संविधान पीठ कर सकती है 3 तलाक़ की सुनवाई, केंद्र ने दिए चार सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक मामले में सभी पक्षों को सवाल तैयार कर संक्षेप में अपना पक्ष लिखित में अटॉर्नी जनरल को देने को कहा है. गुरुवार को सुनवाई के दौरान कुछ पक्ष कोर्ट मे विचार के सवाल तैयार कर लाये थे. केंद्र सरकार ने भी चार सवाल ड्राफ़्ट करके कोर्ट को दिए.

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तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला होगा महत्वपूर्ण तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला होगा महत्वपूर्ण

अहमद अजीम

  • नई दिल्ली,
  • 16 फरवरी 2017,
  • अपडेटेड 5:50 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक मामले में सभी पक्षों को सवाल तैयार कर संक्षेप में अपना पक्ष लिखित में अटॉर्नी जनरल को देने को कहा है. गुरुवार को सुनवाई के दौरान कुछ पक्ष कोर्ट में विचार के सवाल तैयार कर लाये थे. केंद्र सरकार ने भी चार सवाल ड्राफ़्ट करके कोर्ट को दिए.

ये प्रश्न अंतिम नहीं हैं और अभी ये दोबारा से सभी पक्षों की राय के बाद फिर तैयार किए जाएंगे. सभी पक्ष सवाल बना कर अटॉर्नी जनरल को देंगे, फिर सबको कम्पाइल करके अटॉर्नी जनरल कोर्ट में देंगे. कोर्ट 30 मार्च को विचार के मुद्दे और सवाल तय करने पर विचार करेगा. मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस बात का संकेत दिया कि इस मामले की सुनवाई 5 जजों की संवैधानिक पीठ करेगी.

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सरकार की ओर से ये चार सवाल दिए गए हैं :
1- धार्मिक स्वतंत्रता के संविधान के अधिकार के तहत क्या तलाके बिद्दत ( एक बार में 3 तलाक़ कहना), हलाला और बहु विवाह की इजाज़त दी जा सकती है?

2- समानता का अधिकार और गरिमा के साथ जीने का अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में प्राथमिकता किसको दी जाए?

3- क्या पर्सनल लॉ को संविधान के अनुछेद 13 के तहत कानून माना जाएगा या नहीं?

4- क्या तलाके बिद्दत, निकाह हलाला और बहु-विवाह उन अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के तहत सही हैं, जिस पर भारत ने भी दस्तखत किये हैं?

गुरुवार को कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता फरहा फैज़ को ताकीद भी की कि कोर्ट में ऊंची आवाज़ में दलील न दें. कोर्ट इसकी इजाज़त नहीं देगा. दरअसल फरहा फैज़ कोर्ट से ये कह रही थीं कि अगर सिर्फ कानूनी पहलुओं के आधार पर ही कोर्ट सुनवाई करेगा, तो इस मामले का भी हाल शाहबानो केस की तरह जाएगा. इस पर मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर ने कहा कि हम कानून से बंधे हैं. जो भी बहस होगी कानून के दायरे में होगी. आप तेज़ आवाज़ में अदालत में बात न करें.

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ख़ास बात ये थी कि फरहा फैज़ हिंदी में बोल रही थी और मुख्य न्यायाधीश ने भी हिंदी में ही उनकी दलीलों का जवाब दिया. सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चूका है की ट्रिपल तलाक़ मामले की विस्तृत सुनवाई 11 मई से होगी.

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