दिवाली और छठ को लेकर हवाई जहाज का किराया इन दिनों काफी ज्यादा हो गया है. पैसेंजर सोशल मीडिया पर इसकी शिकायत भी कर रहे हैं. साथ ही यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि क्या फ्लाइट की टिकटों की किराया कितना ज्यादा हो इसकी कोई लिमिट भी है या नहीं? चलिए जानते हैं इसका क्या जवाब हो सकता है. क्या हवाई जहाज का भी मैक्सिमम किराया तय किया जा सकता है?
भारत में एयरलाइन कंपनियों के पास नॉर्मल ऑपरेशन के लिए कोई परमानेंट, फिक्स्ड मैक्सिमम किराए की लिमिट नहीं है. इसके बजाय, कैरियर ऑपरेटिंग कॉस्ट, डिमांड, सीट की उपलब्धता और मार्केट की स्थितियों के आधार पर अपने टिकट के दाम डायनैमिकली तय होती है.
एयरलाइंस आमतौर पर डिमांड, सीटों की उपलब्धता, बुकिंग के समय और किराये की अलग-अलग क्लास के आधार पर कीमत तय करती हैं. ऐसा कोई नियम नहीं है जिसके तहत हवाई जहाज का अधिकतम किराया फिक्स किया जाए. हां, कुछ विशेष परिस्थितियों और आपात स्थिति में सरकार एयरलाइंस के किराये में हस्तक्षेप कर सकती है.
संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में इस साल फरवरी में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के राज्य मंत्री ने इस मुद्दे पर डिटेल में बताया था. उनके जवाब के मुताबिक, हवाई किराए सरकार के रेगुलेशन के दायरे में नहीं आते हैं. एयरलाइंस को 'एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937' के नियम 135 का पालन करते हुए, अपनी ऑपरेशन जरूरतों के आधार पर हवाई किराए तय करने की छूट है.
हवाई किराए सप्लाई और डिमांड जैसे आर्थिक फैक्टर के आधार पर बदलते रहते हैं. सीटों की मौजूदा उपलब्धता, ईंधन की लागत, विमान की क्षमता, मौसमी बदलाव और अन्य संबंधित कारक टिकट की कीमतों पर काफी असर डालते हैं. साथ ही बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए सरकार आमतौर पर हवाई किराए को कंट्रोल नहीं करती है.
कब सरकार किराये में हस्तक्षेप कर सकती है
हालांकि, सरकार स्थिति पर नजर रखती है और महामारी, महाकुंभ या पहलगाम हमले जैसी असाधारण परिस्थितियों में हस्तक्षेप करती है, ताकि यात्रियों के लिए हवाई यात्रा किफायती बनी रहे. जैसे दिसंबर 2025 की शुरुआत में एक घरेलू एयरलाइन की उड़ानों में भारी व्यवधान और हवाई किराए में अत्यधिक वृद्धि को देखते हुए, सरकार ने 6 दिसंबर 2025 के एक आदेश के जरिए, घरेलू एयरलाइंस द्वारा वसूले जाने वाले अधिकतम किराए को दूरी के आधार पर अस्थायी रूप से सीमित कर दिया था.
इसके अलावा, हवाई किराए में पारदर्शिता लाने के लिए, DGCA ने 'टैरिफ मॉनिटरिंग यूनिट' (TMU) भी बनाई है. यह यूनिट हर महीने एयरलाइंस की वेबसाइटों के जरिए 78 चुनिंदा रूटों पर हवाई किराए की रैंडम जांच करती है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि एयरलाइंस अपने द्वारा घोषित किराए की सीमा से बाहर जाकर पैसे न वसूलें.
जैसा कि 'एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937' के नियम 135 के उप-नियम (2) में प्रावधान है.
जब दिसंबर 2025 में सरकार ने घरेलू हवाई किराए पर इमरजेंसी कैप लगाया था. तब 500 km तक के रूट पर एक तरफ का किराया 7500 रुपये से ज्यादा नहीं लेने की बात कही गई थी. वहीं 1000 से 1500 km के बीच के रूट जैसे दिल्ली-मुंबई के लिए अधिकतम किराया 15,000 रुपये तय किए गए थे.
नए नियम में क्या होगा
अब सरकार ने भारतीय वायुयान नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं, जो 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे. नए नियमों के तहत भी सामान्य दिनों में हवाई किराए की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की गई है. एयरलाइंस ऑपरेशन की लागत और दूसरे संबंधित कारकों को ध्यान में रखकर किराया तय करेंगी और इसकी जानकारी DGCA को देंगी.
DGCA इन किरायों की निगरानी करेगा. हालांकि, किसी असाधारण परिस्थिति में जनहित को देखते हुए केंद्र सरकार किराये में हस्तक्षेप कर सकेगी. नए नियमों में टिकट बुकिंग के दौरान किराया, टैक्स, फीस और कैंसिलेशन चार्ज जैसी सभी जानकारियां अलग-अलग बताना भी जरूरी होगा.
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