जब अयोध्या में मस्जिद टूटते देख रो पड़ीं सोनिया गांधी... किताब में बताया 1992 का किस्सा

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने यह स्वीकार किया है कि बीजेपी और उसकी कट्टर हिंदुत्व राजनीति के उभार में उनकी अपनी पार्टी की नाकामियों का भी हाथ रहा है. उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि हम कई तरीकों से बहुत आत्मसंतुष्ट रहे.

Advertisement
इमरजेंसी पर अपनी राय रखते हुए, सोनिया गांधी ने इसे लागू करने के फैसले को एक गलती बताया. (File Photo: ITG) इमरजेंसी पर अपनी राय रखते हुए, सोनिया गांधी ने इसे लागू करने के फैसले को एक गलती बताया. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:15 PM IST

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने संस्मरण (memoir) किताब में उत्तर भारत में हुए बदलावों और 1992 में अयोध्या में एक मस्जिद के डेमोलिशन जिक्र किया है. सोनिया गांधी ने बताया कि जब वे अयोध्या में टेलीविजन पर मस्जिद का विध्वंस (डेमोलिशन) देख रही थीं, तो उनके आंसू निकल आए थे.

उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें समझ आ गया था कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और उनके सहयोगियों ने जिस धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र को बनाने का प्रयास किया था, उसे बचाए रखने के लिए अब एक लंबी लड़ाई लड़नी होगी.

Advertisement

उत्तर भारत में बदलाव के समय अयोध्या शहर में बनी एक मस्जिद के बारे में यह दावा लगातार तूल पकड़ रहा था कि इसे एक प्राचीन हिंदू मंदिर के अवशेषों पर बनाया गया था. कट्टरपंथी, राइट-विंग हिंदू राष्ट्रवादी संगठनों और राजनीतिक समूहों के बीच यह दावा जोर पकड़ रहा था. सोनिया गांधी ने बताया. इसके बाद दिसंबर 1992 में इस मूवमेंट के समर्थकों ने, जिनमें बीजेपी के नेता भी शामिल थे, हिंसात्मक रूप से मस्जिद को ध्वस्त कर दिया.

इसके साथ ही, सोनिया गांधी ने यह भी स्वीकार किया है कि बीजेपी और उसकी कट्टर हिंदुत्व राजनीति के उभार में उनकी अपनी पार्टी की नाकामियों का भी हाथ रहा. उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि हम कई तरीकों से बहुत आत्मसंतुष्ट (complacent) रहे. हमारा रवैया एक तरह से ढीला-ढाला रहा.'

2024 में पीएम मोदी ने बीजेपी के लंबे समय से चले आ रहे वादे को पूरा करते हुए उसी जगह पर एक विशाल हिंदू मंदिर का उद्घाटन किया, जहां कभी मस्जिद खड़ी थी.

Advertisement

आपातकाल पर बोलीं सोनिया गांधी

आपातकाल (इमरजेंसी) पर अपनी राय रखते हुए, कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने इसे लागू करने के फैसले को एक गलती बताया है और कहा है कि उनका मानना है कि उनकी मदर-इन-लॉ और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी बाद में ऐसा ही महसूस हुआ था.

सोनिया गांधी ने अपनी आने वाली किताब 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' में लिखा है कि अगर संजय गांधी को कंट्रोल में रखा जाता, तो इमरजेंसी लागू होने के बाद हुए अधिकांश नुकसान को रोका जा सकता था.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »