संसद के उच्च सदन राज्यसभा में इन दिनों राज्यों के नाम बदलने को लेकर चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं. हाल ही में केरल का नाम बदलकर 'केरलम' किए जाने वाले विधेयक पर चर्चा के दौरान पश्चिम बंगाल से बीजेपी के राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने भी एक मांग की है. उन्होंने मांग उठाई है कि पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से 'पश्चिम बंग' कर दिया जाना चाहिए.
राज्यसभा में बहस के दौरान समिक भट्टाचार्य ने केरल के नाम बदलने के प्रस्ताव का स्वागत किया. उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह की सराहना की. इसके बाद अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल का नाम सिर्फ एक शब्द नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध राज्य के इतिहास और साल 1947 में इसके गठन के समय की परिस्थितियों से जुड़ा है.
उन्होंने बंगाल के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि 20 जून 1947 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल का जन्म हुआ था. उस समय कांग्रेस पार्टी ने भी यह स्वीकार किया था कि बंगाली हिंदुओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए एक अलग राज्य का होना बेहद जरूरी था.
'बंगाल' नाम पर जताई आपत्ति, टीएमसी पर निशाना
समिक भट्टाचार्य ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल विधानसभा में बहुमत होने के दम पर राज्य का नाम बदलकर सिर्फ 'बंगाल' करने के प्रयास किए गए हैं. उन्होंने दो टूक कहा कि पश्चिम बंगाल का नाम छोटा करके सिर्फ 'बंगाल' कर देना उन लोगों के संघर्ष और बलिदान का अपमान होगा, जिन्होंने बंगाली हिंदुओं के लिए एक अलग राज्य की लड़ाई लड़ी थी.
उन्होंने जोर देकर कहा,'पश्चिम बंगाल सिर्फ एक नाम नहीं है, इसका एक गौरवशाली इतिहास है। हम चाहते हैं कि इसका नाम बदलकर पश्चिम बंगा किया जाए.'
चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद ने 'वंदे मातरम' का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि बंगाल वह धरती है जिसने वंदे मातरम के जन्म के साथ-साथ इसका विरोध भी देखा है. उन्होंने एक किताब का हवाला देते हुए कहा कि अतीत में कुछ लोगों ने बंकिम चंद्र चट्टोद्धाय के उपन्यास 'आनंदमठ' और राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को लेकर आपत्तिजनक बातें कही थीं, जो स्वीकार्य नहीं हैं.
पटना का नाम बदलने की भी मांग
राज्यसभा में चल रही इस चर्चा के दौरान अन्य नेताओं ने भी अपने राज्यों से जुड़े ऐतिहासिक प्रस्ताव रखे. राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार की राजधानी पटना का नाम बदलकर 'पाटलिपुत्र' करने की मांग उठाई.
उन्होंने कहा कि बिहार का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है और पाटलिपुत्र एक प्राचीन और समृद्ध साम्राज्य की राजधानी रह चुका है. इसके साथ ही नालंदा जिले के एक रेलवे स्टेशन 'बख्तियारपुर' का नाम बदलने की भी मांग उठी.
केरल, पश्चिम बंगाल और बिहार से जुड़े इन प्रस्तावों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई अन्य सांसदों ने भी अपने विचार रखे. इस पूरी बहस ने देश के कई ऐतिहासिक शहरों और राज्यों के नाम बदलने की सुगबुगाहट को एक बार फिर से तेज कर दिया है.
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