनिया में सिर्फ दो ही जगह पाई जाती है. एक तुर्की के काला सागर इलाके में और दूसरा स्थान नेपाल की हिमालयी पर्वत श्रृंखला में. दोनों ही जगह इस शहद को खाने और इसे निकालने से जुड़े कई किस्से और कहानियां हैं. क्योंकि, जितना इसे खाना खतरनाक है. उतना ही इसे हिमालयी मधुमक्खियों के छत्ते से निकालना मुश्किल है.
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