बद्रीनाथ हेलीकॉप्टर हादसे में मारे गए सभी 6 लोगों के शव बरामद, 100 जवानों ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

उत्तराखंड के चमोली जिले में बद्रीनाथ से देहरादून जा रहे हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद करीब 100 जवानों ने दो दिन तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के बावजूद सभी छह मृतकों के शव रविवार सुबह सुरक्षित रूप से नीचे लाए गए.

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बदरीनाथ धाम में हेलीकॉप्टर हादसा. (Photo-ITG) बदरीनाथ धाम में हेलीकॉप्टर हादसा. (Photo-ITG)

कमल नयन सिलोड़ी

  • देहरादून,
  • 01 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:47 AM IST

उत्तराखंड के चमोली जिले में बद्रीनाथ धाम से देहरादून जा रहे हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो गया है. करीब दो दिनों तक चले अभियान के बाद रविवार सुबह सभी छह मृतकों के शव दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र से नीचे लाए गए. शवों को पोस्टमार्टम और पहचान संबंधी प्रक्रियाओं के लिए एम्स ऋषिकेश भेज दिया गया है.

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दरअसल, शुक्रवार (30 अक्टूबर) दोपहर 1:15 बजे ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का हेलीकॉप्टर VT-HCX बद्रीनाथ धाम से सहस्त्रधारा (देहरादून) के लिए उड़ान भर रहा था. इसी दौरान ज्योतिर्मठ क्षेत्र के हाथी पर्वत के पास स्वारी खर्क में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. यह इलाका पांडुकेश्वर के ऊपर जोशीमठ घाटी में स्थित है.

हेलीकॉप्टर में कर्नाटक के पांच श्रद्धालु और दिल्ली निवासी पायलट कैप्टन हिमांशु समेत कुल छह लोग सवार थे. हादसे में सभी की मौत हो गई थी.

दुर्गम पहाड़ियों में 100 जवानों ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

हादसे की सूचना मिलते ही चमोली पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, भारतीय सेना, आईटीबीपी, जिला प्रशासन, फायर और वन विभाग की संयुक्त टीम को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया. इस अभियान में करीब 100 जवान शामिल थे. दुर्घटनास्थल घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच स्थित होने के कारण बचाव दल को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. खराब मौसम, बर्फबारी और अंधेरे ने रेस्क्यू ऑपरेशन को और चुनौतीपूर्ण बना दिया.

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शुक्रवार रात मौसम खराब होने और अंधेरा बढ़ने के कारण अभियान अस्थायी रूप से रोकना पड़ा. इसके बाद शनिवार सुबह करीब 5 से 6 बजे के बीच दोबारा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया.

घटनास्थल तक पहुंचने में लगे 6 से 7 घंटे

रेस्क्यू टीमों को पैदल रास्ते से दुर्घटनास्थल तक पहुंचने में करीब 6 से 7 घंटे लग गए. पहाड़ी की ऊपरी चोटी पर तैनात सेना के जवान सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे, जबकि नीचे से रवाना हुई अन्य टीमें शनिवार दोपहर बाद वहां पहुंच सकीं. संयुक्त टीमों ने घटनास्थल से सभी शवों को एकत्र कर बॉडी बैग में रखा. इसके बाद दुर्गम रास्तों को देखते हुए रेस्क्यू का मार्ग बदलकर टोली नाला की ओर अभियान आगे बढ़ाया गया.

पूरी रात चले ऑपरेशन के बाद रविवार सुबह करीब 4 से 5 बजे तक सभी छह शवों को नीचे लाने में सफलता मिली. शवों को चाही गांव के टोली नाला से होते हुए सड़क मार्ग तक पहुंचाया गया. इसके बाद जोशीमठ और वहां से एनटीपीसी हेलीपैड लाया गया.

डीएनए जांच से होगी मृतकों की पहचान

जोशीमठ के उपजिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि दुर्घटना की सूचना मिलते ही सेना, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, स्थानीय पुलिस, प्रशासन, फायर और वन विभाग की संयुक्त टीम को रेस्क्यू के लिए भेजा गया था. उन्होंने बताया कि टीमों को पांडुकेश्वर से पैदल ट्रैक के जरिए बेहद कठिन पहाड़ी रास्तों को पार करना पड़ा. इसी वजह से अभियान पूरा होने में काफी समय लगा.

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अधिकारियों के मुताबिक, शव खराब स्थिति में मिले हैं. ऐसे में पहचान सुनिश्चित करने के लिए उन्हें एम्स ऋषिकेश भेजा गया है, जहां डीएनए सैंपलिंग सहित अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी.

चमोली पुलिस ने सभी छह मृतकों के शव हेलीकॉप्टर से पोस्टमार्टम के लिए एम्स ऋषिकेश भेज दिए हैं. आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे.

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