आपने घर में छिपकली को तो कई बार देखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि अगर उसकी पूंछ शरीर से अलग हो जाए, तो वह कुछ समय तक हिलती रहती है? इसे देखकर मन में सवाल आता है कि आखिर शरीर से अलग होने के बाद भी पूंछ में हलचल कैसे होती रहती है. इसके पीछे छिपकली के शरीर की एक बेहद दिलचस्प नेचुरल प्रोसेस काम करती है. छिपकली के पास दुश्मनों से बचने का एक खास तरीका होता है. जब कोई उसे पकड़ने की कोशिश करता है, तो कई प्रजातियों की छिपकली अपनी पूंछ का एक हिस्सा शरीर से अलग कर देती हैं. इस प्रक्रिया को ऑटोटॉमी (Autotomy) कहा जाता है.
छिपकली की पूंछ में कुछ ऐसे हिस्से होते हैं, जहां से वह जरूरत पड़ने पर पूंछ को अलग कर सकती है. ऐसा करने के बाद छिपकली तेजी से वहां से भाग जाती है. यानी अपनी पूंछ छोड़ना उसके लिए जान बचाने का एक तरीका है.
शरीर से अलग होने के बाद भी क्यों हिलती है पूंछ?
अब सवाल आता है कि जब पूंछ शरीर से अलग हो गई, तो वह हिलती कैसे रहती है? इसका जवाब छिपकली की नसों और मांसपेशियों में छिपा है. पूंछ के अलग होने के तुरंत बाद भी उसकी कुछ नसों में तंत्रिका गतिविधि (Neural Activity) बनी रहती है. साथ ही, वहां मौजूद मांसपेशियां कुछ समय तक सिकुड़ती और फैलती रहती हैं. इसी वजह से जमीन पर पड़ी पूंछ अपने आप हिलती या फड़फड़ाती दिखाई देती है.
शिकारी को उलझाने के काम आती है हिलती पूंछ
छिपकली की पूंछ का इस तरह हिलना उसके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है. जब कोई शिकारी छिपकली को पकड़ने की कोशिश करता है और उसी समय पूंछ अलग होकर हिलने लगती है, तो उसका ध्यान उस हिलती हुई पूंछ की तरफ जा सकता है. शिकारी कुछ समय के लिए पूंछ में उलझ जाता है और इसी दौरान छिपकली को भागने का मौका मिल जाता है. यानी छिपकली अपनी पूंछ को एक तरह के ध्यान भटकाने वाले हथियार की तरह इस्तेमाल करती है.
हालांकि पूंछ छोड़कर छिपकली की जान बच सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूंछ उसके लिए बेकार है. पूंछ शरीर का संतुलन बनाए रखने और चलने-फिरने में मदद करती है. कुछ प्रजातियों में पूंछ शरीर में जमा एक्सट्रा फैट के भंडार के रूप में भी काम करती है. इसलिए पूंछ खोने के बाद छिपकली को कुछ नुकसान भी उठाना पड़ता है.
क्या छिपकली दोबारा पूंछ उगा सकती है?
छिपकली की सबसे दिलचस्प खूबियों में से एक यह है कि कई प्रजातियां अपनी खोई हुई पूंछ को दोबारा उगा सकती हैं. हालांकि, नई पूंछ बिल्कुल पहले जैसी नहीं होती. दोबारा उगी पूंछ की अंदरूनी बनावट मूल पूंछ से अलग हो सकती है. इसके बावजूद वह छिपकली को सामान्य गतिविधियों में मदद करती है. इस तरह छिपकली का शरीर समय के साथ अलग हुई पूंछ की जगह नई पूंछ बनाने की कोशिश करता है.
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