सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहयोगी सुमित रॉय को बड़ी राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. अदालत ने रॉय को जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करने का निर्देश भी दिया है. यह राहत कथित 'कैश फॉर जॉब' मामले में दी गई है.
जांच में सहयोग का दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, सुमित रॉय फिलहाल गिरफ्तार नहीं किए जाएंगे, लेकिन उन्हें जांच में शामिल होकर हर संभव सहयोग करना होगा. इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट से भी रॉय को मिश्रित राहत मिली थी. हाई कोर्ट ने डेबरा मामले में उन्हें अग्रिम जमानत दे दी थी, जबकि सालबोनी भूमि घोटाले से जुड़े मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी.
सालबोनी मामला पश्चिम मेदिनीपुर जिले में करीब 300 एकड़ सरकारी जमीन के कथित फर्जीवाड़े और घोटाले से जुड़ा है. जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस मामले में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं.
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सुमित रॉय की ओर से कहा गया कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे और एजेंसियों के सभी सवालों का जवाब देंगे.
वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है. उन्होंने दावा किया कि जब भी जांच एजेंसियां रॉय को गिरफ्तार करने पहुंचीं, उनके समर्थकों ने बाधा डाली. मेहता ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कार्रवाई में रुकावट पैदा की.
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने रॉय की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है. मामले की आगे की सुनवाई में अदालत जांच की प्रगति और पक्षों की दलीलों पर विचार करेगी.
संजय शर्मा