कांच, चांदी... दांत में जो मसाला भरते हैं डॉक्टर, वो क्या चीज होती है?

दांत में कैविटी होने पर डॉक्टर खराब हिस्सा साफ करके उसमें फिलिंग करते हैं, जिसे आम भाषा में दांत का ‘मसाला’ कहा जाता है. लेकिन यह मसाला एक ही चीज से नहीं बनता. इसमें कंपोजिट रेजिन, ग्लास आयोनोमर सीमेंट और अमलगम जैसी अलग-अलग दंत सामग्री इस्तेमाल की जा सकती है.

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 मरीज की जरूरत के हिसाब से डॉक्टर अलग-अलग मटेरियल का इस्तेमाल कर सकते हैं. ( Photo: ITG) मरीज की जरूरत के हिसाब से डॉक्टर अलग-अलग मटेरियल का इस्तेमाल कर सकते हैं. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:31 AM IST

दांत में कीड़ा लगने या कैविटी होने पर आपने अक्सर सुना होगा कि डॉक्टर ने दांत में 'मसाला' भर दिया. कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर ये मसाला बना किस चीज से होता है? क्या इसमें सच में चांदी होती है? क्या यह कांच जैसा कोई मटेरियल है या फिर कोई खास तरह का केमिकल? दरअसल, दांत भरने के लिए एक ही तरह के मटेरियल का इस्तेमाल नहीं होता. दांत की हालत, कैविटी कितनी बड़ी है, दांत किस जगह है और मरीज की जरूरत के हिसाब से डॉक्टर अलग-अलग मटेरियल का इस्तेमाल कर सकते हैं.
 
सबसे पहले समझिए दांत में मसाला क्यों भरते हैं
जब दांत में कैविटी हो जाती है तो उसका खराब हिस्सा धीरे-धीरे निकल जाता है. अगर इसे समय पर नहीं रोका जाए तो सड़न दांत के अंदर तक पहुंच सकती है और दर्द, इंफेक्शन या जड़ में समस्या हो सकती है. ऐसे में डॉक्टर आमतौर पर दांत के खराब हिस्से को साफ करके उस खाली जगह को भर देते हैं. इसी प्रोसेस को आम भाषा में दांत में 'मसाला भरना' कहा जाता है. इसका मकसद सिर्फ खाली जगह भरना नहीं होता. भराव से दांत को फिर से सामान्य तरीके से इस्तेमाल करना आसान हो जाता है और उसमें खाना फंसने की परेशानी भी कम हो सकती है.

सफेद रंग की फिलिंग किस चीज की होती है?
आजकल दांतों में सबसे ज्यादा दिखाई देने वाली फिलिंग सफेद या दांत के रंग जैसी होती है. इसे आमतौर पर कंपोजिट रेजिन कहा जाता है. यह एक खास तरह के डेंटल प्रोडक्ट होते हैं, जिसमें रेजिन के साथ बहुत बारीक कांच जैसे पार्टिकल्स मिलाए जाते हैं. यही वजह है कि इसे मजबूत बनाने के साथ-साथ दांत के रंग के करीब भी बनाया जा सकता है. डॉक्टर इसे दांत में लगाकर खास रोशनी की मदद से सख्त करते हैं. सख्त होने के बाद यह दांत के साथ मजबूती से जुड़ जाती है.

क्या दांत की फिलिंग में सच में कांच होता है?
कुछ फिलिंग सामग्री में बहुत बारीक कांच के पार्टिकल्स मौजूद हो सकते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि डॉक्टर दांत के अंदर कांच का टुकड़ा भर देते हैं. डेंटल ट्रीटमेंट में इस्तेमाल होने वाला प्रोडक्ट बहुत बारीक पार्टिकल्स के रूप में दूसरी सामग्री के साथ मिलाया जाता है. इसका काम फिलिंग को मजबूत बनाने और उसके गुणों को बेहतर करने में मदद करना है.

फिर चांदी वाली फीलिंग क्या होती है?
पुराने समय से दांतों में एक खास तरह के मेटल वाली फिलिंग का इस्तेमाल होता रहा है, जिसे डेंटल अमलगम कहा जाता है. इसका रंग चांदी जैसा दिखाई देता है, इसलिए आम बोलचाल में कई लोग इसे 'चांदी की फिलिंग' कहते हैं. लेकिन यह शुद्ध चांदी नहीं होती. अमलगम एक मिक्स्ड सामग्री है. इसमें मुख्य रूप से चांदी, टिन और तांबे जैसी धातुओं का मिश्रण होता है और इसे मरकरी के साथ मिलाकर फिलिंग तैयार की जाती है. हालांकि आजकल दांत के रंग वाली फिलिंग जैसी दूसरी सामग्रियों का इस्तेमाल भी काफी आम है. कौन-सी सामग्री इस्तेमाल करनी है, यह दांत की स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है.

एक और फिलिंग होती है कांच जैसी
दांतों में ग्लास आयोनोमर सीमेंट नाम के प्रोडक्ट का भी इस्तेमाल किया जाता है. नाम से ही पता चलता है कि इसमें कांच से जुड़े पदार्थ शामिल होते हैं. यह दांत से जुड़ने की क्षमता रखती है और कुछ परिस्थितियों में इसका इस्तेमाल किया जाता है. खासकर ऐसी जगहों पर जहां फिलिंग से जुड़ी कुछ अलग जरूरतें हों. फिलिंग कितने समय तक चलेगी, यह कई बातों पर निर्भर करता है. फिलिंग किस सामग्री की है, कैविटी कितनी बड़ी थी, दांत पर कितना दबाव पड़ता है और व्यक्ति अपने दांतों की कितनी अच्छी तरह सफाई करता है. बहुत ज्यादा कठोर चीजें चबाने, दांतों की ठीक से सफाई न करने या फिलिंग के आसपास फिर से कैविटी बनने पर फिलिंग खराब हो सकती है.

फिलिंग के बाद भी दांतों की सफाई जरूरी
कई लोग सोचते हैं कि एक बार दांत में मसाला भर गया तो समस्या खत्म हो गई. ऐसा नहीं है. फिलिंग खराब हुए हिस्से को ठीक करने में मदद करती है, लेकिन आगे नई कैविटी बनने से नहीं रोकती. इसलिए रोजाना ब्रश करना, दांतों के बीच फंसे खाने को साफ करना और समय-समय पर दांतों की जांच कराना जरूरी है. यानी दांत में डॉक्टर जो 'मसाला' भरते हैं, वह कोई एक खास पदार्थ नहीं होता. यह कंपोजिट रेजिन, अमलगम, ग्लास आयोनोमर सीमेंट या दूसरी दंत सामग्री हो सकती है. डॉक्टर दांत की हालत देखकर तय करते हैं कि उसमें कौन-सी चीज भरना सही रहेगा.

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