बचपन में हिंसा, रेप और 13 साल की कानूनी लड़ाई... तरुण तेजपाल केस की पीड़िता ने बयां किया दर्द

तरुण तेजपाल केस की पीड़िता ने अपनी आपबीती को पहली बार विस्तार से साझा करते हुए बताया कि कैसे बचपन से देखी और झेली पुरुष हिंसा, यौन शोषण और उत्पीड़न ने उनके जीवन और सोच को प्रभावित किया. उन्होंने रेप के बाद चली 13 साल की कानूनी लड़ाई के अनुभवों के जरिए सत्ता, राजनीति और महिलाओं के शरीर के बीच संबंध को समझाया.

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तरुण तेजपाल को कोर्ट ने अलग-अलग मामलों में सालों जेल की सजा सुनाई है. (File Photo) तरुण तेजपाल को कोर्ट ने अलग-अलग मामलों में सालों जेल की सजा सुनाई है. (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:23 AM IST

तरुण तेजपाल केस की पीड़िता ने अपनी आपबीती को पहली बार विस्तार से सामने रखा है. अपनी कहानी में उन्होंने सिर्फ उस घटना और उसके बाद चली 13 साल की कानूनी लड़ाई के बारे में नहीं बताया, बल्कि यह भी समझाया कि बचपन से झेली पुरुष हिंसा, डर और यौन उत्पीड़न ने उनके व्यक्तित्व और दुनिया को देखने के नजरिए को कैसे बदला.

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अपनी कहानी में उन्होंने लिखा कि राजनीति को लेकर उनकी शुरुआती समझ संसद, चुनाव, अखबारों या आंदोलनों से बनी थी. लेकिन 27 साल की उम्र में रेप की घटना और उसके बाद के अनुभवों ने उन्हें यह समझाया कि राजनीति महिलाओं के शरीर पर भी होती है. उनके मुताबिक, सत्ता सिर्फ संस्थाओं और राजनीतिक फैसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के शरीर पर नियंत्रण और हिंसा के जरिए भी दिखाई देती है.

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घरेलू हिंसा, यौन शोषण और पुरुषों की आक्रामकता

पीड़िता ने बचपन के अनुभवों को याद करते हुए बताया कि पुरुषों के गुस्से और हिंसा से उनका पहला सामना घर के भीतर ही हुआ. उन्होंने पिता की घरेलू हिंसा, बचपन में यौन शोषण और बाद में पुरुषों की तरफ से झेली गई आक्रामकता और छेड़छाड़ का जिक्र किया. उनका कहना है कि इन अनुभवों ने उन्हें लगातार डर में जीना सिखाया.

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पुरुषों के गुस्से को पहले से भांपना सीख लिया!

पीड़िता के मुताबिक, उन्होंने पुरुषों के गुस्से को पहले से भांपना, उन्हें शांत रखने की कोशिश करना और अपनी भावनाओं को दबाना सीख लिया था. वह लिखती हैं कि इस हिंसा ने उन्हें "आज्ञाकारी और डरी हुई महिला" बना दिया. उनके लिए खुद को सीमित रखना और टकराव से बचना एक तरह की सुरक्षा बन गया था.

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तरुण तेजपाल मामले में रेप के आरोप के बाद शुरू हुई 13 साल की कानूनी लड़ाई ने उनके लिए सत्ता और हिंसा के रिश्ते को और स्पष्ट किया. उन्होंने लिखा कि सत्ता सिर्फ संसद या राजनीतिक संस्थानों में नहीं होती, बल्कि शरीर और जीवन पर भी उसका असर पड़ता है.

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