कौन हैं शाहबाज खान, जो कड़कड़डूमा की रामलीला में बने रावण? बॉलीवुड कनेक्शन और मंच की कहानी

राजधानी दिल्ली में कड़कड़डूमा की हनुमंत रामलीला में अभिनेता शाहबाज खान रावण की भूमिका निभा रहे हैं. 'द स्वॉर्ड ऑफ टीपू सुल्तान', 'चंद्रकांता' और 'द ग्रेट मराठा' जैसे धारावाहिकों के अलावा वह कई हिंदी फिल्मों में भी काम कर चुके हैं. जानिए उनके अभिनय के सफर और रावण के किरदार से उनके जुड़ाव की कहानी.

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रामलीला में रावण बने शहबाज खान की कहानी. (Photo: ITG) रामलीला में रावण बने शहबाज खान की कहानी. (Photo: ITG)

​रोहतास यादव

  • नई दिल्ली,
  • 17 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:23 PM IST

रामायण में रावण का किरदार ऐसा है, जिसे निभाना किसी भी कलाकार के लिए आसान नहीं... आवाज में दम चाहिए, संवादों में वजन और चेहरे पर ऐसा भाव कि दर्शक सामने बैठे-बैठे किरदार के प्रभाव को महसूस कर सकें. अब पूर्वी दिल्ली के कड़कड़डूमा की रामलीला में यही किरदार निभाने पहुंचे हैं अभिनेता शाहबाज खान... फिल्मों और टीवी की दुनिया में काम कर चुके शाहबाज जब रावण बनकर मंच पर आए, तो दर्शक देखते ही रह गए.

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शाहबाज खान की कहानी सिर्फ इतनी नहीं कि एक बॉलीवुड अभिनेता रामलीला में रावण बन गया. उनके करियर में ऐतिहासिक किरदारों की खास जगह रही है. टीवी पर हैदर अली से लेकर फिल्मों में अलग-अलग भूमिकाओं तक, वह लंबे समय से अभिनय की दुनिया का हिस्सा हैं. 

दिल्ली के कड़कड़डूमा स्थित CBD ग्राउंड में हनुमंत रामलीला चल रही है. 10 अक्टूबर से शुरू हुई यह रामलीला 20 अक्टूबर तक चलेगी. रावण की भूमिका में शाहबाज खान नजर आए. मंच पर उनकी एंट्री के साथ दर्शकों का उत्साह देखने को मिला.

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रामलीला में पंचवटी प्रसंग, सीता हरण, जटायु वध और भगवान श्रीराम की प्रतिज्ञा जैसे अहम प्रसंगों का मंचन किया गया. इनमें सीता हरण और जटायु वध के दृश्य खास थे. रामायण की कथा में सीता हरण एक निर्णायक मोड़ है. रावण छल से सीता का अपहरण करता है. उन्हें बचाने के लिए जटायु मुकाबला करते हैं और गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं.

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इसके बाद जटायु ही भगवान राम को सीता के अपहरण से जुड़ी जानकारी देते हैं. रामलीला में इन प्रसंगों को मंच पर उतारना कलाकारों के लिए अभिनय के साथ भावनाओं को भी दर्शकों तक पहुंचाने की चुनौती होता है.

कौन हैं शाहबाज खान?

रावण की भूमिका निभा रहे शाहबाज खान ने हिंदी फिल्मों के साथ टेलीविजन में भी काम किया है. उनका जन्म मध्य प्रदेश में हुआ. उनके पिता संगीत से जुड़े रहे हैं. अभिनय की दुनिया में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई और खास तौर पर ऐतिहासिक किरदारों और नेगेटिव रोल के लिए जाने गए.

टीवी सीरियल 'द स्वॉर्ड ऑफ टीपू सुल्तान' में हैदर अली का किरदार निभाना उनके करियर के अहम पड़ावों में से एक रहा. इसके अलावा वह 'द ग्रेट मराठा', 'चंद्रकांता' और 'बेताल पच्चीसी' जैसे धारावाहिकों में भी नजर आए. शाहबाज खान ने टेलीविजन के साथ हिंदी फिल्मों में भी काम किया है. उनकी फिल्मोग्राफी में 'मेजर साब', 'राजू चाचा', 'द हीरो: लव स्टोरी ऑफ अ स्पाई', 'एजेंट विनोद' जैसी फिल्में शामिल हैं.

धारावाहिकों की भूमिकाओं में ऐतिहासिक और काल्पनिक दुनिया के किरदारों को निभाने के लिए आवाज, हाव-भाव और प्रभावशाली संवाद अदायगी की जरूरत होती है. शाहबाज खान का नाम सामने आते ही कई दर्शकों को ऐतिहासिक टीवी धारावाहिकों का दौर याद आ सकता है. हालांकि, उनके करियर को केवल खलनायक या ऐतिहासिक किरदारों तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता. उन्होंने अलग-अलग तरह की भूमिकाओं में भी काम किया है.

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शाहबाज खान ने टेलीविजन के साथ हिंदी फिल्मों में भी काम किया है. इन फिल्मों में उनके काम ने बड़े पर्दे पर भी उनकी मौजूदगी दर्ज कराई. टीवी और फिल्मों के बीच काम करने का अनुभव किसी कलाकार को अभिनय के अलग-अलग माध्यमों की जरूरतें समझने का मौका देता है.

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कैमरे के सामने अभिनय और रामलीला के खुले मंच पर अभिनय में फर्क होता है. कैमरा चेहरे के छोटे से भाव को भी पकड़ सकता है, जबकि मंच पर कलाकार को अपनी आवाज और हाव-भाव के जरिए दूर बैठे दर्शकों तक बात पहुंचानी होती है.

शाहबाज खान के लिए रामलीला का मंच इसलिए भी दिलचस्प है कि यहां कहानी पहले से दर्शकों के मन में बसी होती है. दर्शक सिर्फ यह नहीं देखते कि कलाकार ने संवाद कैसे बोले, बल्कि यह भी देखते हैं कि उसने उस किरदार को किस तरह जीवंत किया.

कड़कड़डूमा की रामलीला में रावण बने शाहबाज खान ने इस किरदार को चुनौतीपूर्ण और रचनात्मक रूप से संतोष देने वाला बताया. रावण का किरदार आखिर कलाकारों को आकर्षित क्यों करता है? इसकी एक वजह यह है कि रामायण में रावण केवल विरोधी पात्र नहीं है. कथा में वह शक्तिशाली राजा और विद्वान होने के बावजूद अपने अहंकार और फैसलों के कारण पतन की ओर जाता है. उसके किरदार को निभाते समय कलाकार को उसके प्रभाव और उसके अंत, दोनों पहलुओं को समझना पड़ता है.

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शाहबाज खान ने बच्चों को रामलीला दिखाने की अपील की

रामलीला के दौरान शाहबाज खान ने कहा कि यह केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को समझने का अवसर भी है. उन्होंने माता-पिता से अपील की कि वे बच्चों को रामलीला दिखाने लेकर आएं, ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ सके और बड़ों का सम्मान करने जैसे मूल्यों को समझे.

हनुमंत रामलीला कमेटी के लीला मंत्री विनीत जैन के मुताबिक, कमेटी कई वर्षों से कड़कड़डूमा में रामलीला आयोजित कर रही है. दर्शकों की सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस के सहयोग से इंतजाम किए गए हैं. परिसर में वॉलंटियर्स की तैनाती और CCTV कैमरों के जरिए निगरानी की व्यवस्था भी की गई है. दर्शकों के लिए खाने-पीने के इंतजाम भी किए गए हैं.

रामलीला की खासियत भी यही है. यहां कहानी पुरानी है, किरदार जाने-पहचाने हैं, लेकिन हर साल उन्हें निभाने वाले कलाकार और मंचन का अनुभव बदल सकता है. इस बार कड़कड़डूमा में रावण के किरदार में शाहबाज खान हैं, जिनकी पहचान सिर्फ इस एक भूमिका से नहीं, बल्कि फिल्मों और टेलीविजन में उनके लंबे अभिनय सफर से भी जुड़ी है.

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