'कहीं सीनियर्स ने टीम बनाकर जूनियर्स को संभाला, तो कहीं...' यूक्रेन से लौटे भारतीय छात्रों के हौसले की कहानी

Russia-Ukraine War: रूस के हमले से जुझ रहे संकटग्रस्त यूक्रेन से भारत वापस लौटे छात्रों ने विषम हालातों से किस तरह लोहा लिया और उसे पार पारकर ऑपरेशन गंगा के तहत स्वदेश वापस लौटे, उनकी जुबानी बुलंद हौसलों की कहानी...

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यूक्रेन से दिल्ली एयरपोर्ट पर लौटे स्टूडेंट. यूक्रेन से दिल्ली एयरपोर्ट पर लौटे स्टूडेंट.

मनीष चौरसिया

  • नई दिल्ली,
  • 04 मार्च 2022,
  • अपडेटेड 10:17 AM IST
  • ऑपरेशन गंगा के तहत यूक्रेन से भारत लाए गए छात्र
  • 24 फरवरी से जारी है रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध

संकटग्रस्त यूक्रेन से भारतीय छात्रों को निकालने की मुहिम लगातार जारी है. गुरुवार रात लगभग 10:45 बजे यूक्रेन से छात्रों को लेकर एक फ्लाइट दिल्ली एयरपोर्ट पहुंची. हवाई जहाज से उतरे छात्रों के मासूम चेहरे अपनों को देखकर खिल उठे. परिवारवालों की आंखों से आंसू निकलने लगे. 'आजतक' ने सकुशल  छात्रों से बात की. इस दौरान कुछ छात्रों ने हौसलों की जबरदस्त कहानियां सुनाईं.  चार दोस्तों में मिलकर ग्रुप बनाया और सारे जूनियर्स को संभाला..

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यूक्रेन से लौटे मेडिकल स्टूडेंट आशीष डबास बताते हैं, हम 1 हफ्ते से निकले हुए हैं. 3 दिन लगे बॉर्डर क्रॉस करने में. कई लोग बीमार हुए. इंडियन एम्बेसी के वर्कर्स कम अवेलेबल थे. हमारे साथ कई जूनियर बच्चे थे, वो परेशान हो रहे थे. उनके घरवाले परेशान हो रहे थे. हमने 4 लोगों ने मिलकर  खुद एक टीम बनाई.  बॉर्डर से हमारी यूनिवर्सिटी की दूरी 300 km दूर थी. हमने खुद से एक बस को किराए पर लिया और सभी जूनियर्स को लेकर सुचेवा बॉर्डर पहुंच गए.

उन्होंने बताया कि रास्ते में कई बच्चों की तबीयत खराब भी हुई, लेकिन हम उन्हें हिम्मत बंधाते रहे. बॉर्डर पर जब हम पहुंचे तो वहां 3-4 हज़ार बच्चे थे. चारों तरफ आपाधापी थी. हमारी आंखों के सामने अरेबियन और नाइजीरियन की मारपीट हुई थी. लेकिन हमने किसी से लड़ाई नहीं की. आज हम सब सुरक्षित वापस आ गए.

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'पहले दादी नानी से लड़ाई की कहानी सुनती थी अब बेटी से सुनूंगी '

एक और यूक्रेन से लौटी स्टूडेंट इशिता इमोशनल थी. उससे बोला नहीं जा रहा था.  खुद को सम्हालकर इशिता बताती हैं कि वहां लगातार बर्फबारी हो रही थी. कपड़े नहीं थे.. खाना  नहीं था. हम चार दिन बॉर्डर पर रहे. इशिता के घरवाले काफी इमोशनल हैं. उनके पिता 1 हफ्ते की पूरी समस्या याद करते हैं. आंखें इशिता की मांग कहती हैं, ''अभी भी मेरे हाथ कांप रहे हैं. यकीन नहीं हो रहा कि बेटी मेरे सामने हैं.  मैं नानी-दादी से लड़ाई की कहानी सुनती थी. अब बेटी से सुनूंगी.''

'यूपी के दो लड़के.. अब दोस्ती और गहरी हो गई'



रजत तिवारी और रविन्द्र शुक्ला..दो दोस्त... एक ही शहर यूपी के बहराइच के रहने वाले. यूक्रेन में भी एक ही यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं. यूनिवर्सिटी के पीछे बम फटा, लेकिन दोनों ने एक दूसरे को मुश्किल वक़्त में संभाला. दोनों एक-दूसरे के भाई बनकर रहे. रविन्द्र ने बताया कि जब 3 दिन घरवालों से बात नहीं हुई तो लगा वो घर वापस नहीं जा पाएंगे, ये सोचकर वो रोने लगे लेकिन फिर रजत ने संभाला. दोनों कहते हैं कि उनकी दोस्ती और पक्की हो गई है. 

 

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