'दाग अच्छे हैं...' बिहार के कानून मंत्री के किडनैपिंग केस पर बवाल, जानें बाकी राज्यों की कैबिनेट कितनी दागी?

बीजेपी का आरोप है कि बिहार के नए कानून मंत्री कार्तिकेय सिंह पर किडनैपिंग का केस है. बीजेपी का दावा है कि जिस दिन उन्हें अदालत में सरेंडर करना था, उसी दिन मंत्री पद की शपथ ली. लेकिन एक तथ्य ये भी है जब बीजेपी सरकार में थी, तब उसके कोटे से बने 11 मंत्रियों पर आपराधिक केस दर्ज थे.

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देश के लगभग सभी राज्यों की कैबिनेट में दागी मंत्री हैं. देश के लगभग सभी राज्यों की कैबिनेट में दागी मंत्री हैं.

Priyank Dwivedi

  • नई दिल्ली,
  • 20 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 5:43 PM IST

बिहार के नए कानून मंत्री कार्तिकेय सिंह चर्चा में हैं. बीजेपी का आरोप है कार्तिकेय कुमार सिंह का नाम किडनैपिंग के केस में है. इसके बावजूद उन्हें कानून मंत्री बना दिया गया है. बीजेपी सांसद सुशील मोदी का दावा है कि जिस दिन कार्तिकेय सिंह को अदालत में सरेंडर करना था, उसी दिन उन्होंने कानून मंत्री के पद की शपथ ली. 

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कार्तिकेय सिंह ही नहीं, बीजेपी ने नीतीश सरकार के कई मंत्रियों पर सवाल उठाए हैं. हालांकि ये भी तथ्य है कि जब नीतीश सरकार में बीजेपी शामिल थी, तो उसके कोटे से बने 14 मंत्रियों में से 11 पर क्रिमिनल केस दर्ज थे. 8 पर तो गंभीर अपराध के मामले दर्ज थे. गंभीर अपराध यानी रेप, मर्डर, किडनैपिंग या ऐसे केस जिनमें 5 साल या उससे ज्यादा की सजा का प्रावधान हो. 

बिहार में दागियों का रहा है बोलबाला!

- बिहार में 2020 में विधानसभा चुनाव हुए थे. उस समय एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (ADR) ने 243 में से 241 विधायकों के एफिडेविट का एनालिसिस कर बताया था कि जो लोग जीतकर आए हैं, उनमें से 142 पर आपराधिक केस दर्ज हैं. इन्हीं में से 123 ऐसे थे जिन पर गंभीर अपराधिक मामले दर्ज थे. 

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- इससे पहले 2015 में जब विधानसभा चुनाव हुए थे, तब 243 विधायकों में से 142 पर क्रिमिनल केस दर्ज थे. जबकि, 98 ऐसे थे जिनपर गंभीर अपराध के केस दर्ज थे. 2010 के चुनाव में 136 विधायकों पर क्रिमिनल केस थे और इनमें से 94 ऐसे थे जिन पर गंभीर आपराधिक केस थे. 

क्या सिर्फ बिहार में ही ऐसा है?

इस सवाल का जवाब है, बिल्कुल नहीं. देश के कुछ राज्यों को छोड़ दिया जाए तो बाकी ज्यादातर राज्यों की कैबिनेट में दागी मंत्री हैं. इस साल फरवरी-मार्च में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव हुए थे. इनमें उत्तराखंड और मणिपुर को छोड़कर बाकी चारों राज्यों की कैबिनेट में दागी मंत्रियों को जगह दी गई थी. 

उत्तर प्रदेश सरकार के 53 मंत्रियों में से 20 पर गंभीर आपराधिक केस दर्ज हैं. पंजाब के 11 में से 4 पर गंभीर आपराधिक केस चल रहे हैं. वहीं, गोवा के 9 में से 3 मंत्रियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक केस दर्ज हैं. 

पिछले साल भी 5 राज्यों- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव हुए थे. इनमें पश्चिम बंगाल की सरकार में 44 में से 7 मंत्रियों पर गंभीर आपराधिक केस हैं. तमिलनाडु के 34 में से 16, असम के 14 में से 1 और केरल के 21 में से 5 मंत्रियों पर गंभीर आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं.

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दागियों के चुनाव लड़ने पर रोक नहीं है क्या?

भारत के न्यायशास्त्र में जब तक दोष साबित नहीं हो जाता, तब तक व्यक्ति को निर्दोष माना जाता है. इसलिए अगर किसी व्यक्ति पर कोई भी आपराधिक मामला भले ही दर्ज हो, उसे चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता. हालांकि, अगर दोष साबित हो गया हो तो वो चुनाव नहीं लड़ सकता. 

इसी तरह अगर सांसद या विधायक बनने के बाद दोष साबित होता है और उसे 2 साल से ज्यादा की सजा सुनाई जाती है, तो उसकी सदस्यता तुरंत रद्द हो जाती है. साथ ही 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक भी लग जाती है. 

आज से 20 साल पहले तक चुनाव में उतरने से पहले अपने हलफनामे में आपराधिक मामलों की जानकारी देना जरूरी नहीं था. लेकिन 2002 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हलफनामे में आपराधिक मामलों की जानकारी देना जरूरी हो गया है.

राजनीति में अपराध को रोकने के लिए पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने एक गाइडलाइन जारी की थी. इसके मुताबिक, हर राजनीतिक पार्टी को अब अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया पर आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों की जानकारी देना जरूरी है. साथ ही ये भी बताना जरूरी है कि इन्हें टिकट क्यों दिया गया है. यही जानकारी अखबारों में भी देना जरूरी है. 

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हालांकि, राजनीतिक पार्टियों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया. वो बताती हैं कि उम्मीदवार पर राजनीतिक बदले की भावना से केस दर्ज किया गया है और ये भी बताती हैं कि ये बाकी उम्मीदवारों से अच्छा था, इसलिए इसे टिकट दिया गया है. 

पिछले साल अगस्त में एमिकस क्यूरी और सीनियर वकील विजय हंसारिया ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल की थी. इस रिपोर्ट में बताया था कि देशभर की अदालतों में सांसदों और विधायकों के खिलाफ 4,859 आपराधिक मामले पेंडिंग हैं. इस रिपोर्ट में ये भी बताया था कि राज्य सरकारों ने अपनी पार्टी के कई सांसदों और विधायकों पर दर्ज आपराधिक मामलों को वापस ले लिया है.

 

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