पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के नाम को लेकर मचे बवाल के बाद अब कांग्रेस सांसद धर्मवीर गांधी का नाम वोटर लिस्ट में होने को लेकर विवाद सामने आया है. पटियाला से दो बार के सांसद धर्मवीर गांधी के परिवार के सदस्यों के नाम को लेकर भी सवाल उठे हैं. हालांकि, निर्वाचन आयोग की ओर से दावा किया गया है कि सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी और उनके परिवार के सदस्यों की वोट मतदाता सूची से नहीं काटी गई हैं और उनके नाम सूची में दर्ज हैं. इस पर डॉ. धर्मवीर गांधी ने पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
धर्मवीर गांधी ने कहा कि मुद्दा केवल उनकी वोट का नहीं, बल्कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की पूरी प्रक्रिया का है. उन्होंने कहा कि ऐसी प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि आम नागरिक को अनावश्यक परेशानी और सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें. उन्होंने कहा कि वह वर्ष 2000 से उसी मकान में रह रहे हैं और उनका पूरा परिवार भी लंबे समय से वहीं रह रहा है. वह स्वयं तीन बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं और परिवार के सदस्य भी कई बार मतदान कर चुके हैं. इसके बावजूद यदि उनका रिकॉर्ड "मैच" नहीं हो रहा, तो यह गंभीर सवाल खड़ा करता है कि आखिर रिकॉर्ड मिलान की प्रक्रिया किस आधार पर की जा रही है.
डॉ. गांधी ने कहा, 'जब मेरा रिकॉर्ड मैच नहीं हो रहा तो सोचिए उन आम लोगों का क्या होगा, जो किराए के मकान बदलते हैं, पते बदलते हैं और अपने कारोबार या काम के सिलसिले में स्थान बदलते रहते हैं.' उन्होंने आरोप लगाया कि SIR की मौजूदा प्रक्रिया आम जनता के लिए बेहद परेशानी पैदा करने वाली है. उन्होंने कहा कि कई अन्य लोगों ने भी ऐसी ही समस्याएं उनके सामने रखी हैं. उन्होंने राजनयिक नवदीप सूरी और डॉक्टर हरसिंदर कौर का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें भी अपने रिकॉर्ड के मैच न होने की समस्या का सामना करना पड़ा है.
आम आदमी के लिए पुराने दस्तावेज जुटाना मुश्किल
धर्मवीर गांधी ने कहा कि उनके परिवार के एक सदस्य की वोट के रिकॉर्ड को लेकर भी समस्या आई, जिसके लिए परिवार को दशकों पुराने दस्तावेज जुटाने पड़े. उन्होंने बताया कि वर्ष 1974 और 1978 के पुराने रिकॉर्ड तक तलाशकर प्रशासन के सामने पेश किए गए. उन्होंने कहा कि जब उनके जैसे व्यक्ति और परिवार को पुराने दस्तावेज जुटाने में इतनी परेशानी हो सकती है, तो आम आदमी के लिए यह प्रक्रिया कितनी कठिन होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.
सांसद ने कहा कि उनके परिवार के दस्तावेज, पासपोर्ट की प्रतियां, पहचान संबंधी दस्तावेज और अन्य प्रमाण प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किए गए. इसके बावजूद रिकॉर्ड को लेकर समस्याएं बनी रहीं. जब डॉ. धर्मवीर गांधी से पूछा गया कि प्रशासन की तरफ से बताया गया है कि आपकी वोट नहीं काटी गई है और आपका नाम वोटर सूची में दर्ज कर दिया गया है, इस पर डॉ. गांधी ने कहा, "VIP होने के कारण नहीं, हर नागरिक की वोट सुरक्षित होनी चाहिए."
डॉ. गांधी ने कहा कि यदि किसी सांसद या विधायक के मामले में प्रशासन विशेष प्राथमिकता देकर समस्या का समाधान करता है, तो यह पर्याप्त नहीं है. हर नागरिक के वोट के अधिकार की समान रूप से रक्षा होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रशासन को ईमानदारी से यह बताना चाहिए कि उनके परिवार के सभी सदस्यों की वोट वास्तव में रिकॉर्ड के साथ मैप हुई हैं या नहीं.
SIR प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल
डॉ. गांधी ने कहा कि पहले भी SIR के दौरान पंजाब समेत विभिन्न राज्यों में मतदाताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ा है. उन्होंने दावा किया कि उन्हें रोजाना ऐसे लोगों की शिकायतें मिल रही हैं, जिनकी वोटें रिकॉर्ड से मैच नहीं हो पा रही हैं. उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं तो उसकी वोट कटने का खतरा पैदा हो सकता है. ऐसे में प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है.
पहले लोग सरकारें चुनते थे, अब सरकारें अपने लोग चुनने की कोशिश कर रही हैं'
SIR को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए डॉ. धर्मवीर गांधी ने कहा कि यह बेहद गंभीर और खतरनाक स्थिति है. उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया का इस्तेमाल किसी वर्ग विशेष को मतदान के अधिकार से वंचित करने के लिए नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि किसी विशेष वर्ग, जाति या समुदाय के लोगों को मतदाता सूची से बाहर किया जाता है तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा होगा.
डॉ. गांधी ने कहा, पहले लोग सरकारें चुनते थे, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि सरकारें अपने लोग चुनने की कोशिश कर रही हैं कि किसे वोट डालने का अधिकार दिया जाए और किसे नहीं. यह बेहद खतरनाक खेल है. उन्होंने संकेत दिया कि वह इस मुद्दे को आगामी सत्र में भी प्रमुखता से उठाएंगे और SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा आम मतदाता के अधिकारों की सुरक्षा की मांग करेंगे.
असीम बस्सी