5 रुपये से 300 रुपये तक चार्ज... जानें- UPI लेनदेन पर किसे MDR देना है, किसे नहीं

नए यूपीआई फ्रेमवर्क में आम लोगों के लिए सभी पर्सन-टू-पर्सन लेन-देन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे. एमडीआर केवल 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट लेन-देन पर लागू होगा. 96 प्रतिशत व्यापारिक भुगतान और छोटे दुकानदार इस दायरे से पूरी तरह बाहर रहेंगे.

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15 अक्टूबर से लागू होंगे नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट्स. (Photo: ITG) 15 अक्टूबर से लागू होंगे नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट्स. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:53 AM IST

केंद्र सरकार और यूपीआई संचालन समिति ने भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 के अंतर्गत एक नया UPI मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क पेश किया है. इस व्यवस्था के तहत सभी पर्सन-टू-पर्सन (P2P) लेनदेन पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे. 2,000 रुपये तक के सामान्य व्यापारिक भुगतान और छोटे व्यापारियों को मिलने वाले भुगतानों पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा. इसके चलते लगभग 96% पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेन-देन अप्रभावित रहेंगे. एमडीआर केवल 2,000 रुपये से ज्यादा के निर्दिष्ट (तय किया हुआ) व्यापारिक भुगतानों पर 5 रुपये से लेकर 300 रुपये तक सीमित रहेगा. ये कदम UPI के संचालन, सुरक्षा और दीर्घकालिक विस्तार को मजबूती देने के लिए उठाया गया है.

नए नियमों के अनुसार, पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यूपीआई लेनदेन पर आम जनता को कोई चार्ज नहीं देना होगा. चाहे भेजी गई राशि कितनी भी हो, पैसा भेजने या पाने के लिए कोई लेनदेन शुल्क या प्लेटफॉर्म शुल्क नहीं लगेगा. कुल लेनदेन मूल्य का 70 प्रतिशत हिस्सा P2P श्रेणी में आता है जो इस दायरे से पूरी तरह बाहर रहेगा. इसके अलावा 2,000 रुपये तक के किसी भी मर्चेंट भुगतान (P2M) पर ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा.

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स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे दुकानदारों को पूरी राहत

वहीं, छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त भुगतान लागत से बचाने के लिए शून्य-एमडीआर फ्रेमवर्क लागू रहेगा. पर्सन-टू-पर्सन-मर्चेंट (P2PM) श्रेणी के तहत क्यूआर कोड से प्रति माह 1 लाख रुपये तक का भुगतान लेने वाले स्ट्रीट वेंडर्स और मोहल्ले की दुकानों से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा. कुल व्यापारिक लेनदेन का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा इस दायरे में सुरक्षित रहेगा.

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि एमडीआर केवल लगभग 4% व्यापारिक लेन-देन पर लागू होगा. इसका साफ मतलब है कि लगभग 96% व्यापारिक लेन-देन अप्रभावित रहेंगे, क्योंकि वह या तो ₹2,000 की सीमा से कम हैं या छोटे व्यापारियों के लिए शून्य-एमडीआर फ्रेमवर्क के अंतर्गत आते हैं. इसलिए ये फ्रेमवर्क लोगों, सूक्ष्म उद्यमों और छोटे व्यवसायों की रक्षा करता है, जबकि बड़े व्यापारी लेन-देन पर सीमित शुल्क लागू करता है.

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2,000 रुपये से ऊपर के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर नियम

2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा पी2एम लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत का मामूली एमडीआर लागू किया जाएगा. ये राशि बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और यूपीआई ऐप प्रदाताओं के बीच बांटी जाएगी. बड़े लेनदेन के लिए सुरक्षा तय करते हुए नियम बनाया गया है कि 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के किसी भी लेनदेन पर एमडीआर अधिकतम 300 रुपये प्रति लेनदेन तक ही सीमित रहेगा. इससे बड़े कारोबारियों की लागत भी नियंत्रित रहेगी.

रेलवे, ईंधन और कृषि जैसे क्षेत्रों के लिए MDR फिक्स्ड

आवश्यक और कम लाभ मार्जिन वाले क्षेत्रों को राहत देने के लिए एकसमान दर तय की गई है. रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट से जुड़े 2,000 रुपये से ज्यादा के लेनदेन पर प्रति लेनदेन सिर्फ 5 रुपये का फिक्स्ड एमडीआर लगेगा. ये व्यवस्था सार्वजनिक सेवाओं और कम मार्जिन वाले व्यापारों को लागत में निश्चितता देने के उद्देश्य से बनाई गई है. इससे इन बुनियादी सेवाओं पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव नहीं पड़ेगा.

साथ ही म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, शेयर ब्रोकरों और डीलरों से जुड़े निवेश भुगतानों के लिए बेहद रियायती दर तय की गई है. ऐसे भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत का एमडीआर लागू होगा जो अधिकतम 300 रुपये प्रति लेनदेन पर सीमित रहेगा. इसका मुख्य उद्देश्य औपचारिक वित्तीय बाजारों में खुदरा निवेशकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना और उन्हें बिना किसी भारी लागत के डिजिटल निवेश की सुविधा देना है.

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ग्राहकों की जेब से नहीं कटेगा कोई एमडीआर

सरकार की ओर से ये साफ किया गया है कि एमडीआर न तो कोई टैक्स है और न ही सरकार या एनपीसीआई की ओर से वसूला जाने वाला कोई शुल्क है. ये मर्चेंट पेमेंट सिस्टम के संचालन और विस्तार के लिए इकोसिस्टम के बीच बटने वाला शुल्क है. बैंकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि व्यापारी ये शुल्क ग्राहकों पर न डालें. यूपीआई ऐप कंपनियों पर प्लेटफॉर्म फीस या कोई भी छिपा हुआ चार्ज लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है.

फ्रेम वर्क में बताया गया है कि आम नागरिकों को पहले की तरह यूपीआई के असीमित इस्तेमाल की सुविधा मिलती रहेगी. इसमें कोई मासिक कोटा, मात्रा प्रतिबंध या मुफ्त लेनदेन की सीमा लागू नहीं होगी. बैंकों और एनपीसीआई द्वारा निर्धारित 1 लाख से 5 लाख रुपये तक की दैनिक लेनदेन सीमा केवल सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन के लिए है. इसका शुल्क लगाने की किसी भी प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है.

छोटे व्यापारियों के लिए बनेगा समर्पित फंड

छोटे कारोबारियों को डिजिटल तंत्र से जोड़ने और प्रोत्साहित करने के लिए एक विशेष फंड स्थापित किया जाएगा. कुल एमडीआर संग्रह का 5 प्रतिशत हिस्सा सीधे इस समर्पित कोष में जमा किया जाएगा. ये फंड देश भर में यूपीआई की व्यापक स्वीकार्यता बढ़ाने, इसके निरंतर इस्तेमाल को बढ़ावा देने और दूरदराज के छोटे व्यवसायों को भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र में शामिल करने में सहयोग करेगा.

ये नया ढांचा वित्त संबंधी स्थायी समिति की 32वीं रिपोर्ट की उस सिफारिश के अनुरूप है, जिसमें एक व्यावहारिक राजस्व मॉडल की जरूरत बताई गई थी. बड़े व्यापारिक लेनदेन से मिलने वाला राजस्व बैंकों और ऐप प्रदाताओं को ग्रामीण तथा अर्ध-शहरी इलाकों में भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण में मदद करेगा. इससे यूपीआई का पूरा तंत्र दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ, सुरक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम बना रहेगा.

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