दिल्ली की सड़कों पर छात्र आंदोलन की शुरुआत एकजुटता के संदेश के साथ हुई थी, लेकिन महज 24 घंटे में यह आपसी टकराव और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का अखाड़ा बन गया.यहां हितों का टकराव देखने को मिला. आंदोलनकारियों के बीच दरारें दिखने लगीं. नौबत यहां तक आई कि कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता विजेता दहिया को पार्टी से ही निकाल दिया गया.
अब विपक्षी दलों में भी यही सिलसिला दोहराया जा रहा है. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच समन्वय की कमी खुलकर सामने आ गई है. अखिलेश ने तो सदन में यहां तक कहा कि कांग्रेस और सरकार के बीच डील हो गई है. अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि कांग्रेस के शीर्ष नेता अन्य विपक्षी दलों को बिना बताए और उन्हें बिना भरोसे में लिए कल पीएम आवास के बाहर धरने पर क्यों चले गए?
दरअसल मंगलवार को कांग्रेस ने NEET के मामले में अपना अलग मोर्चा खोल लिया. खडगे के बर्थ डे के बहाने जमा हुए कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने पीएम आवास की ओर कूच कर दिया और 7 LKM के बाहर धरने पर बैठ गए. कांग्रेस शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही थी. अखिलेश यादव फौरन पीएम आवास के पास पहुंचे और कांग्रेस नेताओं के प्रति समर्थन दिया.
सपा-कांग्रेस के बीच क्रैक
लेकिन 24 घंटे के अंदर ही दोनों दलों के बीच तालमेल की कमी उजागर हो गई. बुधवार को अखिलेश यादव के रूख से साफ पता चला कि वे कांग्रेस के रुख से सहज नहीं थे.
बुधवार दोपहर 12 बजे जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई तब हंगामा हो रहा था. अखिलेश यादव समेत सपा के सांसद भी अपनी आवाज उठा रहे थे और अपनी बात रखना चाहते थे. अखिलेश यादव अपनी बात कहना चाह रहे थे लेकिन स्पीकर ने कांग्रेस के के सी वेणुगोपाल को बोलने के लिए कहा. उनके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू बोलने लगे.
अखिलेश को ये बात नागवार गुजरी. अखिलेश यादव हेडफोन उतार कर नाराज होकर अपने सांसदों के साथ वापस जाने के लिए मुड़ने लगे. यह देख कर स्पीकर ने टोका और कहा कि अखिलेश जी आपने भी बोलने के लिए कहा था. आप भी बोलिए. इस पर अखिलेश यादव ने तंज करते हुए कहा कि क्या बोलें? आपने दोनों (सरकार और कांग्रेस) को बोलने का मौका दिया. क्या समझौता हो गया है? उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों पर जो बर्बरता हुई उसके लिए कार्रवाई होनी चाहिए. बेटियों के कपड़े फाड़े जा रहे हैं. इस पर जब केसी वेणुगोपाल ने टोका तो, अखिलेश ने कहा कि इस्तीफ़े का क्या है? जब चाहें तब ले लेंगे. सदन के बाहर से लेंगे.
सूत्रों के अनुसार सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद भी वेणुगोपाल और अखिलेश यादव के बीच बातचीत होती रही. वेणुगोपाल ने अखिलेश से पूछा कि इस्तीफ़े की मांग पर जोर क्यों नहीं दिया? उन्होंने आगे कहा कि यह तो छात्रों की मांग है जो हम यहां उठा रहे हैं.
अखिलेश ने यह भी शिकायत की कि कांग्रेस के शीर्ष नेता अन्य विपक्षी दलों को बिना बताए और बिना उन्हें भरोसे में लिए कल पीएम आवास के बाहर धरने पर क्यों चले गए? जबकि पीएम आवास के बाहर भीड़ लेकर वही पहुचे थे.
दरअसल अखिलेश छात्रों पर लाठीचार्ज के मामले में चर्चा पहले चाह रहे थे, जबकि मल्लिकार्जुन खड़गे पहले धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रही थी और इसके बाद चर्चा की बात कह रही थी.
बता दें कि समाजवादी पार्टी लगातार जंतर मंतर पर सीजेपी के प्रोटेस्ट को समर्थन दे रही है, जबकि कांग्रेस ने जंतर मंतर से दूरी बना रखी है.
किसको दोषी ठहराऊं, अपने साथी को या सरकार को
हालांकि बाद में अखिलेश यादव ने इस मामले पर सफाई दी. आजतक से बातचीत में उन्होंने कहा कि अपनी बात कहने के लिए गुस्सा होना चाहिए.
कांग्रेस द्वारा पहले धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगने पर अखिलेश ने कहा कि अभी पुलिस की जो बर्बरता है वो मुद्दा है, जो पुलिस, प्रशासन का छात्रों के साथ, राहुल जी के साथ और मेरे साथ था, वो मुद्दा भी सदन में आना चाहिए. इस्तीफा के लिए तो पहले दिन से रुके हुए हैं. सदन में बोलने का मौका न मिलने पर अखिलेश ने कहा कि कभी कभी फ्लोर कॉर्डिनेशन में ऐसा हो जाता है. हम लोग बातचीत से रास्ता निकालेंगे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं से बहस से भी इनकार किया. जो कमी होगी उसे पूरा किया जाएगा. उन्होंने डील शब्द को स्पष्ट करते हुए कहा कि अगर मैं नहीं बोल पाऊं तो क्या मानूं? मैं किसको दोषी ठहराऊं, अपने साथी को या सरकार को.
AAP-कांग्रेस के बीच भी टकराव
मंगलवार को आम आदमी पार्टी ने भी कांग्रेस और सरकार के बीच डील होने का आरोप लगाया था. पार्टी नेता संजय सिंह ने कहा था कि देश के करोड़ों युवाओं के लिए सोनम वांगचुक पिछले 23 दिनों से आमरण अनशन पर हैं. जंतर मंतर पर देश का युवा आंदोलन कर रहा है. 20 जुलाई को युवाओं को बर्बरता पूर्वक पीटा गया. कांग्रेस एक महीने से आंदोलन को गाली दे रही है, अब राहुल गांधी कह रहे है “जंतर मंतर नहीं हमारे धरने में शामिल हो” आखिर युवाओं के आंदोलन को क्यों कमजोर करना चाहती है कांग्रेस? जंतर मंतर के आंदोलन में शामिल होने की अपील क्यों नहीं करती कांग्रेस?
उन्होंने कहा कि CJP के धरने को कमजोर करने के लिए PM मोदी ने को अपने आवास पर धरने पर बिठा दिया.
CJP में भी दरार
इस बीच मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी में भी टूट हुई. कॉकरोच जनता पार्टी ने 21 जुलाई 2026 को अपने प्रवक्ता विजेता दाहिया को सभी आधिकारिक पदों और जिम्मेदारियों से हटा दिया. इसका कारण एक वायरल वीडियो था. जिसमें प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और 'चलो संसद' मार्च के समय उन्हें बर्गर खाते हुए दिखाया गया.
CJP ने इसे बहुत असंवेदनशील बताया. जब उनके साथी प्रदर्शनकारी पुलिस लाठीचार्ज, पथराव और हिरासत का सामना कर रहे थे, तब दाहिया मार्च से गायब थे और बर्गर खाते हुए वीडियो बना रहे थे. CJP ने आधिकारिक रूप से कहा कि दाहिया का यह आचरण पार्टी के सिद्धांतों और मूल्यों से मेल नहीं खाता. इसलिए उन्हें तुरंत प्रवक्ता पद से हटाया गया और सभी आधिकारिक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया.
हिमांशु मिश्रा / मौसमी सिंह