हिंदुओं के लिए सबसे कठिन है कैलाश मानसरोवर यात्रा... नेपाल बाढ़ से क्या पड़ा असर?

Nepal Flood Videos: नेपाल-तिब्बत बॉर्डर के पास फ्लैश फ्लड से भारी तबाही मचाई है. इसका असर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर भी पड़ा है, जहां बड़ी संख्या में भारतीय भी जाते हैं.

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नेपाल बाढ़ से कैलाश मानसरोवर यात्रा प्रभावित हुई है. (Photo: Pexels) नेपाल बाढ़ से कैलाश मानसरोवर यात्रा प्रभावित हुई है. (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:00 PM IST

नेपाल के रसुवा जिले में भीषण फ्लैश फ्लड ने काफी तबाही मचाई है, जिसमें 133 भारतीय समेत 400 यात्रियों के लापता होने की खबर है. काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जा रहे करीब 400 तीर्थयात्री रसुवागढ़ी में अचानक आई बाढ़ के बाद संपर्क से बाहर हो गए हैं. इसका असर नेपाल और चीन के बीच आने-जाने वाले प्रमुख रसुवागढ़ी-केरुंग कॉरिडोर पर भी पड़ा है, जहां से लोग कैलाश-मानसरोवर तक जाते हैं. ऐसे में समझते हैं कि कैलाश मानसरोवर यात्रा पर इसका कितना असर पड़ा है और यात्री कितने प्रभावित हुए हैं. 

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बता दें कि बुधवार को 390 तीर्थयात्रियों के सीमा पार करने का कार्यक्रम था, जिसमें 93 नेपाली और अलग-अलग देशों के लोग शामिल थे. ये तीर्थयात्री विभिन्न ट्रैवल एजेंसियों के ग्राहक हैं. सम्राट टूर्स एंड ट्रेवल्स के 71 ग्राहक हैं, लीफ हॉलिडेज़ के 55, काठमांडू हॉलिडेज़ के 17, कैलाश जर्नी के 31, एक्सप्लोर वेकेशन के 7, ट्रेकर्स सोसाइटी के 92, रिचा टूर्स के 12, फिशटेल टूर एंड ट्रेवल्स के 27, हिमालयन ग्लेशियर के 62 और एल्पाइन इको ट्रेक के 16 ग्राहक हैं.

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर कितना असर पड़ा?

बता दें कि भारत से कैलाश मानसरोवर जाने के तीन अहम रूट हैं. इसमें एक रूट उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से होकर है और एक रूट सिक्किम के नाथु ला पास से है. इन दोनों रूट पर भारत सरकार की ओर से यात्रा करवाई जाती है. लेकिन, एक रूट और भी है, जो नेपाल से होकर है. यहां ट्रैवल एजेंट्स के जरिए लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जाते हैं.

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खास बात ये है कि नेपाल में भी अलग अलग टूर-ऑपरेटर, अलग-अलग रूट से कैलाश मानसरोवर की यात्रा करवाते हैं. 

रूट नंबर-1

नेपाल से जाने वाली यात्रा भारत सरकार की आधिकारिक कैलाश मानसरोवर यात्रा से अलग है. यहां आम तौर पर निजी टूर ऑपरेटर यात्रियों को तिब्बत ले जाते हैं. इसमें एक रूट रसुवागढ़ी-केरुंग रूट है, जिसमें काठमांडू-स्याफ्रुबेसी-टिमुरे-रसुवागढ़ी-केरुंग/ग्यिरोंग-सागा-मानसरोवर-दारचेन-कैलाश शामिल है. इसमें नेपाल की तरफ रसुवा और चीन की तरफ केरुंग/ग्यिरोंग पड़ता है. यानी नेपाल-तिब्बत सीमा इसी जगह पार की जाती है.

रूट नंबर-2

एक रूट हिल्सा-यारी रूट है. नेपाल से कैलाश जाने का दूसरा प्रमुख रास्ता पश्चिमी नेपाल से होकर जाता है. इस रूट में काठमांडू-नेपालगंज-सिमिकोट-हिल्सा-यारी बॉर्डर-पुरांग/तक्लाकोट-मानसरोवर-दारचेन-कैलाश है. इसमें पहले नेपाल के भीतर हवाई यात्रा से नेपालगंज और सिमिकोट पहुंचा जाता है. इसके बाद हेलीकॉप्टर से हिल्सा और वहां से नेपाल-तिब्बत सीमा पार करके चीन के तिब्बत क्षेत्र में प्रवेश किया जाता है. एक रूट ल्हासा होकर भी है. 

नेपाल बाढ से क्या पड़ा है असर?

दरअसल, भोटेकोशी नदी पर जो बाढ़ आई है, इससे कैलाश मानसरोवर यात्रा भी प्रभावित हुई है. इस बाढ़ ने पहले वाले रूट यानी रसुवागढ़ी-केरुंग रूट को प्रभावित किया है. अचानक बाढ़ ने स्याफ्रुबेसी और टिमुरे समेत बॉर्डर इलाके को प्रभावित किया है. सड़क और पुलों को नुकसान पहुंचा है और रसुवागढ़ी के रास्ते होने वाले सीमा-पार आवागमन बाधित हो गया है. 

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एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जो चीन-नेपाल इमिग्रेशन सेंटर का बताया जा रहा है, जो तबाह हो गया है. बताया जा रहा है कि यहां से चेकिंग होने के बाद आगे का रास्ता तय किया जाता है. 

क्यों खतरनाक है कैलाश यात्रा

समुद्र तल से करीब 14,000 से 19,500 फीट तक की ऊंचाई होने की वजह से और कठिन रास्तों, मौसम की विपरीत परिस्थितियों की वजह से इसे सबसे खतरनाक माना जाता है. इतनी ऊंचाई पर हवा में ऑक्सीजन की मात्रा बहुत कम हो जाती है, जिससे सांस लेने में तकलीफ, सिरदर्द, और चक्कर आने जैसी समस्याएं (ऑल्टीट्यूड सिकनेस) होने लगती हैं. इसके अलावा  कैलाश पर्वत की बाहरी परिक्रमा लगभग 52 किलोमीटर लंबी होती है, जिसे पैदल पूरा करने में 3 दिन लगते हैं. साथा ही रास्ता पथरीला, ऊबड़-खाबड़ और ढलान वाला होता है, जिससे जोड़ों और पैरों पर भारी दबाव पड़ता है.

इसके बीच में एक डोलमा ला पास आता है, जिसकी खतरनाक चढ़ाई पार करना सबसे कठिन हिस्सा है. यहां बिल्कुल सीधी और बर्फीली चढ़ाई होती है, जहां ठंड अत्यधिक होती है और शरीर की ऊर्जा तेजी से खत्म होती है. इसके अलावा यहां का मौसम पल-पल बदलता है. तेज ठंडी हवाएं, बर्फबारी और अचानक तापमान का शून्य से नीचे चले जाना यात्रियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर देता है.

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बता दें कि नेपाल बाढ़ में अभी तक 22 लोगों की मौत (समय- 17.30 बजे) हो गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के पीएम बालेन शाह से फोन पर बात की और नेपाल में बाढ़ से हुई जनहानि पर दुख जताया है. PM मोदी ने नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता और राहत मदद देने का भरोसा भी दिया. नेपाल में भोटेकोशी नदी की भीषण बाढ़ से मची तबाही के बाद भारत प्रभावित लोगों के लिए जल्द राहत सामग्री भेजने की तैयारी कर रहा है.

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