सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तमिलनाडु CM विजय, मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती

मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को दिए गए अपने फैसले में कहा था कि तत्काल नियुक्ति पत्र जारी करना संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 का उल्लंघन है, क्योंकि अन्य कारणों से अनुकंपा नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे लोगों के मामलों में पहले से ही देरी हो रही है.

Advertisement
मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे विजय. (Photo: PTI) मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे विजय. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:42 PM IST

मद्रास हाईकोर्ट ने करूर भगदड़ मामले में तमिलनाडु की विजय सरकार को झटका दिया था. मद्रास हाईकोर्ट ने मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का सरकारी आदेश रद्द कर दिया था. करूर भगदड़ पीड़ितों के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति देने संबंधी सरकारी आदेशों को मद्रास हाईकोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के दो दिन बाद तमिलनाडु सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

Advertisement

मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को दिए गए अपने फैसले में कहा था कि तत्काल नियुक्ति पत्र जारी करना संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 का उल्लंघन है, क्योंकि अन्य कारणों से अनुकंपा नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे लोगों के मामलों में पहले से ही देरी हो रही है.

अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि हम इस तथ्य से अवगत हैं कि हर विभाग में अनुकंपा नियुक्ति के लिए प्रतीक्षा सूची मौजूद है. आवेदन मिलते ही तुरंत नौकरी नहीं दी जाती. अनुकंपा नियुक्ति वरिष्ठता के आधार पर दी जाती है ना कि इस आधार पर कि तत्काल राहत देने की आवश्यकता कितनी है.

सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में तमिलनाडु सरकार ने तर्क दिया है कि अनुकंपा नियुक्ति देने का फैसला सरकार की नीतिगत निर्णय का हिस्सा है और अदालत किसी नीतिगत निर्णय में हस्तक्षेप नहीं कर सकती.

Advertisement

क्या है मामला?

बता दें कि 27 सितंबर 2025 को करूर जिले के वेलुस्वामीपुरम में TVK की एक राजनीतिक रैली के दौरान भगदड़ मच गई थी. विजय का भाषण सुनने के लिए बड़ी संख्या में समर्थक पहुंचे थे. भीड़ बेकाबू होने से 41 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे. इस मामले की जांच फिलहाल CBI कर रही है. एजेंसी TVK के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों से पूछताछ कर उनके बयान भी दर्ज कर चुकी है. इसी आदेश को चुनौती देते हुए कई जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं. 

मुख्यमंत्री बनने के बाद 10 जुलाई 2026 को विजय पहली बार करूर पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने सितंबर 2025 की करूर भगदड़ से प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास कार्यक्रम की शुरुआत की. साथ ही, जान गंवाने वाले 41 लोगों के परिवारों में से 32 पात्र सदस्यों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे. राज्य सरकार ने भगदड़ में जान गंवाने वाले प्रत्येक परिवार के एक पात्र सदस्य को सरकारी नौकरी देने का फैसला किया था. जिसे अब मद्रास हाई कोर्ट ने सरकार का यह आदेश रद्द कर दिया है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »