निठारी सीरियल मर्डर केस के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली का शनिवार को उसके परिवार वालों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कर दिया गया. पुलिस के अनुसार पोस्टमार्टम के बाद उसका शव परिवार को सौंप दिया गया. जिसके बाद खड़खड़ी श्मशान घाट पर उसका अंतिम संस्कार किया गया. एक एजेंसी के मुताबिक श्मशान घाट पर मौजूद लोगों में सुरेंद्र का भाई हरीश कोली, 20 साल का बेटा शिवम और ज़िला पंचायत के पूर्व सदस्य नारायण सिंह रावत शामिल थे. सुरेंद्र शुक्रवार को हरिद्वार में अपनी चाय की दुकान में फंदे से लटका हुआ मिला था.
पहचान छिपाकर हरिद्वार में रह रहा था कोली
पुलिस को शक है कि उसने खुदकुशी की होगी, और वे पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं. अंतिम संस्कार के बाद पत्रकारों से बात करते हुए नारायण सिंह रावत ने निष्पक्ष पुलिस जांच की मांग की. उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि कोली ने खुदकुशी की या यह हत्या का मामला था.
हरिद्वार के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस (DSP) शिशुपाल सिंह नेगी ने बताया कि हरिद्वार आने के बाद सुरेंद्र की गतिविधियों की भी जांच शुरू कर दी गई है. पुलिस को पता चला था कि सुरेंद्र पिछले चार-पांच महीनों से हरिद्वार में अपनी असली पहचान छिपाकर रह रहा था. इस दौरान उसने दो-तीन जगहों पर सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर काम किया, लेकिन पहचान के दस्तावेज़ मांगे जाने पर अपनी असली पहचान उजागर होने के डर से नौकरियां बदलता रहा.
बेटे के बर्थडे को लेकर भी तनाव में था कोली
नेगी ने कहा कि जिन लोगों ने सुरेंद्र को काम पर रखा और चाय की दुकान किराए पर लेने में मदद की, उनसे भी पूछताछ की जा रही है. आरोप है कि सुरेंद्र ने अपनी मौत से सिर्फ़ चार दिन पहले अनिल शर्मा नाम के व्यक्ति से 'सदाराम' के नाम से चाय की दुकान किराए पर ली थी. उसकी मौत के बाद पुलिस की तलाशी में उसका आधार कार्ड और वोटर ID मिला, जिससे उसकी असली पहचान का पता चला.
पुलिस ने दुकान को लेकर शर्मा और सुरेंद्र के बीच किसी भी तरह के विवाद की खबरों का भी खंडन किया है. स्थानीय निवासी धर्मेंद्र कौशिक, जिन्होंने सुरेंद्र को दुकान दिलाने में मदद की थी, ने दावा किया कि 50 वर्षीय आरोपी ने अपनी मौत से एक दिन पहले फ़ोन पर अपने परिवार से बात की थी. उन्होंने आगे कहा कि सुरेंद्र अपने बेटे के जन्मदिन को लेकर तनाव में था और उसने फ़ोन पर अपने परिवार वालों से बहस भी की थी.
2006 में चर्चा में आया था निठारी कांड
निठारी मामला 2006 में तब चर्चा में आया जब उत्तर प्रदेश के नोएडा के सेक्टर-31 में बिज़नेसमैन मोनिंदर सिंह पंढेर के बंगले के पीछे और पास के नाले में कंकाल, खोपड़ियां और हड्डियां मिली थीं. सुरेंद्र ने पंढेर के नोएडा वाले घर पर घरेलू सहायक के तौर पर काम किया था.
सुरेंद्र इस मामले में एकमात्र दोषी था और आख़िरकार 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उसे निठारी से जुड़े मामलों में से आखिरी मामले में बरी कर दिया. यह 13वां मामला था जिसमें उसे बरी किया गया.
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