शुभेंदु से सम्राट तक... बीजेपी के 'आउटसोर्स सीएम', जो दूसरे दलों से आए और छाए

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम आ चुके हैं, जिसमें बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में इतिहास रचते हुए शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाया है. शुभेंदु अधिकारी पहले तृणमूल कांग्रेस के नेता थे, जिन्होंने बीजेपी में शामिल होकर सफलता हासिल की.

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बीजेपी ने 'बाहर' से आए शुभेंदु अधिकारी, सम्राट चौधरी, हिमंता बिस्व सरमा पर भरोसा जताकर उन्हें सीएम बनाया है बीजेपी ने 'बाहर' से आए शुभेंदु अधिकारी, सम्राट चौधरी, हिमंता बिस्व सरमा पर भरोसा जताकर उन्हें सीएम बनाया है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:07 PM IST

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम आ चुके हैं. धीरे-धीरे इन राज्यों में नई सरकार भी बन रही है. बीजेपी ने इस बार पश्चिम बंगाल में इतिहास रच दिया है. शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल सरकार के सीएम बन गए हैं. शनिवार को जब उनका शपथ ग्रहण हुआ तब अपने आप निगाहें एक बड़े फैक्ट पर चली जाती हैं.

असल में शुभेंदु अधिकारी के सिर पर बीजेपी की जीत का सेहरा तो बंधा ही है, साथ ही वह पश्चिम बंगाल में बीजेपी के ऐसे बड़े चेहरे बनकर सामने आये हैं, जो दूसरी पार्टी में थे और फिर बीजेपी में आए. बीजेपी में शामिल होकर उन्होंने सफलता की सीढ़ियां चढ़ीं और सीएम पद तक पर काबिज हुए. शुभेंदु अधिकारी इस पैटर्न के ताजा-तरीन उदाहरण हैं और गौर से देखें तो बीजेपी के पास ऐसे सफल प्रयोग की अच्छी खासी फेहरिस्त है. 

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राजनीति में दल-बदल कोई नई बात नहीं है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने कई ऐसे नेताओं को अपने साथ जोड़ा, जो कभी दूसरी पार्टियों में बड़े चेहरे हुआ करते थे. इस लिस्ट में हाल के वर्षों में हिमंता बिस्वा सरमा, सम्राट चौधरी, पेमा खांडू, सर्वानंद सोनोवाल और एन बीरेन सिंह जैसे नाम देखने को मिलते हैं. अब इसी पैटर्न को देखते हुए इतिहास में जाएं तो सामने आता है कि बीजेपी ने दूसरे दलों से आने वाले कई नेताओं को सीएम बनाया है. इनमें झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई भी शामिल हैं. 

शुभेंदु अधिकारी: ममता के करीबी से सबसे बड़े विरोधी तक 
पश्चिम बंगाल की राजनीति में शुभेंदु अधिकारी कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे. हालांकि उनकी शुरुआती राजनीति कांग्रेस से शुरू हुई थी, लेकिन 1998 में वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे. नंदीग्राम आंदोलन के दौरान वे ममता बनर्जी के सबसे अहम सहयोगियों में थे और 2011 में वाममोर्चा सरकार को हटाने में उनकी बड़ी भूमिका मानी गई. साल 2020 में उनका तृणमूल नेतृत्व से टकराव बढ़ा. उन्होंने पहले मंत्री पद छोड़ा, फिर विधायक पद से इस्तीफा दिया और 19 दिसंबर 2020 को अमित शाह की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल हो गए.

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2021 में उन्होंने नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को हराकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं. फिर हाल के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट से शिकस्त दी है.

हिमंता बिस्व सरमा: कांग्रेस के कद्दावर से बने बीजेपी के बड़े सूरमा 
इस मामले में सबसे बड़ा नाम असम के सीएम रहे हिमंता बिस्व सरमा का लिया जा सकता है. एक दौर था कि हिमंता कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे. वे साल 2001 से लगातार कांग्रेस विधायक रहे और सीएम रहे तरुण गोगोई सरकार में शिक्षा, स्वास्थ्य और वित्त जैसे अहम मंत्रालय भी संभाल चुके थे, लेकिन साल 2014 आते-आते कांग्रेस से उनकी दूरियां बढ़ने लगीं.

आखिरकार अगस्त 2015 को उन्होंने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन कर ली. बीजेपी में आने के बाद उन्होंने पूर्वोत्तर में पार्टी के विस्तार में बड़ी भूमिका निभाई. 2016 में असम में पहली बार बीजेपी की सरकार बनी और सरबानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने, जबकि हिमंता सरकार के सबसे प्रभावशाली मंत्री रहे. फिर मई 2021 में बीजेपी ने उन्हें असम का मुख्यमंत्री बनाया. 

सम्राट चौधरी: आरजेडी फिर जेडीयू से बीजेपी तक पहुंचे
बिहार के नए-नए सीएम बने सम्राट चौधरी का भी नाम इसमें शामिल है. उन्होंने बीते महीने 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. सम्राट चौधरी पहली बार राजद से विधायक बने थे. बाद में उन्होंने जेडीयू का दामन थामा और नीतीश कुमार सरकार में मंत्री भी रहे, लेकिन 2018 के आसपास उनका झुकाव बीजेपी की तरफ बढ़ा और उन्होंने भारतीय जनता पार्टी जॉइन कर ली. बीजेपी ने उन्हें बिहार में ओबीसी और कुशवाहा राजनीति के बड़े चेहरे के रूप में आगे बढ़ाया. इसके बाद वे बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने और फिर डिप्टी सीएम. अब बिहार सीएम बन चुके हैं.

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पेमा खांडू: कांग्रेस से आए और बीजेपी में छाए
अरुणाचल प्रदेश के सीएम पेमा खांडू भी कभी कांग्रेस में थे. 2016 में वे कांग्रेस विधायक दल के नेता बने और मुख्यमंत्री बने. लेकिन उसी साल अरुणाचल की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ. पहले वे पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) में गए और बाद में अपने समर्थक विधायकों के साथ बीजेपी में शामिल हो गए. इसके बाद बीजेपी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाए रखा और वे लगातार राज्य की राजनीति में पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा बने हुए हैं.

सरबानंद सोनोवाल: असम में बने बीजेपी के बड़े चेहरे
साल 2016 में पहली बार बीजेपी ने असम में सरकार बनाई. पार्टी ने सर्बानंद सोनोवाल को मुख्यमंत्री बनाया. सोनोवाल साल 2011 में बीजेपी में शामिल हुए थे. उनकी राजनीतिक शुरुआत ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) से हुई थी. वहीं बाद में उन्होंने असम गण परिषद में भी काम किया.

एन बीरेन सिंह:  कांग्रेस से बगावत, बीजेपी में स्वागत

मणिपुर के पूर्व सीएम एन बीरेन सिंह साल 2017 में बीजेपी में शामिल हुए थे. वे भी कांग्रेस में बगावत करके बीजेपी में आए थे. इससे पहले वो डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पीपल्स पार्टी में भी रह चुके थे. 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पहली बार मणिपुर में सरकार बनाई और एन बीरेन सिंह मुख्यमंत्री बने. इसके बाद उन्होंने राज्य में बीजेपी संगठन को मजबूत किया.

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बसवराज बोम्मई - बीजेपी ने बनाया कर्नाटक में सीएम 
बसवराज बोम्मई साल 2008 में बीजेपी में शामिल हुए थे. इसे पहले वह जनता दल में थे. उनके पिता एसआर बोम्मई भी सीएम रहे थे, जिनका मामला तमिलनाडु के राजनीतिक संकट में चर्चा का विषय बना हुआ है. बसवराज बोम्मई जुलाई 2021 से मई 2023 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे. 

अर्जुन मुंडा : जेएमएम से बीजेपी में आए
अर्जुन मुंडा साल 2003 से 2006 तक बीजेपी के मुख्यमंत्री रहे. उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) से की थी. साल 1995 में संयुक्त बिहार में वे पहली बार विधायक बने थे. साल 2000 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वे बीजेपी में शामिल हुए थे. साल 2000 में ही झारखंड बिहार से अलग हुआ.

गेगोंग अपांग- 42 दिन तक एनडीए सरकार के सीएम 
गेगोंग अपांग लगभग 22 साल तक अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे है. पहली बार वे साल 1980 में कांग्रेस पार्टी से मुख्यमंत्री बने थे. साल 1999 तक वे मुख्यमंत्री बने रहे. साल 2003 में वे बीजेपी में शामिल हुए और फिर से राज्य के मुख्यमंत्री बने. 42 दिन तक उन्होंने एनडीए सरकार का नेतृत्व किया. अगस्त 2003 में उन्होंने बीजेपी जॉइन की थी.

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