जैगुआर-ऑडी कार, सोना और फ्लैट्स... NIMS अधिकारी के पास मिली अकूत दौलत

तेलंगाना एंटी करप्शन ब्यूरो ने निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के एडिशनल मेडिकल सुपरिटेंडेंट नोरी लक्ष्मी भास्कर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच शुरू की है.

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हैदराबाद: NIMS के डॉक्टर पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज. (photo: ITG) हैदराबाद: NIMS के डॉक्टर पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज. (photo: ITG)

aajtak.in

  • हैदराबाद,
  • 22 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:49 PM IST

तेलंगाना एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (NIMS) के एडिशनल मेडिकल सुपरिटेंडेंट नोरी लक्ष्मी भास्कर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है.

मंगलवार को ACB ने उनके आवास समेत आठ ठिकानों पर छापेमारी की. एजेंसी को जांच में कई फ्लैट, खाली प्लॉट, लग्जरी कारें, सोने के गहने और करोड़ों रुपये के फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट की जानकारी हाथ लगी है. एजेंसी ने बताया कि डॉक्टर-एडमिनिस्ट्रेटर पर आरोप है कि उन्होंने अपनी नौकरी के दौरान भ्रष्टाचार और गलत तरीकों से अकूत संपत्ति अर्जित की है, जिसका उनके पास स्रोत नहीं है.

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कई फ्लैट्स और प्लॉट्स की मिली जानकारी

एसीबी के अनुसार, तलाशी के दौरान कई संपत्तियों और खुले भूखंडों के दस्तावेज बरामद किए गए. इनमें कूकटपल्ली की हाई-राइज गेटेड कम्युनिटीज में एक फोर-बीएचके और दो थ्री-बीएचके फ्लैट्स शामिल हैं. इसके अलावा मणिकोंडा, पेटबशीरबाद और कूकटपल्ली में पांच टू-बीएचके फ्लैट्स मिले हैं. साथ ही यादद्री, नंदीगामा, शमीरपेट और आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में 800 वर्ग गज का भूखंड भी जांच में सामने आया है.

जैगुआर, ऑडी और 517gm सोने के जेवरात बरामद

एसीबी ने बताया कि चल संपत्ति (movable assets) की लिस्ट भी उतनी ही चौंकाने वाली है. ACB ने बताया कि उन्हें 517.8 ग्राम सोने के गहने और कई गाड़ियां मिलीं, जिनमें जगुआर, ऑडी और टाटा नेक्सॉन शामिल हैं. साथ ही चार दोपहिया वाहन- रॉयल एनफील्ड, वेस्पा, एक्टिवा और यामाहा भी मिले. और करीब ₹5 लाख मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स भी बरामद किए गए.

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करोड़ों का वित्तीय निवेश

जांच में बैंक खातों में ₹41 लाख, डाकघर में ₹12 लाख, निजी वित्तीय संस्थानों में ₹35 लाख और म्यूचुअल फंड में ₹29.55 लाख का निवेश सामने आया. इसके अलावा विभिन्न व्यक्तियों को हैंड लोन के रूप में ₹1.33 करोड़ देने और डीआरटी में विवादित एक फ्लैट में ₹1.30 करोड़ निवेश करने का आरोप है. एजेंसी ने अब तक चिन्हित संपत्तियों का दस्तावेजी मूल्य ₹6.13 करोड़ आंका है, जबकि बाजार मूल्य इससे कई गुना अधिक हो सकता है.  मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की जांच जारी है.

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