लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली और महाराष्ट्र में SIR के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने चुनाव आयोग को 'वोट चोरी आयोग' बताया है. उनका कहना है कि इस प्रक्रिया का मकसद किसी भी कीमत पर बीजेपी को जीत दिलाना और लोकतंत्र को कमजोर करना है.
राहुल गांधी ने महाराष्ट्र और बंगाल की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में वोट चोरी की गई थी. राहुल गांधी ने कहा कि महाराष्ट्र में 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच 39 लाख नए वोटर जुड़े और अब ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से लोगों के नाम हटाए गए हैं. उन्होंने दावा किया कि उस समय भी उन्होंने इसे वोट चोरी बताया था.
राहुल गांधी ने बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे पता चलता है कि बड़ी संख्या में लोगों के नाम गलत तरीके से हटाए गए. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार 'वोट चोरी' से बनी है. उनका कहना है कि वोट चोरी से बनी सरकार को जनता की जरूरत नहीं है और यही वजह है कि बीजेपी जनता की बातों को नहीं सुनती.
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी X पर पोस्ट करते हुए इसे लेकर सवाल उठाया. मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र को खोखला करने का भाजपाई षड्यंत्र खुलकर सामने आया है. उन्होंने 'वोट चोरी' का आरोप लगाते हुए फिर एक बार बीजेपी पर निशाना साधा. उनका दावा है कि जहां बीजेपी को सुविधा होती है वहां मतदाता जोड़े जाते हैं और जहां उन्हें असुविधा होती है वहां वोटों को काटकर वोट चोरी की जाती है. उन्होंने इसे 'भाजपाई षड्यंत्र' बताया.
खड़गे ने चुनाव आयोग को 'भाजपा का कुर्सी बचाओ आयोग' बताया है. खड़गे का कहना है कि महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच अचानक से 39 लाख मतदाताओं के नाम जोड़े गए. जबकि अब SIR में 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हैं. उन्होंने बंगाल का भी जिक्र किया है.
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कांग्रेस अध्यक्ष का दावा है कि बंगाल में जो नाम काटे गए थे उनमें 91% नामों को अपील के बाद जोड़ा गया है. उन्होंने सवाल किया है कि क्या चुनाव में बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए इन नामों को काटा गया था.
बता दें, दिल्ली और महाराष्ट्र में बीते दिनों SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी हुई थी. दिल्ली में कुल 47 लाख 56 हजार 722 मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हैं. वहीं, महाराष्ट्र में करीब 2 करोड़ 7 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं हैं.
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