मंत्री हरपाल सिंह चीमा से ड्रग्स की शिकायत, बाद में शख्स ने खाया जहर, विपक्ष ने AAP को घेरा

पंजाब के संगरूर में ड्रग्स को लेकर विवाद बढ़ गया है. गुलजार सिंह नाम के शख्स ने मंत्री हरपाल सिंह चीमा से ड्रग्स की शिकायत की थी. उन्होंने गांव में खुलेआम ड्रग्स बिकने की बात कही थी. इसके बाद उन्होंने जहर खा लिया. इस मामले में NHRC ने संज्ञान ले लिया है.

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 पंजाब के वित्त मंत्री और AAP नेता हरपाल सिंह चीमा से शख्स ने शिकायत की थी. (Photo: X/@HarpalCheemaMLA) पंजाब के वित्त मंत्री और AAP नेता हरपाल सिंह चीमा से शख्स ने शिकायत की थी. (Photo: X/@HarpalCheemaMLA)

कमलजीत संधू

  • संगरूर ,
  • 08 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:48 AM IST

पंजाब के संगरूर में ड्रग्स को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. दिरबा विधानसभा क्षेत्र के तुर बंजारा गांव में एक व्यक्ति जहर खाने के बाद मौत हो गई. मृतक की पहचान गुलजार सिंह के रूप में हुई है. इस मामले में NHRC ने संज्ञान लिया है. 

आरोप है कि उन्होंने गांव में खुलेआम नशा बिकने का मुद्दा पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के सामने उठाया था. इसके बाद उन पर माफी मांगने का दबाव बनाया गया. गुलजार सिंह ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया. इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

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जानकारी के मुताबिक, गांव में एक कार्यक्रम के दौरान गुलजार सिंह ने मंत्री हरपाल सिंह चीमा से मुलाकात की थी. उन्होंने बताया था कि उनका बेटा चिट्टा यानी हेरोइन का नशा करता है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि गांव में खुलेआम ड्रग्स बेचा जा रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बाद गांव के सरपंच और पंचों ने गुलजार सिंह पर माफी मांगने का दबाव बनाया.

गुलजार सिंह के भाई बग्गा सिंह ने मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. उनका कहना है कि जिन लोगों ने गुलजार को कथित तौर पर परेशान किया, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.

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जहरीला पदार्थ खाने के बाद गुलजार सिंह को पहले संगरूर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया. वहां से उन्हें पटियाला के राजिंदरा अस्पताल रेफर किया गया. वहां वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें वापस संगरूर लाया गया. इसके बाद उन्हें लुधियाना के डीएमसी अस्पताल भेजा गया. यहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. डॉक्टरों ने रात 11 बजकर 15 मिनट पर उन्हें मृत घोषित किया.

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मामले की जानकारी मिलने के बाद दिरबा के डीएसपी आरके बाजवा अस्पताल पहुंचे. उन्होंने कहा कि पुलिस मौत की परिस्थितियों की जांच कर रही है. जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.

सरपंच पक्ष ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

दूसरी तरफ सरपंच पक्ष ने गुलजार सिंह को धमकाने या दबाव बनाने के आरोपों से इनकार किया है. सरपंच बलजिंदर कौर सिद्धू के पति बलजीत सिंह ने आरोपों को पूरी तरह गलत बताया. उनका कहना है कि मंत्री हरपाल सिंह चीमा गांव में विकास से जुड़े कार्यक्रम के लिए आए थे.

बलजीत सिंह के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान गुलजार सिंह ने भावुक होकर गांव में ड्रग्स का मुद्दा उठाया था. मंत्री और पंचायत ने उन्हें समझाया था. उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि पंचायत नशे के खिलाफ लगातार काम कर रही है. पंचायत उनकी हर संभव मदद के लिए तैयार थी. 

उनका दावा है कि कार्यक्रम के बाद गुलजार सिंह वहां से चले गए. बाद में उनके जहरीला पदार्थ खाने की जानकारी मिली. उनकी तरफ से न तो कोई धमकी दी गई और न ही कोई बहस हुई.

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब संगरूर में कुछ दिन पहले भी ड्रग्स को लेकर विवाद हुआ था. 2 सितंबर को सुनाम विधानसभा क्षेत्र के शेरों गांव में मुख्यमंत्री भगवंत मान के लोक मिलनी कार्यक्रम के दौरान 37 साल के मोहंजीत सिंह ने एक घर की छत पर चढ़कर काला झंडा लहराया था. उन्होंने सरकार से नशे पर सवाल किए थे.

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पुलिस ने मोहंजीत को हिरासत में लिया था. जमानत पर रिहा होने के बाद उसने पुलिस हिरासत में मारपीट का आरोप लगाया था. उसने बाल और दाढ़ी के साथ बदसलूकी और चोट पहुंचाने के भी आरोप लगाए थे. उसे संगरूर के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था. हालांकि, पुलिस का कहना था कि मोहंजीत के खिलाफ पहले से आठ एफआईआर दर्ज हैं और उसका डोप टेस्ट भी पॉजिटिव आया था.

विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

गुलजार सिंह की मौत के बाद पंजाब में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. पंजाब कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार राज्य में फैले ड्रग्स के मुद्दे को छिपाने की कोशिश कर रही है. कांग्रेस ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा पर भी सवाल उठाए.

शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की. उन्होंने दावा किया कि गुलजार सिंह ने अपने आखिरी बयान में मंत्री हरपाल सिंह चीमा को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार बताया था. हालांकि, इस दावे की पुलिस जांच से पुष्टि होना बाकी है. मजीठिया ने मंत्री को कैबिनेट से हटाने की भी मांग की.

पंजाब बीजेपी ने गुलजार सिंह के मामले को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. बीजेपी पंजाब ने कहा कि जिस राज्य में बदलाव के नाम पर वोट मांगे गए थे, वहां आज सच बोलने की सजा मौत बन गई है.

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पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि लोगों की आवाज दबाने से सरकार अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकती. पंजाब सरकार का ड्रग्स के खिलाफ अभियान उसके प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल है. सरकार लगातार नशे के खिलाफ कार्रवाई का दावा करती रही है. वहीं विपक्ष का आरोप है कि सरकार का अभियान नाकाम रहा है.

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