नैनीताल में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर DM की सर्जिकल स्ट्राइक! 46 स्कूलों ने पैरेंट्स को लौटाए 39 लाख

उत्तराखंड के नैनीताल में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है. 87 स्कूलों की जांच में नियमविरुद्ध फीस वसूली सामने आई. इसके बाद 46 विद्यालयों ने अभिभावकों को 39 लाख 5 हजार 405 रुपये वापस किए. 8 स्कूलों ने ट्यूशन फीस घटाई, 39 ने परीक्षा शुल्क कम किया और 15 ने पंजीकरण शुल्क घटाया या खत्म किया. टीसी शुल्क भी 1 रुपये तय किया गया है.

Advertisement
नैनीताल के DM की सख्ती से सैकड़ों अभिभावकों को राहत मिली है (Photo: ITG) नैनीताल के DM की सख्ती से सैकड़ों अभिभावकों को राहत मिली है (Photo: ITG)

लीला सिंह बिष्ट

  • नैनीताल ,
  • 04 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:51 AM IST

Nainital Private School Fees: उत्तराखंड के नैनीताल जिले में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस वसूली के खिलाफ जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. जांच के दौरान कई स्कूलों में नियमों के विपरीत शुल्क लिए जाने का मामला सामने आया. इसके बाद प्रशासन के निर्देश पर 46  स्कूलों ने अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त रकम वापस करनी शुरू कर दी है. अब तक 39 लाख 5 हजार 405 रुपये अभिभावकों को लौटाए जा चुके हैं. कई स्कूलों ने फीस और अन्य शुल्कों में भी कटौती की है.

Advertisement

नैनीताल में निजी स्कूलों की फीस को लेकर लंबे समय से अभिभावकों की शिकायतें सामने आती रही हैं. कहीं ट्यूशन फीस बढ़ाने, कहीं परीक्षा शुल्क के नाम पर अतिरिक्त रकम लेने तो कहीं ट्रांसफर सर्टिफिकेट यानी टीसी के लिए तय राशि से कई गुना अधिक वसूली की शिकायतें थीं. इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने निजी विद्यालयों की फीस व्यवस्था की जांच के निर्देश दिए. इसके बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने जिले के निजी विद्यालयों की फीस और अलग-अलग मदों में ली जा रही रकम की पड़ताल शुरू की. जांच आगे बढ़ी तो कई स्कूलों में नियमों से अलग शुल्क लिए जाने की बात सामने आई.

87 निजी स्कूलों की जांच, कई जगह सामने आई अनियमितता

प्रशासन की जांच में जिले के 87 निजी विद्यालयों में नियमविरुद्ध शुल्क वसूली के मामले सामने आए. इसके बाद संबंधित स्कूलों को अतिरिक्त अथवा अवैध रूप से वसूली गई रकम अभिभावकों को वापस करने या आगामी शुल्क में उसका समायोजन करने के निर्देश दिए गए. प्रशासन की कार्रवाई का असर अब आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है. 46 निजी विद्यालयों ने कुल 39 लाख 5 हजार 405 रुपये अभिभावकों को वापस किए हैं. यानी जिस रकम को लेकर अभिभावकों को लंबे समय से परेशानी उठानी पड़ रही थी, प्रशासन की जांच के बाद उसी रकम की वापसी शुरू हो गई है. इससे उन परिवारों को राहत मिली है, जिनके लिए स्कूल की फीस के साथ अलग-अलग शुल्क का बोझ लगातार बढ़ रहा था.

Advertisement

ट्यूशन फीस से लेकर परीक्षा शुल्क तक पर कैंची

जांच के बाद केवल अतिरिक्त रकम लौटाने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रही. प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर कई विद्यालयों को अपनी फीस व्यवस्था में बदलाव भी करना पड़ा. 8 निजी विद्यालयों ने नियमविरुद्ध बढ़ाई गई ट्यूशन फीस को कम किया है. वहीं, 39 विद्यालयों ने परीक्षा शुल्क में कटौती की है. इसके अलावा 15 स्कूलों ने पंजीकरण शुल्क को कम किया या पूरी तरह समाप्त कर दिया. 

1 रुपये की जगह टीसी के लिए वसूले जा रहे थे 100 से 1000 रुपये 

निजी स्कूलों में फीस को लेकर सबसे चौंकाने वाली बात ट्रांसफर सर्टिफिकेट यानी टीसी शुल्क से जुड़ी सामने आई. जांच के दौरान पता चला कि कुछ विद्यालय टीसी जारी करने के नाम पर निर्धारित 1 रुपये के बजाय 100 से लेकर 1000 रुपये तक वसूल रहे थे. यानी एक ऐसे दस्तावेज के लिए अभिभावकों से कई गुना रकम ली जा रही थी, जिसके लिए तय शुल्क बेहद कम था. जिलाधिकारी के निर्देश के बाद इस पर भी रोक लगाई गई. अब टीसी शुल्क ₹1 कर दिया गया है. जिन अभिभावकों से इससे अधिक रकम ली गई थी, उनकी अतिरिक्त राशि वापस करने या आगे की फीस में समायोजित करने के निर्देश दिए गए हैं.

Advertisement

तीन साल में अधिकतम 10 प्रतिशत फीस बढ़ोतरी

नैनीताल प्रशासन ने निजी विद्यालयों की फीस बढ़ोतरी को लेकर भी दिशा-निर्देश स्पष्ट कर दिए हैं. निजी विद्यालय तीन वर्षों की अवधि में अधिकतम 10 प्रतिशत तक फीस बढ़ा सकेंगे. इतना ही नहीं, फीस में बढ़ोतरी के लिए अभिभावक-शिक्षक संघ यानी PTA की मंजूरी भी जरूरी होगी. इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि फीस में अचानक या मनमाने तरीके से बढ़ोतरी न हो और अभिभावकों को इसकी जानकारी और प्रक्रिया में भागीदारी मिले. स्कूलों में फीस के नाम पर अलग-अलग मद बनाकर वसूली किए जाने को लेकर भी प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है. शिक्षण और परीक्षा शुल्क के अलावा अन्य शुल्कों को अलग-अलग नामों से वसूलने के बजाय निर्धारित नियमों के अनुसार विकास शुल्क के दायरे में रखा गया है.

परीक्षा शुल्क की भी तय हुई सीमा

प्रशासन ने उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों से लिए जाने वाले परीक्षा शुल्क को लेकर भी अधिकतम सीमा तय की है. इसके तहत उच्च कक्षाओं में परीक्षा शुल्क ₹600 से अधिक नहीं लिया जा सकेगा. इससे अभिभावकों को यह पता रहेगा कि परीक्षा शुल्क के नाम पर स्कूल उनसे अधिकतम कितनी रकम ले सकता है. अगर किसी विद्यालय की ओर से तय सीमा से अधिक रकम मांगी जाती है तो अभिभावक इसकी शिकायत प्रशासन या संबंधित शिक्षा विभाग के अधिकारियों से कर सकते हैं. प्रशासन ने निजी स्कूलों को सिर्फ दिशा-निर्देश ही नहीं दिए हैं, बल्कि नियमों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी है. नियमों की अनदेखी करने वाले विद्यालयों पर RTE एक्ट के तहत 1 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं, CBSE उपविधियों के तहत 5 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है. मामला गंभीर होने पर स्कूल की मान्यता समाप्त करने जैसी कार्रवाई भी हो सकती है. प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि फीस के नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों को केवल चेतावनी देकर नहीं छोड़ा जाएगा.

Advertisement

जिन स्कूलों ने पैसा नहीं लौटाया, उन पर भी नजर

जांच के बाद कई विद्यालयों ने अतिरिक्त रकम वापस कर दी है, लेकिन अभी सभी मामलों का निपटारा नहीं हुआ है. प्रशासन की ओर से उन स्कूलों को अंतिम चेतावनी दी गई है, जिन्होंने अब तक अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस नहीं की है. ऐसे विद्यालयों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की तैयारी है. जरूरत पड़ने पर उनकी मान्यता समाप्त करने की संस्तुति शासन को भेजी जा सकती है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »