सिक्किम में पहली बार हिमालयन याक फेस्टिवल का आगाज, बर्फीली वादियों में दिखेगी अनोखी संस्कृति

सिक्किम में पहली बार हिमालयन याक फेस्टिवल का आयोजन किया गया. इसका मकसद याक के संरक्षण, इससे जुड़े लोगों की आजीविका और पर्यटन को बढ़ावा देना है. याक हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों में रहने वाले समुदायों के लिए दूध, मक्खन, पनीर, ऊन और परिवहन का अहम साधन है.

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महोत्सव में सिक्किम के अलग-अलग इलाकों और लद्दाख से लाए गए याक उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं (Photo- ITG) महोत्सव में सिक्किम के अलग-अलग इलाकों और लद्दाख से लाए गए याक उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं (Photo- ITG)

aajtak.in

  • गंगटोक,
  • 28 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:46 PM IST

सिक्किम के पूर्वी हिस्से में भारत-चीन सीमा के पास स्थित ग्नाथांग में पहली बार सिक्किम हिमालयन याक फेस्टिवल का आयोजन किया गया. इस महोत्सव का मकसद हिमालयी याक के संरक्षण, उसकी देखभाल और स्थानीय लोगों की आजीविका में उसके महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है. इसके साथ ही इस आयोजन के जरिए सिक्किम के दूरदराज के पहाड़ी इलाकों में पर्यटन को भी बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है.

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महोत्सव का उद्घाटन सिक्किम विधानसभा के अध्यक्ष एमएन शेरपा ने मुख्य अतिथि के तौर पर किया. इस मौके पर सामाजिक कल्याण विभाग के मंत्री समदुप लेपचा, कृषि मंत्री पूरन कुमार गुरुंग और स्थानीय विधायक पामिन लेपचा भी मौजूद रहे.

दरअसल, हिमालयी याक ऊंचाई वाले इलाकों में रहने वाला ऐसा पशु है, जो समुद्र तल से करीब 3,000 से 5,000 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई पर भी जीवित रह सकता है. इसका घना फर और शरीर की खास बनावट इसे बेहद ठंडे मौसम में रहने के अनुकूल बनाती है.

सिक्किम समेत हिमालय के कई इलाकों में याक स्थानीय लोगों और पशुपालकों की आजीविका का अहम साधन है. इससे दूध, मक्खन, छुरपी नाम का पारंपरिक पनीर और ऊन मिलता है. पहाड़ी इलाकों में सामान ढोने के लिए भी याक का इस्तेमाल किया जाता है. याक पालन करने वाले पशुपालकों को स्थानीय तौर पर डोकपा कहा जाता है.

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हालांकि, जलवायु परिवर्तन, चरागाहों में बदलाव और पशुपालन के पेशे से नई पीढ़ी की घटती दिलचस्पी के कारण याक पालन पर दबाव बढ़ रहा है. ऐसे में इस महोत्सव के जरिए याक के संरक्षण और उसके कल्याण पर विशेष जोर दिया जा रहा है.

याक पालकों की पारंपरिक जिंदगी की झलक

महोत्सव में सिक्किम के अलग-अलग इलाकों और लद्दाख से लाए गए याक उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं. यहां आने वाले लोगों को याक से जुड़े उत्पादों और हिमालयी संस्कृति को करीब से जानने का मौका मिल रहा है.

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण याक पालकों की पारंपरिक झोपड़ियां हैं. इन्हें इस तरह तैयार किया गया है कि ऊंचाई वाले इलाकों में रहने वाले पशुपालकों की जिंदगी और उनके पारंपरिक ज्ञान को समझा जा सके. ये झोपड़ियां तेज हवाओं और बर्फबारी जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए बनाई जाती हैं.

याक के जरिए पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी

इस महोत्सव का आयोजन सिक्किम सरकार के पशुपालन एवं पशुधन सेवा विभाग ने किया है. विभाग के सचिव डॉ. संदीप गुरुंग ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य याक और उससे जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना है. उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण याक की आबादी पर असर पड़ रहा है और ऐसे समय में पशुपालकों को प्रोत्साहित करना भी जरूरी है.

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डॉ. गुरुंग के मुताबिक, विभाग याक के जरिए पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम कर रहा है. उन्होंने नागालैंड के हॉर्नबिल फेस्टिवल का उदाहरण देते हुए कहा कि याक महोत्सव को भी एक प्रमुख पर्यटन आयोजन के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि ग्नाथांग जैसे दूरदराज के पहाड़ी इलाकों में अधिक पर्यटक पहुंच सकें.

इस दौरान सिक्किम लाइवस्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड की ओर से विकसित सिरी गाय के मक्खन ने भी लोगों का ध्यान खींचा. बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. प्रतीक शर्मा ने इस उत्पाद के बारे में जानकारी दी.

(रिपोर्ट: सुजल प्रधान)

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