पंजाब: 21 मार्च को मोगा में 'किसान महासम्मेलन' करेगी आम आदमी पार्टी

मीडिया को संबोधित करते हुए AAP नेताओं ने कहा कि आम आदमी पार्टी चाहती है कि काले कृषि कानूनों को तुरंत रद्द किया जाए.

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आम आदमी पार्टी का किसान सम्मेलन (फोटो- पीटीआई) आम आदमी पार्टी का किसान सम्मेलन (फोटो- पीटीआई)

सतेंदर चौहान

  • चंडीगढ़,
  • 22 फरवरी 2021,
  • अपडेटेड 8:21 PM IST
  • 21 मार्च को मोगा जिले में 'किसान महासम्मेलन'
  • किसान आंदोलन के समर्थन में होगा आयोजन

पंजाब में मुख्य विपक्षी दल आम आदमी पार्टी (AAP) किसान आंदोलन के समर्थन में 21 मार्च को मोगा जिले में 'किसान महासम्मेलन' आयोजित करने जा रही है. पार्टी ने सोमवार को कहा कि किसान महासम्मेलन में भाग लेने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आमंत्रित किया जाएगा. AAP नेताओं ने कहा कि किसान महासम्मेलन में पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं और पंजाब के सभी हिस्सों के लोगों को आमंत्रित किया जाएगा. 

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मीडिया को संबोधित करते हुए AAP नेताओं ने कहा कि आम आदमी पार्टी चाहती है कि काले कृषि कानूनों को तुरंत रद्द किया जाए. इस महा सम्मेलन के माध्यम से केन्द्र की मोदी सरकार को संदेश भेजा जाएगा कि वह तुरंत किसानों की बात माने और काले कानूनों को निरस्त करे. 

उन्होंने कहा कि AAP पहली पार्टी है, जिसने काले कृषि कानूनों से संबंधित मुद्दे को उजागर किया और बताया कि इसके परिणाम राज्य के किसानों के लिए हानिकारक होंगे. पार्टी ने पंजाब के गांवों में सार्वजनिक बैठकें कीं ताकि लोगों को काले खेती कानूनों और उसके परिणामों के बारे में बताया जा सके. AAP ने पंजाब की पंचायतों को ग्राम सभा बुलाने और इन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने के लिए प्रेरित किया. आम आदमी पार्टी किसान आंदोलन का समर्थन करने वाली पहली पार्टी है. 

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AAP ने किसानों के पक्ष में लोहड़ी मनाई और केंद्रीय कृषि कानूनों की प्रतियों का विरोध करते हुए जलाया. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी दिल्ली विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया था और केंद्रीय कृषि कानूनों की प्रतियां फाड़कर मोदी सरकार के फैसले का विरोध किया था.

AAP सांसद भगवंत मान और संजय सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी के सामने खेती कानूनों का विरोध किया. इसके अलावा, जब किसान दिल्ली की सीमाओं पर पहुंच गए थे और कड़ाके की ठंड में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, तो दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और AAP कार्यकर्ताओं ने किसान आंदोलन को मजबूत करने और उनके जीवन को आसान बनाने के लिए 'सेवादार' के रूप में दिन-रात काम किया.

अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने संघर्षरत किसानों के लिए शौचालय, गर्म पानी, भोजन और कई अन्य सेवाओं की व्यवस्था की.

उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने अपनी सरकार द्वारा की गई व्यवस्थाओं को देखने के लिए किसानों से दो बार मुलाकात की और इसी विचारधारा को जारी रखते हुए आम आदमी पार्टी मार्च में किसानों के समर्थन में किसान महासभा बुलाएगी. 

पंजाब में पारंपरिक दलों पर निशाना साधते हुए AAP नेताओं ने कहा कि कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा तीनों ने राज्य के किसानों के साथ विश्वासघात किया है. तीनों ने पहले साथ मिलकर काले खेती कानूनों को पारित किया और अब यह बताने के लिए मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं कि वे किसान समर्थक हैं. 

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उन्होंने कहा कि ये पार्टियां कभी भी किसान हितैषी नहीं रही हैं. 2013 में यूपीए सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट 2013 पारित किया था, जिसने सरकार और निजी खिलाड़ियों को पंजाब के किसानों को बंधुआ मजदूर बनाने का कानून बनाया था. बाद में 2017 में, कैप्टन अमरिंदर सरकार ने एपीएमसी संशोधन अधिनियम पारित किया, जिसमें फलों और सब्जियों की खरीद का निजीकरण किया गया था, जिसके प्रभाव अभी भी देखे जा रहे हैं. 

उन्होंने कहा कि बहुत लंबे समय से अकाली दल कृषि बिल के समर्थन में था. सुखबीर बादल और उनकी पत्नी हरसिमरत कौर बादल दोनों के पास इन बिलों को रोकने की शक्ति थी, जब वे भाजपा के साथ गठबंधन में थे, लेकिन उन्होंने कुछ भी नहीं किया. इसी तरह कैप्टन अमरिंदर हाई पावर कमेटी का हिस्सा थे, जिसने इन कानूनों का मसौदा तैयार किया. लेकिन उन्होंने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई.

उन्होंने कहा कि जब किसान इस कानून के विरोध में दिल्ली की ओर बढ़ रहे थे तो इनमें से किसी भी दल ने किसानों की मदद नहीं की. किसानों पर पानी के फव्वारे छोड़े गए, लाठियां बरसाई गईं. उनपर मानहानि के मुकदमे दायर किए गए लेकिन इन दलों के नेताओं ने एक शब्द भी नहीं कहा. 

उन्होंने कहा कि अब सभी दल किसान आंदोलन को पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं. मोदी सरकार और कैप्टन अमरिंदर सिंह पर कटाक्ष करते हुए AAP नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार ने 26 जनवरी की रैली को हिंसक प्रदर्शन में बदलकर किसानों को बदनाम करने की कोशिश की. लेकिन कैप्टन अमरिंदर ने इसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया. 26 जनवरी के बाद जब राज्य के कई युवा लापता हो गए तो कैप्टन अमरिंदर ने उन्हें वापस लाने या उनकी स्थिति जानने के लिए कोई प्रयास नहीं किया. 

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उन्होंने कहा कि अब वे आंदोलन को खत्म करवाने के लिए किसान यूनियनों से अपील कर रहे हैं कि वे केंद्र सरकार के प्रस्तावों को स्वीकार करें. यह बिल्कुल शर्मनाक है. AAP नेताओं ने कहा कि रैली की तैयारी शुरू हो चुकी है और मार्च में पंजाब में एक नई जागृति दिखाई देगी. रैली के माध्यम से इन दलों के पाखंड का पर्दाफाश होगा. 

उन्होंने कहा कि किसान विरोधी पार्टियां किसान आंदोलन को पटरी से उतारने की नापाक कोशिश को कभी भी सफल नहीं होने देगी. 'AAP' किसानों के आंदोलन को मजबूत बनाएगी. ये पारंपरिक दल चाहे जितनी भी कोशिश कर लें, किसान आंदोलन को कुचल नहीं सकते.

पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित अन्य जगहों के हजारों किसान तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी की मांग को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर करीब तीन माह से डटे हुए हैं. पार्टी सांसद भगवंत मान ने कहा, 'AAP ने किसानों के आंदोलन को और मजबूती देने के लिए मोगा जिले के बाघा पुराना में 21मार्च को किसान महासम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया है.' 

उन्होंने कहा कि पूरे पंजाब के किसानों को इसमें भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाएगा. मान ने कहा, 'हम चाहते हैं कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इसमें शामिल हों.' 

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पार्टी हमेशा ही किसान आंदोलन का समर्थन करने की बात कहती रही है. केजरीवाल का उत्तर प्रदेश के मेरठ में 28 फरवरी को 'किसान महापंचायत' को संबोधित करने का कार्यक्रम है. मान के साथ इस दौरान AAP की पंजाब इकाई के प्रभारी जरनैल सिंह, सह प्रभारी राघव चड्ढा और विधायक हरपाल सिंह चीमा भी मौजूद थे. मान ने कहा कि केन्द्र को तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेना चाहिए और एमएसपी पर कानूनी गारंटी देनी चाहिए. 

 

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