राज्यपाल की चिट्ठी से खुलासा, अरुणाचल में गोहत्या की वजह से लगाया गया राष्ट्रपति शासन

अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल जेपी राजखोवा ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करते हुए कहा था कि राज्य में खुलेआम गोहत्या की घटनाओं की वजह से कानून व्यवस्था चौपट हो गई है.

Advertisement

ब्रजेश मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 28 जनवरी 2016,
  • अपडेटेड 11:19 AM IST

अरुणाचल प्रदेश में लगाए जाने को लेकर एक ओर जहां सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर दो दिन में जवाब तलब किया है तो वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के लिए राज्यपाल ने गोहत्या को वजह बताया है.

राज्यपाल जेपी राजखोवा ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करते हुए कहा था कि राज्य में खुलेआम गोहत्या की घटनाओं की वजह से कानून व्यवस्था चौपट हो गई है.

Advertisement

राज्यपाल ने भेजी थी गौहत्या की तस्वीर
अंग्रेजी अखाबर 'इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक, राज्य में हो जाने के दावे के साथ राज्यपाल ने राजभवन के बाहर खुलेआम गोहत्या की तस्वीर भी लगाई थी ताकि आपात स्थिति को सही तरीके से बयां किया जा सके.

सुप्रीम कोर्ट में हुआ खुलासा
यह खुलासा बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में राज्यपाल के काउंसिल सत्य पाल जैन ने तब किया जब कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्यपाल से राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की वजह स्पष्ट करने को कहा. मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जेएस केहर की अध्यक्षता वाली संवैधानिक बेंच ने कहा कि है इसलिए राज्यपाल की ओर से राष्ट्रपति को इस संबंध में भेजी गई सभी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाएं.

कोर्ट ने भी कहा कि राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन लगाए जाने को लेकर गृह मंत्रालय और राष्ट्रपति को कई रिपोर्ट भेजी हैं, लेकिन इन्हें कांग्रेस पार्टी और इस मामले से जुड़े नेताओं के साथ साझा नहीं किया गया.

Advertisement

राज्यपाल ने राष्ट्रपति को लिखी थी चिट्ठी
राज्यपाल जेपी राजखोवा की ओर से राष्ट्रपति को लिखी गई चिट्ठी के मुताबिक, 'राज्य विधानसभा अध्यक्ष के प्रति अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद राजभवन के सामने कई कांग्रेसी नेताओं ने गौहत्या की थी. बता दें कि उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में पहाड़ी मवेशी मिथुन को गौ जाति के तौर पर भी जाना जाता है.

कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा कि इस मामले को लेकर सरकार कोर्ट के सवालों का शुक्रवार तक जवाब दाखिल करें. कोर्ट ने यह भी कहा कि सभी पक्षों को सुने बिना कोई फैसला नहीं सुनाएगा.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »