घोड़ों पर नाल का प्रयोग हजारों वर्षों से होता आ रहा है. घोड़ों को नाल पहनाने की प्रथा पश्चिमी यूरोप में 1000 ईस्वी में शुरू हुई. इसका कारण संभवतः वहां की जलवायु और घोड़ों के खुरों पर इसका प्रभाव था. घोड़े को नाल पहनाने के कई तरीके होते हैं. चलिए जानते हैं आखिर कैसे घोड़े को लोहे की नाल पहनाई जाती है.
घोड़े को नाल पहनाना चाहिए या उसे नंगे पैर रखना चाहिए. यह तय करना मुश्किल हो सकता है. क्योंकि दोनों के अपने-अपने फायदे और नुकसान हैं. कुछ घोड़ों के लिए, नाल की जरूरत खुरों के स्वास्थ्य, कार्यभार, घुड़सवारी के अनुशासन और यहां तक कि उनके रहने वाले क्षेत्र जैसे चीजों पर निर्भर करता है.
घोड़ों में नाल लगाना उनके खुरों और स्वास्थ्य संबंधी कुछ समस्याओं के उपचार के तौर पर होता है. नाल खुरों को घिसाव, दरारें या पत्थर लगने जैसी चोटों से बचाती हैं. इससे घोड़े को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है और नंगे पैर वाले घोड़ों की तुलना में उसके खुरों में दर्द कम होता है.
इसके अलावा कई बार कई सतहों पर नंगे खुर की तुलना में घोड़े की नाल की ग्रीप काफी मजबूत हो जाती है. इससे घोड़ों को ऊबड़-खाबड़ इलाकों, बर्फ, कीचड़ आदि पर बेहतर ढंग से चलने में मदद मिल सकती है
घोड़ों के खुर में नाल कैसे लगाई जाती है?
घोड़ों में नाल लगाने वाले को फेरियर कहा जाता है. फेरियर एक तरह से लोहार ही होता है. वह घोड़े के पैरों की देखभाल और नाल लगाने का काम बड़े ही व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से करता है. घोड़े में नाल लगाने का प्रोसेस अलग- अलग होता है.
एक तरीका हॉट शूइंग होता है. इसमें घोड़े के खुर में नाल लगाने से पहले खुर को गर्म लोहे से जलाया जाता है. उसके बाद इसमें नाल लगाई जाती है. घोड़े के खुर में नाल लगाने से पहले गर्म यानी तपाए गए लोहे की नाल को खुर पर हल्का सा लगाया जाता है. इसे 'हॉट फिटिंग' कहते हैं. इससे घोड़े को दर्द नहीं होता. क्योंकि खुर का वह बाहरी हिस्सा हमारे नाखूनों की तरह संवेदनहीन होता है.
गर्म नाल खुर से छूकर उस पर हल्का सा निशान बना देती है. इससे लोहार को पता चलता है कि नाल का आकार खुर के बिल्कुल बराबर है या नहीं. इसके बाद नाल को भट्टी में लाल होने तक गर्म किया जाता है. फिर हथौड़े से पीटकर उसे घोड़े के खुर का सटीक आकार दिया जाता है. इससे नाल खुर पर पूरी तरह और मजबूती से फिट बैठती है.यह खुर के बाहरी हिस्से को बंद करके नमी और कीटाणुओं को अंदर जाने से रोकता है.
दूसरा तरीका होता है कोल्ड शूइंग. इसमें बिना गर्म किए रेडीमेड नाल को ही थोड़े बहुत बदलाव के साथ फिट किया जाता है. इस में नाल को खुर में लगाकर कील ठोकी जाती है.
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