जब ईरान में हुआ तख्तापलट, अमेरिकी सरकार ने किया के सपोर्ट से हुआ था सबकुछ

आज के दिन ही ईरान में तख्तापलट कर अमेरिका ने शाह को सत्ता पर बैठाया था. इसके बाद ईरान पर दो दशक से भी ज्यादा समय तक अमेरिका का प्रभाव रहा.

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1953 में ईरान में आज के दिन ही तख्तापलट हुआ था (Photo - Getty) 1953 में ईरान में आज के दिन ही तख्तापलट हुआ था (Photo - Getty)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:30 AM IST

19 अगस्त 1953 को अमेरिकी सरकार के समर्थन और वित्तीय सहायता से ईरानी सेना ने प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेक की सरकार को उखाड़ फेंका. ईरान के शाह को सत्ता में फिर से स्थापित कर दिया. इस तरह ईरान शीत युद्ध के दौरान अमेरिका का एक मजबूत सहयोगी बना रहा, जब तक कि 1979 में एक क्रांति ने शाह के शासन का अंत नहीं कर दिया. 

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मोसादेक 1951 में ईरान में तब उभरे, जब उन्हें प्रधानमंत्री बनाया गया.  एक कट्टर राष्ट्रवादी, मोसादेक ने तुरंत अपने देश में कार्यरत ब्रिटिश तेल कंपनियों पर हमले शुरू कर दिए और तेल क्षेत्रों के अधिग्रहण और राष्ट्रीयकरण की मांग की. उनके इन कार्यों के कारण उनका ईरान के पश्चिमी समर्थक अभिजात वर्ग और शाह मोहम्मद रजा पहलवी के साथ टकराव हुआ.

दरअसल, शाह ने 1952 के मध्य में मोसादेक को पद से हटा दिया, लेकिन इस कार्रवाई की निंदा करते हुए हुए व्यापक जन दंगों ने शाह को कुछ समय बाद मोसादेक को पुनः बहाल करने के लिए मजबूर कर दिया. अमेरिकी अधिकारी ईरान में हो रही घटनाओं को बढ़ते संदेह के साथ देख रहे थे.

अमेरिकी केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआईए) के साथ काम कर रहे ब्रिटिश खुफिया सूत्रों ने यह निष्कर्ष निकाला कि मोसादेक में साम्यवादी विचारधारा थी और यदि उन्हें सत्ता में बने रहने दिया गया तो वे ईरान को सोवियत संघ के प्रभाव क्षेत्र में ले जाएंगे.

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शाह के साथ मिलकर, सीआईए और ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों ने मोसादेक को सत्ता से हटाने की साजिश रचनी शुरू की. हालांकि, ईरानी प्रधानमंत्री को इस योजना की भनक लग गई और उन्होंने अपने समर्थकों को विरोध प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरने का आह्वान किया.

इसी दौरान, शाह चिकित्सा कारणों से देश छोड़कर चले गए. ब्रिटिश खुफिया एजेंसियां ​​इस गड़बड़ी से पीछे हट गईं. फिर भी सीआईए ने ईरान में अपने गुप्त अभियान जारी रखे. शाह समर्थक बलों और सबसे महत्वपूर्ण रूप से ईरानी सेना के साथ मिलकर, सीआईए ने बहला-फुसलाकर, धमकाकर और रिश्वत देकर अपना प्रभाव जमाया. उसने मोसादेक के खिलाफ एक और तख्तापलट के प्रयास को अमली जामा पहनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

19 अगस्त 1953 को सीआईए की फंडिंग से  ईरान की सड़कों पर प्रदर्शन हुए. इन प्रदर्शन और आंदोलन के समर्थन से सेना ने मोसादेक को सत्ता से हटा दिया. इसके बाद शाह ने तुरंत सत्ता में वापसी की और अमेरिकी मदद के लिए धन्यवाद के रूप में, ईरान के 40 प्रतिशत से अधिक तेल क्षेत्रों को अमेरिकी कंपनियों को सौंप दिया.

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