वायनाड त्रासदी के 2 साल बाद भी अधूरा पुनर्वास, विजयन ने कांग्रेस सरकार से मांगा जवाब

वायनाड भूस्खलन त्रासदी के दो साल पूरे होने पर विपक्ष ने पुनर्वास कार्य में देरी को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं. विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने कहा कि 149 परिवार अब भी अपने घर का इंतजार कर रहे हैं और सरकार को युद्धस्तर पर काम पूरा करना चाहिए.

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केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनरई विजयन. (File Photo) केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनरई विजयन. (File Photo)

शिबिमोल

  • नई दिल्ली,
  • 30 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:56 PM IST

केरल के वायनाड जिले के चूरलमाला और मुंडक्कई में हुए विनाशकारी भूस्खलन को गुरुवार को दो साल पूरे हो गए. इस मौके पर विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने त्रासदी में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी और पुनर्वास कार्य में कथित देरी को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए.

पिनराई विजयन ने कहा कि यह हादसा आज भी हजारों परिवारों के लिए एक दर्दनाक याद है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अपने परिजन और सब कुछ खो दिया, उन्हें अब तक पूरी तरह बसाया नहीं जा सका है. ऐसे परिवारों को और इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए.

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पूर्व सीएम विजयन ने दावा किया कि एलडीएफ सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए पुनर्वास परियोजना शुरू की थी कि आपदा प्रभावित परिवारों को कभी बेसहारा न छोड़ा जाए. उनके मुताबिक, सरकार बदलने से पहले 410 प्रस्तावित घरों में से 308 मकानों की छत (रूफ स्लैब) का निर्माण पूरा हो चुका था. पहले चरण में 178 परिवारों को नए घर भी सौंप दिए गए थे.

यूडीएफ सरकार ने पुनर्वास कार्य की रफ्तार धीमी की

हालांकि, पिनरई विजयन ने आरोप लगाया कि यूडीएफ सरकार के सत्ता में आने के बाद पुनर्वास कार्य की रफ्तार काफी धीमी हो गई है. उन्होंने कहा कि सरकार के 70 दिन पूरे होने के बावजूद केवल 9 अतिरिक्त घरों की छत का काम ही पूरा हो पाया है. उनके अनुसार, प्रमुख पदों पर अनावश्यक तबादले और विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण परियोजना की गति प्रभावित हुई है.

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149 परिवार को स्थायी घर का इंतजार- पिनरई विजयन

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी भी 149 परिवार अपने स्थायी घर का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने सरकार से अपील की कि पुनर्वास परियोजना को युद्धस्तर पर पूरा किया जाए और सभी आपदा प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द सुरक्षित आवास मुहैया कराया जाए.

विजयन ने कहा कि वायनाड त्रासदी सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं थी, बल्कि उन परिवारों के जीवन पर गहरा असर छोड़ने वाली घटना थी. इसलिए पुनर्वास कार्य में किसी भी तरह की देरी स्वीकार नहीं की जा सकती और सरकार को इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए.

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