तेलंगाना हाई कोर्ट के जज ने सरकारी खजाने पर मुफ्त सुविधाओं और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने वाले अयोग्य लाभार्थियों के कारण पड़ने वाले वित्तीय बोझ पर चिंता जताई.
एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, राज्य के प्रधान सचिव (वित्त) संदीप कुमार सुल्तानिया के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस नागेश भीमपाका ने कहा कि कर्मचारियों के वेतन भुगतान, कर्ज चुकाने और कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के बाद सरकारी फंड काफी कम हो जाता है.
उन्होंने तेलुगु में अपनी टिप्पणी में कहा, "बहुत सारी गैर जरूरी मुफ्त योजनाएं लागू की जा रही हैं. हां, कल्याणकारी कार्यक्रम लागू किए जाने चाहिए, लेकिन कई लोग बिना पात्रता के इनका लाभ उठा रहे हैं. 'रायतू बंधु' किसानों के लिए योजना है. क्या करोड़पति इसका लाभ नहीं उठा रहे हैं? इससे राज्य पर कितना बोझ पड़ता है."
उन्होंने कहा कि जहां पहले की पीढ़ियों के लोग महात्मा गांधी और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों से प्रेरित होकर देश में योगदान देने के लिए उत्सुक थे, वहीं अब लोगों में यह सवाल पूछने की प्रवृत्ति है कि उन्हें सरकार से क्या व्यक्तिगत लाभ मिला है.
उन्होंने कहा कि आज के समय में अगर किसी एक लाभार्थी का भी PDS राशन कार्ड हटा दिया जाए, तो इससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो जाएगा. उन्होंने कहा कि राज्य में कृषि श्रमिकों की कमी के कारण गांवों में किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे छत्तीसगढ़, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से आए प्रवासी मजदूर राज्य के खेतों में काम कर रहे हैं.
इस बात पर जोर देते हुए कि वह कोई राजनीतिक भाषण नहीं दे रहे हैं या सरकार की आलोचना नहीं कर रहे हैं, जस्टिस भीमपाका ने कहा कि इन मुद्दों पर विचार करने की जरूरत है.
BPL परिवारों के लिए बड़ी संख्या में PDS राशन कार्ड और अन्य मुफ्त सुविधाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर मुफ्त सुविधाओं और अयोग्य लाभार्थियों को लाभ देने पर भारी खर्च का यही सिलसिला जारी रहा तो भगवान कुबेर भी एक दिन दिवालिया हो जाएंगे.
क्या था अवमानना का पूरा मामला?
यह पूरा मामला सिकंदराबाद छावनी बोर्ड के एक सदस्य की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है. साल 2024 में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह बोर्ड को 33 करोड़ रुपये से अधिक के बकाये के भुगतान से जुड़ी अर्जी पर विचार करे. कोर्ट को बताया गया कि इसमें से 25 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है.
10 जुलाई को कोर्ट ने वित्त सचिव संदीप कुमार सुल्तानिया को पेश होने का निर्देश दिया था. लेकिन न तो कोई जवाबी हलफनामा दायर किया गया और न ही पेशी से छूट की अर्जी दी गई. इस पर नाराज होकर कोर्ट ने अधिकारी के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था.
अदालत ने शहर के पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया था कि वे उन्हें जहां भी मिलें गिरफ्तार करें. कोर्ट ने आगे यह भी निर्देश दिया कि अगर सीनियर अधिकारी 5000 रुपये का पर्सनल बॉन्ड और यह लिखित वादा देता है कि वह शुक्रवार को कोर्ट में पेश होगा, तो उसे जमानत पर रिहा किया जा सकता है.
शुक्रवार को सीनियर IAS अधिकारी संदीप कुमार सुल्तानिया व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुए, जिसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त के लिए तय की.
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