एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष की रैली, तो दूसरी ओर SIR के मुद्दे पर विपक्ष के नैरेटिव को चुनौती देने के लिए BJP का देशव्यापी अभियान ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’. चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर छिड़ी सियासी जंग अब सड़कों पर उतर चुकी है.
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी टकराव लगातार तेज होता जा रहा है. एक तरफ विपक्ष दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को बड़ी रैली कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाने की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के आरोपों और SIR को लेकर बनाए जा रहे नैरेटिव का जवाब देने के लिए देशव्यापी अभियान तेज कर दिया है.
BJP ने अपने इस अभियान को ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ नाम दिया है. 23 अक्टूबर से शुरू हुए इस कार्यक्रम के तहत पार्टी पहले विभिन्न सम्मेलनों में कार्यकर्ताओं को लोकतंत्र की रक्षा की शपथ दिला चुकी है. अब पार्टी के वरिष्ठ नेता, केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री सीधे मैदान में उतरकर पदयात्राओं, जनसभाओं और संवाद कार्यक्रमों के जरिए विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की तैयारी में हैं.
रामलीला मैदान बनाम BJP की पदयात्रा
एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्ष की रैली को SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के मुद्दे पर शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है. विपक्ष जहां चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा, वहीं BJP इस अभियान के जरिए विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भ्रम फैलाने और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति जनता का भरोसा कमजोर करने का आरोप लगा रही है.
BJP की रणनीति केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है. पार्टी देश के अलग-अलग राज्यों में पदयात्राओं, प्रेस कॉन्फ्रेंस, बुद्धिजीवी सम्मेलनों और युवाओं के साथ संवाद के जरिए SIR के मुद्दे पर अपनी बात रखने जा रही है.
जेपी नड्डा से योगी आदित्यनाथ तक, मैदान में उतरेंगे BJP के दिग्गज
BJP के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा अहमदाबाद में शाम 4:30 बजे पदयात्रा में शामिल होंगे. इस दौरान वह लोगों को संबोधित कर पार्टी के अभियान का संदेश भी देंगे.
वहीं, एक नवंबर को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ कार्यक्रम को संबोधित करेंगे. इसी दिन हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पदयात्रा के जरिए SIR को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देंगे.
इसके बाद दो नवंबर को, विपक्ष की रामलीला मैदान रैली के ठीक अगले दिन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में पदयात्रा निकालेंगे और कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे.
BJP की इस रणनीति को विपक्ष शासित राज्यों में राजनीतिक संदेश देने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है. पार्टी का जोर इस बात पर है कि SIR को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब उन्हीं राज्यों में दिया जाए, जहां गैर-BJP सरकारें सत्ता में हैं.
विपक्ष शासित राज्यों पर खास नजर
BJP के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन विपक्ष शासित राज्यों में विशेष कार्यक्रमों की तैयारी की गई है. इसी रणनीति के तहत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में पदयात्रा करेंगे, जबकि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा हिमाचल प्रदेश में कार्यक्रम के जरिए पार्टी का पक्ष रखेंगे.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, तमिलनाडु और केरल जैसे विपक्ष शासित राज्यों में भी बड़े कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है. BJP इन कार्यक्रमों के जरिए यह सवाल उठाना चाहती है कि जिन राज्यों में विपक्षी दल सत्ता में हैं, वहां भी चुनाव उसी निर्वाचन व्यवस्था के तहत हुए हैं, जिसकी निष्पक्षता पर अब विपक्ष सवाल उठा रहा है.
BJP का तर्क है कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने से पहले विपक्ष को अपने आरोपों के समर्थन में ठोस तथ्य सामने रखने चाहिए. पार्टी इन कार्यक्रमों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए.
संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सियासी जंग
BJP नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल लंबे समय से विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर उनकी विश्वसनीयता को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. पार्टी का मानना है कि इस तरह के आरोपों से लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता के भरोसे पर असर पड़ सकता है.
इसी तर्क के आधार पर BJP ने अपने अभियान को ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ नाम दिया है. पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध और सवाल उठाने का अधिकार सभी को है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर लगाए जाने वाले आरोप तथ्यों पर आधारित होने चाहिए.
BJP, राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं की ओर से SIR के खिलाफ किए गए विरोध-प्रदर्शनों को राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बता रही है. पार्टी का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और चुनाव आयोग के खिलाफ लगातार हमले लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले हैं. हालांकि, विपक्ष चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अपनी आपत्तियां उठाता रहा है.
पदयात्रा, प्रेस कॉन्फ्रेंस और जनसंवाद से जवाब देने की तैयारी
‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत BJP शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. इनमें प्रेस कॉन्फ्रेंस, बुद्धिजीवी सम्मेलन, पदयात्राएं, युवाओं के साथ संवाद और SIR से जुड़ी जानकारी साझा करने वाले कार्यक्रम शामिल होंगे.
पार्टी की कोशिश है कि SIR को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों का जवाब केवल राजनीतिक बयानों के जरिए नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर जनसंपर्क के माध्यम से भी दिया जाए. BJP कार्यकर्ताओं को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया और उससे जुड़े तथ्यों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी दी जा रही है.
कुल मिलाकर, एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्ष की रैली और विभिन्न राज्यों में BJP के कार्यक्रमों के बीच SIR को लेकर सियासी मुकाबला और तेज होने के आसार हैं. विपक्ष जहां चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाकर सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं BJP ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के जरिए विपक्ष के आरोपों को चुनौती देने और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति भरोसे का मुद्दा उठाने की कोशिश कर रही है.
अब देखना होगा कि रामलीला मैदान से विपक्ष की हुंकार सियासी दबाव बनाने में कितनी सफल होती है और BJP की पदयात्राएं SIR को लेकर उसके पक्ष में जनमत तैयार करने में कितना असर दिखाती हैं.
पीयूष मिश्रा