सेरेमिक और विट्रीफाइड टाइल्स क्या होती है? किसमें कम आएगा खर्चा

टाइल्स खरीदने से पहले कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है. जैसे उन्हें दीवार पर लगाना है या फर्श पर. क्योंकि, हर टाइल हर जगह इस्तेमाल करने के लिए नहीं बनी होती. चलिए ऐसे में जानते हैं कि सेरेमिक और विट्रीफाइड टाइल्स क्या होती है? साथ ही इनमें से कौन सी लगाना सस्ता पड़ेगा.

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टाइल्स लगाने से पहले उसके इस्तेमाल को समझना जरूरी होता है (Photo - AI Generated) टाइल्स लगाने से पहले उसके इस्तेमाल को समझना जरूरी होता है (Photo - AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:08 PM IST

घर बनवाते समय फर्श और दीवारों के लिए सही टाइल्स चुनना जरूरी होता है. बाजार में सेरेमिक और विट्रीफाइड, दो तरह की टाइल्स काफी इस्तेमाल की जाती हैं. पहली नजर में दोनों एक जैसी दिख सकती हैं, लेकिन इनकी बनावट, मजबूती, पानी सोखने की क्षमता और कीमत में अंतर होता है. ऐसे में सवाल है कि घर के लिए कौन सी टाइल्स बेहतर रहेगी और कौन सी लगाने पर खर्च कम आएगा? आइए समझते हैं.

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क्या होती हैं सेरेमिक टाइल्स?
सेरेमिक टाइल्स मिट्टी, पानी और दूसरे खनिजों को मिलाकर बनाई जाती हैं. इस मिश्रण को आकार देकर भट्ठी में पकाया जाता है. इनकी सतह पर अक्सर ग्लेज यानी चमकदार या रंगीन परत भी चढ़ाई जाती है, जिससे टाइल्स देखने में अच्छी लगती हैं और साफ करना आसान होता है.

सेरेमिक टाइल्स आमतौर पर विट्रीफाइड टाइल्स के मुकाबले ज्यादा पानी सोखती हैं. हालांकि, पानी सोखने की क्षमता टाइल्स की गुणवत्ता और उसकी सतह पर की गई कोटिंग पर भी निर्भर करती है. ये अपेक्षाकृत कम कीमत में मिल जाती हैं, इसलिए बजट में घर बनवाने या रिनोवेशन कराने वालों के लिए अच्छा विकल्प हो सकती हैं.

इनका इस्तेमाल बाथरूम और किचन की दीवारों, बेडरूम की दीवारों और कम आवाजाही वाले हिस्सों में किया जाता है. फर्श पर भी सेरेमिक टाइल्स लगाई जा सकती हैं, लेकिन इसके लिए उनकी मजबूती और फिसलन से बचाव की क्षमता देखना जरूरी है.

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क्या होती हैं विट्रीफाइड टाइल्स?
विट्रीफाइड टाइल्स बनाने के लिए मिट्टी, सिलिका, फेल्डस्पार और क्वार्ट्ज जैसे पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है. इन चीजों को मिलाकर बहुत अधिक तापमान पर पकाया जाता है. इस प्रक्रिया को विट्रीफिकेशन कहते हैं. इससे टाइल्स के अंदर कांच जैसी सघन संरचना बनती है और उनके छिद्र काफी कम हो जाते हैं.

इसी वजह से अच्छी गुणवत्ता वाली विट्रीफाइड टाइल्स बहुत कम पानी सोखती हैं. आमतौर पर इनमें जल एब्जॉर्ब 0.5 फीसदी से कम होता है. ये दाग-धब्बों और रोजमर्रा के इस्तेमाल से होने वाली खरोंच का भी अच्छा मुकाबला कर सकती हैं. हालांकि, इनका परफॉर्मेंस टाइल्स के प्रकार, सतह की फिनिश और गुणवत्ता पर निर्भर करता है.

इनका इस्तेमाल लिविंग रूम, किचन, ऑफिस, दुकानों और ज्यादा आवाजाही वाले हिस्सों में किया जाता है. पॉलिश्ड विट्रीफाइड टाइल्स चमकदार फिनिश देती हैं, जबकि मैट और एंटी-स्किड विकल्प उन जगहों के लिए उपयोगी हो सकते हैं जहां फिसलने का खतरा रहता है.

सेरेमिक और विट्रीफाइड टाइल्स में फर्क क्या है?
दोनों टाइल्स के बीच सबसे बड़ा अंतर इनकी बनावट और पानी सोखने की क्षमता का है. सेरेमिक टाइल्स आमतौर पर ज्यादा छिद्रयुक्त होती हैं, जबकि विट्रीफाइड टाइल्स अधिक सघन होती हैं. इस वजह से विट्रीफाइड टाइल्स को फर्श के लिए अक्सर ज्यादा टिकाऊ विकल्प माना जाता है.

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सेरेमिक टाइल्स हल्के बजट में दीवारों और सामान्य इस्तेमाल वाले हिस्सों के लिए अच्छी रहती हैं. वहीं, विट्रीफाइड टाइल्स ज्यादा आवाजाही वाले फर्श के लिए बेहतर विकल्प हो सकती हैं. दोनों में डिजाइन, रंग और फिनिश के कई विकल्प मिलते हैं.

इनकी उम्र की बात करें तो अच्छी गुणवत्ता वाली सेरेमिक टाइल्स सामान्य इस्तेमाल में करीब 10 से 15 साल तक चल सकती हैं. विट्रीफाइड टाइल्स की उम्र करीब 15 से 25 साल तक हो सकती है. हालांकि, यह कोई तय समय सीमा नहीं है. सही तरीके से लगाने, अच्छी देखभाल और इस्तेमाल की परिस्थितियों के हिसाब से इनकी उम्र कम या ज्यादा हो सकती है.

कौन सी टाइल्स पड़ेगी सस्ती?
अगर शुरुआती कीमत की बात करें तो सेरेमिक टाइल्स आमतौर पर विट्रीफाइड टाइल्स से सस्ती पड़ती हैं. खासकर दीवारों पर लगाने के लिए ये बजट के लिहाज से अच्छा विकल्प हैं. हालांकि, दोनों की कीमत आकार, डिजाइन, मोटाई, ब्रांड और क्वालिटी के हिसाब से बदलती है.

विट्रीफाइड टाइल्स की शुरुआती कीमत अधिक हो सकती है, लेकिन फर्श पर लंबे समय तक इस्तेमाल और कम पानी सोखने की क्षमता के कारण ये अच्छा विकल्प साबित हो सकती हैं. अगर किसी जगह पर ज्यादा आवाजाही होती है, तो वहां केवल कम कीमत देखकर टाइल्स चुनना सही नहीं होगा.

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टाइल्स खरीदते समय सिर्फ प्रति वर्ग फुट कीमत न देखें. टाइल्स लगाने की मजदूरी, चिपकाने वाले मटेरियल, कटिंग, किनारों की फिनिशिंग और खराब टाइल्स की संभावित बर्बादी का खर्च भी जोड़ें. इससे कुल बजट का सही अंदाजा लगेगा.

घर के किस हिस्से में कौन सी टाइल्स लगाएं?
बाथरूम, किचन और बेडरूम की दीवारों पर सेरेमिक टाइल्स किफायती विकल्प हो सकती हैं. यहां कम वजन और साफ-सफाई में आसानी जैसे पहलुओं पर ध्यान दें.

बेडरूम के फर्श के लिए अगर बजट कम है, तो अच्छी गुणवत्ता वाली फ्लोरिंग सेरेमिक टाइल्स चुनी जा सकती हैं. टाइल्स की मजबूती और फिसलन की जांच जरूर करें.

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लिविंग रूम और ऑफिस के लिए ज्यादा आवाजाही वाले हिस्सों में विट्रीफाइड टाइल्स उपयोगी हो सकती हैं. यहां ऐसी टाइल्स चुनें जो रोजमर्रा के इस्तेमाल को सहन कर सकें.

बाथरूम और बालकनी के लिए केवल टाइल्स की कीमत या चमक न देखें. फिसलन से बचाव, पानी की निकासी और सही वॉटरप्रूफिंग भी जरूरी है. गीले फर्श के लिए उपयुक्त एंटी-स्किड टाइल्स चुनना बेहतर रहता है.

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