तेलंगाना के एक महिला पॉलिटेक्निक हॉस्टल में करीब 28 छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई. किसी को बुखार आया, किसी ने सिरदर्द की शिकायत की, तो कुछ को उल्टी और बेचैनी महसूस हुई. छात्राओं को शक है कि रात के खाने में चिकन खाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी. लेकिन कॉलेज प्रशासन का कहना है कि मामला वायरल बुखार का भी हो सकता है. यानी छात्राएं खाने पर सवाल उठा रही हैं, जबकि बीमारी की असली वजह अभी साफ नहीं है.
मामला तेलंगाना के परवथागिरी स्थित गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक फॉर विमेन के हॉस्टल का है. कुछ छात्राओं को आधी रात के आसपास बुखार और सिरदर्द महसूस होने लगा. देखते ही देखते करीब 28 छात्राओं के बीमार होने की बात सामने आई. हॉस्टल वार्डन के मुताबिक, उन्हें छात्राओं की तबीयत खराब होने की सूचना मिली. वह सुबह करीब 4 बजे हॉस्टल पहुंचीं. वार्डन ने बताया कि बुखार और सिरदर्द की शिकायत करने वाली करीब 15 छात्राओं को पैरासिटामोल दी गई.
एक छात्रा ने बताया कि रात के खाने में चिकन खाने के बाद उसे आधी रात के करीब बुखार और सिरदर्द महसूस हुआ. रात में उसने कोई दवा नहीं ली. अगली सुबह हॉस्टल स्टाफ ने उसे दवा दी. कॉलेज के प्रिंसिपल रमेश ने बताया कि छात्राओं और उनके अभिभावकों के फोन आए थे. कुछ छात्राएं बुखार होने की बात कहकर घर जाना चाहती थीं. प्रिंसिपल के मुताबिक, हॉस्टल वार्डन को जानकारी देने के बाद उन्हें घर जाने की अनुमति दी गई.
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छात्राओं की तबीयत बिगड़ने के बाद खाने के साथ पीने के पानी को लेकर भी सवाल उठे. प्रिंसिपल रमेश ने कहा कि कॉलेज और हॉस्टल के पानी की TDS मीटर से शुरुआती जांच की गई थी. उनके मुताबिक, मीटर की रीडिंग सामान्य थी. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जानकारी मिली थी कि छात्राओं को वायरल बुखार हुआ है.
हॉस्टल वार्डन ने भी कहा कि सभी छात्राओं ने चिकन खाया था. हालांकि, उनके मुताबिक, कुछ छात्राओं को उल्टी पाचन संबंधी परेशानी के कारण हो सकती है, जबकि कुछ को वायरल बुखार हो सकता है.
डॉक्टर ने क्या बताया?
डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि एक दिन पहले BC वेलफेयर हॉस्टल में मेडिकल कैंप लगाया गया था. इसमें करीब 250 से 270 छात्राओं की जांच की गई. छात्राओं को पर्सनल हाइजीन, एलर्जी और दूसरी समस्याओं को लेकर सलाह दी गई थी. कुछ को दवाएं भी दी गई थीं.
डॉक्टर के मुताबिक, बाद में कुछ छात्राओं को बुखार हुआ. उन्होंने इसकी संभावित वजह वायरल इन्फेक्शन और तेज गर्मी को बताया. करीब 10 से 15 छात्राओं के मलेरिया, टाइफाइड और डेंगू के टेस्ट के साथ हीमोग्लोबिन की जांच भी की जा रही थी. डॉक्टर ने कहा कि कुछ का रिजल्ट नेगेटिव आया है.
तो क्या खाने से ही तबीयत बिगड़ी?
फिलहाल इसका जवाब किसी के पास पक्का नहीं है. छात्राओं को शक है कि चिकन खाने के बाद उनकी तबीयत खराब हुई. कॉलेज प्रशासन और डॉक्टर ने वायरल फीवर सहित दूसरी संभावनाओं का जिक्र किया है. अभी फूड पॉइजनिंग की पुष्टि नहीं हुई है. अब जांच के नतीजे अहम होंगे. जरूरत पड़ने पर खाने और पानी की जांच से भी स्थिति साफ हो सकती है.
अब्दुल बशीर