5 सितंबर 1972 को म्यूनिख ओलंपिक में आतंकवादी हमला हुआ था. फिलिस्तीनी आतंकवादियों के एक समूह ने इज़रायली एथलीटों के ओलंपिक विलेज अपार्टमेंट पर हमला कर दिया था. इसमें दो एथलीट मारे गए और नौ को बंधक बना लिया गया. ये आतंकवादी 'ब्लैक सितंबर' नामक समूह के सदस्य थे.
आतंकवादियों ने बंधकों की रिहाई के बदले में इज़रायल से मांग की थी कि वो इज़रायली जेलों में बंद 230 से अधिक अरब कैदियों और दो जर्मन आतंकवादियों को रिहा करे. म्यूनिख हवाई अड्डे पर हुई गोलीबारी में नौ इज़रायली बंधकों के साथ-साथ पांच आतंकवादी और एक पश्चिम जर्मन पुलिसकर्मी भी मारे गए. मारे गए एथलीटों के लिए श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने हेतु ओलंपिक प्रतियोगिता को 24 घंटे के लिए स्थगित कर दिया गया था
म्यूनिख ओलंपिक खेलों का उद्घाटन 26 अगस्त, 1972 को हुआ था. इसमें 195 स्पर्धाओं में 121 देशों के 7,173 एथलीटों ने भाग लिया. 5 सितंबर की सुबह, स्की मास्क पहने फ़िलिस्तीनी आतंकवादियों ने इजरायली टीम पर हमला कर दिया. नौ इज़रायली खिलाड़ियों को छुड़ाने के लिए बातचीत विफल होने के बाद, आतंकवादी बंधकों को म्यूनिख हवाई अड्डे ले गए.
वहां पहुंचते ही, जर्मन पुलिस ने छतों से गोलीबारी की और तीन आतंकवादियों को मार गिराया. इसके बाद गोलीबारी शुरू हो गई, जिसमें बंधक, दो अन्य फिलिस्तीनी और एक पुलिसकर्मी मारे गए.
मुख्य ओलंपिक स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए एक शोक सभा आयोजित करने के बाद, अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष एवरी ब्रुंडेज ने खेलों को जारी रखने का आदेश दिया, ताकि यह दिखाया जा सके कि आतंकवादियों की जीत नहीं हुई है.
हालांकि इस त्रासदी ने खेलों को बुरी तरह प्रभावित किया. फिर भी कई शानदार खेल उपलब्धियां देखने को मिलीं. इनमें अमेरिकी तैराक मार्क स्पिट्ज़ के सात स्वर्ण पदक और रूसी किशोरी जिम्नास्ट ओल्गा कोरबट की दो नाटकीय स्वर्ण पदक जीत शामिल हैं.
1972 के ओलंपिक खेलों में हुए हत्याकांड के बाद, गोल्डा मीर के नेतृत्व वाली इजरायली सरकार ने ब्लैक सितंबर के हत्यारों को ढूंढकर मारने के लिए मोसाद एजेंटों के एक समूह को नियुक्त किया. 2005 में बनी स्टीफन स्पीलबर्ग की फिल्म म्यूनिख इन्हीं घटनाओं पर आधारित थी.
aajtak.in