किसी मुख्यमंत्री का दौरा हो तो आम तौर पर पहले से कार्यक्रम तय होता है. कहां रुकना है, किससे मिलना है और कहां से गुजरना है, सब कुछ प्लान के मुताबिक चलता है. लेकिन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के गैरसैंण से लौटने के बाद के सफर में कुछ ऐसे पल आए, जिनकी कहानी सड़क से शुरू होकर देवप्रयाग के संगम तक पहुंचती है. विधानसभा सत्र खत्म हुआ. मुख्यमंत्री जीवीके हेलीपैड पहुंचे. यहां से आगे का सफर हवाई रास्ते से भी किया जा सकता था, लेकिन धामी कार में सवार हुए. इसके बाद श्रीनगर से देहरादून तक सड़क मार्ग का जायजा लेने निकल पड़े.
रास्ते में सड़क निर्माण का काम चल रहा था, मजदूर काम में लगे थे और मुख्यमंत्री का काफिला वहां से गुजर रहा था. फिर कुछ ऐसा हुआ कि गाड़ियां रुक गईं. मूल्यगांव के पास सड़क निर्माण कार्य में लगे मजदूर दिखाई दिए तो मुख्यमंत्री ने अपनी कार रुकवाई. वह गाड़ी से उतरे और मजदूरों के पास पहुंच गए. उनसे हालचाल पूछा और बातचीत की. रोज सड़क पर काम करने वाले मजदूरों के लिए यह आम दिन जैसा ही रहा होगा. मशीनें चल रही होंगी, काम आगे बढ़ रहा होगा. तभी अचानक मुख्यमंत्री का काफिला रुकता है और वह सीधे उनके बीच पहुंच जाते हैं और वहां उनसे बात करने लगते हैं.
मुख्यमंत्री का अगला पड़ाव था देवप्रयाग. देवप्रयाग पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया. ढोल-नगाड़े बजे, फूल-मालाएं पहनाई गईं और उनके स्वागत में लोग जुटे. इसके बाद सीएम देवप्रयाग बस अड्डे पर पहुंचे. वहां उन्होंने स्थानीय दुकानदारों और महिलाओं से बातचीत की और उनकी समस्याओं के बारे में पूछा.
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किसी शहर या कस्बे की असली तस्वीर सिर्फ बड़ी सड़कों और खूबसूरत नजारों से नहीं बनती. वहां आने-जाने वाले लोगों को कैसी सुविधाएं मिलती हैं, स्थानीय दुकानदार किन परेशानियों से जूझते हैं और सार्वजनिक जगहों की हालत कैसी है, ये बातें भी उतनी ही अहम हैं. देवप्रयाग में मुख्यमंत्री के सामने ऐसा ही एक मुद्दा आया, जो देखने में छोटा लग सकता है, लेकिन यात्रियों के लिए रोजमर्रा की जरूरत है.
मुख्यमंत्री धामी ने देवप्रयाग बस अड्डे पर बने टॉयलेट की हालत देखी. वहां जायजा लेने के बाद उन्होंने देवप्रयाग के अधिशासी अधिकारी राहुल भंडारी को निर्देश दिए कि टॉयलेट को आधुनिक और हाईटेक बनाया जाए. दरअसल, देवप्रयाग धार्मिक और पर्यटन के लिहाज से अहम जगह है. यहां स्थानीय लोगों के साथ श्रद्धालु और दूसरे यात्री भी पहुंचते हैं. ऐसे में बस अड्डे जैसे सार्वजनिक स्थान पर साफ-सुथरा और ठीक तरह से काम करने वाला शौचालय होना जरूरी है.
लोग अक्सर किसी जगह की पहचान उसके मंदिरों, नदियों और खूबसूरत नजारों से करते हैं. लेकिन वहां पहुंचने के बाद मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं भी उनके अनुभव में शामिल होती हैं. अगर सार्वजनिक शौचालय की हालत ठीक नहीं है, तो इसका असर स्थानीय लोगों से लेकर बाहर से आने वाले यात्रियों तक पर पड़ता है. मुख्यमंत्री ने इसे बेहतर बनाने के निर्देश दिए हैं. दौरे का अगला पड़ाव देवप्रयाग का संगम व्यू प्वाइंट था. यहां अलकनंदा और भागीरथी नदियां मिलती हैं. मुख्यमंत्री ने संगम के दर्शन किए और मां गंगा को नमन किया. उन्होंने उत्तराखंड की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की. देवप्रयाग की पहचान ही इन नदियों के संगम से जुड़ी है. धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों के लिए यह खास है.
पंकज भट्ट