सरकार नहीं अब संगठन... स्मृति ईरानी का सियासी कमबैक! बंगाल का प्रयोग सफल रहा अब यूपी की बारी

2024 लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद स्मृति ईरानी मोदी सरकार से बाहर हो गई थीं. अब करीब 26 महीने बाद बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी के साथ उनकी संगठन में वापसी हुई है. बंगाल चुनाव के दौरान उनकी सक्रियता और आक्रामक कैंपेनिंग के बाद संगठन में मिली नई भूमिका कई सियासी संकेत दे रही है.

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स्मृति ईरानी नितिन नवीन की नई टीम में राष्ट्रीय महामंत्री बनी हैं (Photo: PTI) स्मृति ईरानी नितिन नवीन की नई टीम में राष्ट्रीय महामंत्री बनी हैं (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:22 PM IST

कभी मोदी सरकार की सबसे चर्चित मंत्रियों में शुमार रहीं स्मृति ईरानी करीब 26 महीने बाद बीजेपी के संगठन में बड़े रोल के साथ लौट आई हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी की हार के बाद वह सत्ता की तस्वीर से भले ही बाहर हो गई थीं, लेकिन राजनीति से उनका ब्रेक पूरी तरह नहीं हुआ. "जायंट किलर" की छवि वाले इस नेता को पार्टी ने सरकार से नहीं संगठन से जोड़कर फिर से मैदान में उतारा है. 

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याद रहे कि स्मृति ईरान ने 2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सबसे मजबूत दुर्ग अमेठी में पार्टी के सबसे ताकतवर नेता राहुल गांधी को 55 हजार वोटों से शिकस्त दी थी. 2024 में स्मृति अपनी धमक कायम नहीं रह सकीं और उन्हें राहुल के हाथों ही पराजय का मुंह देखना पड़ा. 2024 लोकसभा चुनाव के समय वह मोदी सरकार में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री थीं.

लेकिन स्मृति ईरानी कभी नेपथ्य में नहीं रहीं. 2024 के बाद वे एक बार फिर से सीरियल की दुनिया में लौट आईं. वही दुनिया जहां से स्मृति 'तुलसी विरानी' बनकर इंडियन मिडिल क्लास के घर घर में पहुंच गई थीं. 

'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' टीवी सीरियल से घर-घर पहचान बनाने के बाद स्मृति ईरानी 2003 में भाजपाई पटका पहनकर सक्रिय राजनीति में कदम रखी थीं. 

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स्मृति ईरानी ने स्मॉल स्क्रीन के सोप ओपेरा 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में फिर से एंट्री की और अपने पुराने काम में व्यस्त हो गई थीं. 

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अब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है. यानी स्मृति ईरानी की वापसी सरकार के रास्ते नहीं, संगठन के रास्ते हुई है. बीजेपी के आठ राष्ट्रीय महामंत्रियों की सूची में वे एक मात्र महिला हैं. 

बांग्ला प्रयोग सफल रहा अब पंजाब-यूपी की बारी

स्मृति की वापसी को सिर्फ संगठनात्मक फेरबदल मानना मुश्किल है. बंगाल चुनाव में उन्होंने धुआंधार प्रचार किया और TMC द्वारा बीजेपी के खिलाफ चलाए जा रहे 'बाहरी' के नैरेटिव को काफी हदतक तोड़ने में सफल रहीं. 

अलग अलग भाषाओं में संवाद स्मृति की बड़ी पूंजी है. उन्हें हिंदी, अंग्रेजी, बांग्ला, पंजाबी जैसी भाषाओं पर कमांड है. बंगाल चुनाव के दौरान स्मृति ने  महिला सुरक्षा, आरजी कर कांड और तृणमूल कांग्रेस सरकार पर बांग्लाभाषा में हमला कर स्थानीय लोगों से कनेक्ट कर पाने में कामयाब रहीं. 

बीजेपी ने स्मृति ईरानी के 'बांग्ला अवतार' को सांस्कृतिक-राजनीतिक प्रयोग के तौर पर लिया और सफल रही. 

स्मृति की दक्षता पंजाबी में भी है. दरअसल उनके पिता अजय कुमार मल्होत्रा पंजाब से हैं. स्मृति पंजाबी में भी सहज संवाद करने में दक्ष है. बीजेपी को इस समय पंजाब में शिद्दत से ऐसे राष्ट्रीय चेहरे की तलाश है जिसके जरिये बीजेपी पंजाबी मतदाताओं तक पहुंच सके. स्मृति इस कसौटी में फिट बैठती हैं. 

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स्मृति की बीजेपी संगठन में आने की राजनीतिक टाइमिंग जरूर दिलचस्प है. नितिन नवीन की नई टीम में बीजेपी ने अनुभवी चेहरों के साथ चुनावी राजनीति में प्रभाव रखने वाले नेताओं को जगह दी है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नई टीम को संगठनात्मक अनुभव, ऊर्जा और जमीनी जुड़ाव का मिश्रण बताया है. 

स्मृति ईरानी के लिए यह सिर्फ पद की वापसी नहीं, बल्कि राजनीतिक पुनर्स्थापना का मौका है. अमेठी की हार के बाद जिस नेता को सक्रिय राजनीति में हाशिए पर जाने की अटकलों से जोड़ा जा रहा था, वही अब बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन में अहम जिम्मेदारी संभालेंगी. 

इस बीच कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ये चुनाव नितिन नवीन की नई टीम की और स्मृति ईरानी की भी परीक्षा है. 

2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को यूपी में बड़ा झटका लगा था. बीजेपी 80 में से 33 सीटों पर सिमट गई, जबकि INDIA ब्लॉक ने 43 सीटें जीतकर पार्टी को तगड़ी चोट दी. इतनी तगड़ी की बीजेपी अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं कर सकी. 

अब यूपी में एक बार फिर से चुनाव है और बीजेपी के सामने 24 के नुकसान की भरपाई का मौका है. बीजेपी इस मौके के लिए अपना हर राजनीतिक हथियार इस्तेमाल करने से नहीं रुकेगी. स्मृति ईरानी की नई भूमिका इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है.

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स्मृति ईरानी ने जताया आभार

वहीं स्मृति ईरानी ने अपने इस चुनाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष का आभार जताया है. 

उन्होंने एक्स पर लिखा है कि, 'विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल ने मुझ जैसे साधारण कार्यकर्ता का सृजन किया तथा उस संगठन में योगदान देने हेतु राष्ट्रीय महामंत्री का असाधारण दायित्व दिया जाना कार्यकर्ता-आधारित व्यवस्था का सम्मान है. देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन तथा माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जी के नेतृत्व में संगठन की सेवा एवं योगदान देने का यह अवसर मेरे लिए निष्ठा एवं समर्पण का विषय है.'

स्मृति ईरानी ने लिखा है कि राष्ट्र प्रथम की भावना को साकार करने तथा माम भारती के गौरवगान हेतु संकल्पित भाजपा की नवगठित टीम विकसित भारत के संकल्प को साकार करने हेतु आधारशिला के रूप में कार्य करने हेतु प्रतिबद्ध है. 
 

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