फर्जी पासपोर्ट पर छिपा था सौरभ चंद्राकर, इंडोनेशिया में अजंता मेंडिस के नाम से बनवाया था दस्तावेज

महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर के पास से इंडोनेशिया में जारी फर्जी पासपोर्ट मिला है. यह पासपोर्ट अजंता मेंडिस के नाम पर बनाया गया था. इसी फर्जी पहचान के आधार पर वह विदेश में छिपने की कोशिश कर रहा था. जुलाई में इसी पासपोर्ट की वजह से उसे ओमान में हिरासत में लिया गया था.

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महादेव ऐप के सौरभ चंद्राकर को भारत लाया गया है. (Photo- ITG) महादेव ऐप के सौरभ चंद्राकर को भारत लाया गया है. (Photo- ITG)

अरविंद ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 02 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:33 PM IST

महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामले के आरोपी सौरभ चंद्राकर के पास से इंडोनेशिया में जारी फर्जी पासपोर्ट मिला है. यह पासपोर्ट अजंता मेंडिस (Ajanta Mendis) के नाम पर जारी किया गया था. जांच एजेंसियों के मुताबिक, सौरभ ने इस फर्जी पहचान के जरिए अपनी असली पहचान छिपाकर विदेश में रहने की कोशिश की थी. इसी पासपोर्ट के आधार पर जुलाई में ओमान में उसे हिरासत में लिया गया था.

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सौरभ चंद्राकर को भारत प्रत्यर्पित कर लिया गया है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की विशेष टीम उसे रविवार शाम ओमान से भारत लेकर आई. सोमवार को सीबीआई ने उसे दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में जज के कमरे में पेश किया.

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6000 करोड़ रुपये के सट्टेबाजी घोटाले का आरोपी

सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी सिंडिकेट का प्रमोटर है. उस पर करीब 6000 करोड़ रुपये के अवैध सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले में शामिल होने का आरोप है. वह सीबीआई के दो मामलों में फरार था, जिनमें चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है. इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज है.

सीबीआई के मुताबिक, छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर महादेव ऑनलाइन बुक मामले की जांच एजेंसी ने अपने हाथ में ली थी. जांच में सामने आया कि यह देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में से एक था, जिसे भारत के बाहर से चलाया जा रहा था.

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रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर ओमान में पकड़ा गया

जांच एजेंसियां 2023 से ही सौरभ चंद्राकर की तलाश कर रही थीं. हाल ही में ईडी को उसके ओमान में होने की जानकारी मिली. इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने ओमान के अधिकारियों के साथ संपर्क किया. इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था.

इसके बाद सीबीआई और ईडी ने ओमान को उसके प्रत्यर्पण के लिए औपचारिक प्रस्ताव भेजे. इन प्रस्तावों के साथ सौरभ के खिलाफ जुटाए गए सबूत भी साझा किए गए. भारतीय एजेंसियों ने ओमान सरकार और वहां की पुलिस के सहयोग से उसे भारत लाने की प्रक्रिया पूरी की.

यह भी पढ़ें: शेफाली बग्गा ने ED को लौटाए 1.20 करोड़ रुपये, महादेव बेटिंग ऐप से कमाए थे

हवाला के जरिए विदेश भेजी जाती थी सट्टे की रकम

सीबीआई की जांच में पता चला कि सट्टेबाजी से मिलने वाली रकम को बड़ी संख्या में म्यूल बैंक खातों के जरिए इधर-उधर किया जाता था. कई लेनदेन के बाद यह पैसा हवाला चैनलों के जरिए विदेश भेजा जाता था. एजेंसी के मुताबिक, इस रकम का एक हिस्सा सरकारी कर्मचारियों को कथित तौर पर प्रोटेक्शन मनी देने के लिए भी इस्तेमाल किया गया, ताकि सट्टेबाजी का नेटवर्क बिना रुकावट चलता रहे.

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इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता और छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की गई है. मार्च में ईडी ने सौरभ चंद्राकर से जुड़े मामले में करीब 1700 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की थी. इसमें दुबई के महंगे इलाकों में मौजूद लग्जरी विला और अपार्टमेंट भी शामिल थे.

साल 2023 में दुबई में हुई सौरभ चंद्राकर की करीब 200 करोड़ रुपये की आलीशान शादी भी चर्चा में रही थी. इस शादी में परिवार के सदस्य प्राइवेट जेट से पहुंचे थे और बॉलीवुड की कई हस्तियां भी मेहमानों में शामिल थीं.

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