निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली की जेल में कैसी थी जिंदगी? लक्सर जेल अधीक्षक ने बताया

निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली को सभी 13 मामलों में बरी किया गया था और वह 11 नवंबर 2025 को लुक्सर जेल से रिहा हुआ था. शुक्रवार को हरिद्वार में एक चाय की दुकान पर वह फंदे से लटका मिला. लुक्सर जेल के अधीक्षक ब्रजेश सिंह के मुताबिक जेल में उसका व्यवहार सामान्य रहा.

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निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत के बाद सवाल उठ रहे हैं (File Photo: ITG) निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत के बाद सवाल उठ रहे हैं (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:44 PM IST

निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की मौत के बाद सवाल उठ रहे हैं. सभी 13 मामलों में बरी होकर पिछले साल जेल से रिहा हुआ कोली शुक्रवार को हरिद्वार में एक चाय की दुकान पर फंदे से लटका मिला. लुक्सर जेल के अधीक्षक ने कहा कि जेल में उसका व्यवहार सामान्य था, जबकि एक पीड़ित परिवार ने उसकी हत्या का आरोप लगाकर जांच की मांग की है.

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निठारी कांड 2006 में सामने आया था. नोएडा के सेक्टर 31 में कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर के बंगले के पास बच्चों और महिलाओं के कंकाल, खोपड़ियां और हड्डियां मिली थीं. सुरेंद्र कोली उस समय पंढेर के घर में घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था. पुलिस ने 2006 में कोली को गिरफ्तार किया था. बाद में उसे कई मामलों में दोषी ठहराया गया, लेकिन निठारी से जुड़े सभी 13 मामलों में बरी हो गया. आखिरी लंबित केस में सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में उसकी याचिका मंजूर की थी.

कोली 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ग्रेटर नोएडा की लुक्सर जेल से रिहा हुआ था. वह वकीलों के साथ बाहर निकला था. उसने वहां मौजूद पत्रकारों से बात नहीं की और उसका ठिकाना नहीं बताया गया. लुक्सर जेल के अधीक्षक ब्रजेश सिंह ने शनिवार को पीटीआई को बताया कि कोली सितंबर 2024 से रिहाई तक यानी करीब 14 महीने इस जेल में रहा. उनके मुताबिक उसका व्यवहार सामान्य था और कुछ गलत नहीं दिखा. इससे पहले कोली सजा का ज्यादातर समय गाजियाबाद की डासना जेल में रहा था. उसे कुछ समय के लिए मेरठ की जेल भी ले जाया गया, पर फिर डासना लाया गया और बाद में लुक्सर भेजा गया.

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यह भी पढ़ें: निठारी कांड: जल्लाद तैयार था, फंदा भी रेडी, 12 साल पहले मेरठ जेल में फांसी से कैसे बचा था सुरेंद्र कोली?

कोली की मौत के बाद एक पीड़ित परिवार ने सवाल उठाए हैं. झब्बू लाल की 15 साल की बेटी इस कांड में मारी गई थी. उनका आरोप है कि कोली की हत्या हुई है. जेल में आत्महत्या करता तो समझ आता, लेकिन रिहा होकर महीनों बाहर रहने के बाद ऐसा करना शक पैदा करता है. उनका दावा है कि कोली कोई अहम जानकारी बताने वाला था, इसलिए उसे मार दिया गया.

झब्बू लाल ने कहा कि असली गुनहगार पंढेर है और उसे फांसी होनी चाहिए. उन्होंने सरकार से कानूनी लड़ाई में मदद की अपील की. पत्नी सुनीता देवी ने भी हत्या की बात दोहराई और जांच मांगी. उनका कहना है कि कोली चाय की दुकान चलाकर कमाई कर रहा था. यह दंपती करीब 20 साल से इंसाफ मांग रहा है और चालीस साल पहले काम की तलाश में उन्नाव से निठारी आया था.

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