आपने तोरई की सब्जी तो कई बार खाई होगी, लेकिन क्या आप जानते हैं इसी तोरई को सुखाकर लोग विदेश में अच्छी कमाई करते हैं. आप भी सोच रहे होंगे कि आखिर तोरई को सुखाकर कैसे कमाई हो सकती है, ये तो कुछ दिन में ही खराब हो जाती है, फिर कैसे कमाई होती है. तो आज हम आपको बताते हैं कि आखिर सुखी तोरई को किस तरह से महंगे दाम में बेचा जाता है और कैसे तोरई से मोटा पैसा कमाया जाता है.
पहले तो आपको बता दें कि तोरई को सुखाकर सीधे नहीं बेचा जाता है. इसे सुखाने के बाद कुछ प्रोसेसिंग के जरिए गुजारा जाता है और उसके बाद कई तरह के प्रोडक्ट बनाए जाते हैं. इन प्रोडक्ट की बाजार में काफी डिमांड रहती है और लोग मंहगे दाम में उन प्रोडक्ट्स को खरीदते हैं, जिससे लोग अच्छा पैसे कमाते हैं.
तोरई से कौनसे प्रोडक्ट बनते हैं?
दरअसल, जिस तोरई को हम सब्जी के रूप में जानते हैं, उसके पूरी तरह पकने और सूखने के बाद अंदर एक जाल जैसा रेशेदार ढांचा बनता है. इसी का इस्तेमाल करके कई तरह के प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं. विदेशों में इस प्राकृतिक रेशे को लोफा के नाम से जाना जाता है. मिस्र जैसे देशों में प्राकृतिक लोफा के उत्पादन और प्रोसेसिंग से जुड़ा कारोबार है, जबकि चीन भी लोफा से बने उत्पादों के निर्यात में शामिल है.
रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन से भी लोफा स्पंज और उनसे बने उत्पादों का निर्यात होता है. जुलाई 2024 से जून 2025 के दौरान लोफा-स्पंज की एक श्रेणी में चीन से 175 निर्यात शिपमेंट दर्ज किए गए. यह उस प्लेटफॉर्म पर दर्ज शिपमेंट का आंकड़ा है, दुनिया के कुल निर्यात की पूरी गिनती नहीं. इस कारोबार की खास बात यह है कि कम इस्तेमाल में आने वाले एक कृषि उत्पाद को प्रोसेस करके कई तरह की चीजों में बदला जा सकता है.
उससे नहाने का स्पंज, बर्तन साफ करने वाला स्क्रबर और कई दूसरे प्रोडक्ट भी बनाए जाते हैं. इन प्रोडक्ट में बाथ स्पंज, किचन स्क्रबर, सोप स्टैंड, मैट, स्टीम मैट, सजावटी सामान आदि बनाए जाते हैं. बता दें कि तोरई से बनने वाले नैचुरल स्क्रबर की काफी डिमांड रहती है और ये प्राइम कैटेगरी में मोटे दाम पर बिकते हैं. बाजार में ये प्रोडक्ट एक डॉलर से लेकर 5-7 डॉलर तक में बिकते हैं और इसकी काफी डिमांड भी रहती है.
कैसे बनता है तोरई से स्क्रबर या दूसरे सामान?
ये तो आप जान गए कि तोरई से क्या क्या बनता है. अब जानते हैं कि आखिर कैसे तोरई को सुखाकर ये सब बनाया जाता है. तोरई की कुछ किस्मों को पूरी तरह परिपक्व होने तक बेल पर रहने दिया जाता है. जब फल पककर सूखने लगता है, तो उसका बाहरी छिलका हटाया जाता है और अंदर मौजूद बीज निकाल दिए जाते हैं. इसके बाद बचता है रेशों का जाल, जिसे साफ करके और जरूरत के मुताबिक काटकर इस्तेमाल किया जा सकता है.
यही रेशेदार हिस्सा प्राकृतिक बाथ स्पंज और स्क्रबर के रूप में काम आता है. इसे अलग-अलग आकार में काटकर, कभी-कभी कॉटन या दूसरे मटीरियल के साथ जोड़कर तैयार प्रोडक्ट बनाया जाता है. इसके बाद इनकी पैकेजिंग करके इन्हें दुकानों, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और थोक खरीदारों को बेचा जा सकता है. आप इंटरनेट पर देख सकते हैं कि कई कंपनियां इस सेक्टर में डील कर रही हैं और ऑनलाइन इससे बनने वाले प्रोडक्ट बेच रही हैं.
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