उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मानहानि के मामले में बरी कर दिया है. यह मामला कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है. कोर्ट के फैसले के बाद अब शिकायतकर्ता पक्ष ने इसे ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है.
शिकायतकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वकील संतोष पांडे ने आज तक से बातचीत में कहा कि इस फैसले के खिलाफ अपीलेट कोर्ट में अपील दाखिल की जाएगी. वकील संतोष पांडे के मुताबिक, इस मामले में कोर्ट के सामने तीन प्रमुख बिंदु थे. इनमें राहुल गांधी के बयान की सीडी की प्रामाणिकता, बयान को मानहानिकारक माना जा सकता है या नहीं और शिकायत दर्ज कराने के अधिकार से जुड़ा सवाल शामिल था.
संतोष पांडे ने कहा कि कोर्ट ने राहुल गांधी के बयान वाली सीडी को सही माना, लेकिन उनके बयान को मानहानिकारक नहीं माना. उन्होंने यह भी बताया कि शिकायत दर्ज कराने के अधिकार को लेकर कोर्ट ने सवाल उठाया है. शिकायतकर्ता पक्ष अब इन्हीं कानूनी पहलुओं के मद्देनजर फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है.
2018 में शुरू हुआ था मानहानि का मामला
इस मामले की शुरुआत 8 मई 2018 को हुई, जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु में राहुल गांधी के अमित शाह को लेकर दिए गए बयान पर विवाद हुआ. आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी ने उस समय बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. इसके बाद बीजेपी नेता विजय मिश्र ने 4 अगस्त 2018 को सुल्तानपुर की अदालत में मानहानि का परिवाद दाखिल किया. इसी शिकायत पर आगे की कानूनी कार्यवाही चली और राहुल गांधी को अदालत में पेश होकर अपना पक्ष रखना पड़ा.
कब क्या हुआ? राहुल गांधी मानहानि केस की टाइमलाइन-
8 मई 2018 - बयान को लेकर विवाद
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु में राहुल गांधी के अमित शाह को लेकर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान का मामला सामने आया.
4 अगस्त 2018 - अदालत में शिकायत
बीजेपी नेता विजय मिश्र ने राहुल गांधी के खिलाफ सुल्तानपुर की अदालत में मानहानि का परिवाद दाखिल किया.
27 नवंबर 2023 - अदालत ने तलब किया
उपलब्ध टाइमलाइन के मुताबिक, अदालत ने राहुल गांधी को तलब करने की कार्यवाही की और वारंट जारी किया.
20 फरवरी 2024 - सरेंडर और जमानत
राहुल गांधी अदालत में पेश हुए. इसके बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया.
26 जुलाई 2024 - राहुल गांधी का बयान
मामले में राहुल गांधी का बयान अदालत में दर्ज किया गया.
9 अक्टूबर 2024 - विजय मिश्र की गवाही
परिवादी बीजेपी नेता विजय मिश्र की गवाही दर्ज की गई.
28 फरवरी 2025 - अनिल मिश्र की गवाही
परिवादी पक्ष के गवाह अनिल मिश्र की गवाही दर्ज हुई.
8 दिसंबर 2025 - रामचंद्र दुबे की गवाही
परिवादी पक्ष के गवाह रामचंद्र दुबे ने अदालत में अपना बयान दर्ज कराया.
20 फरवरी 2026 - धारा 313 के तहत बयान
राहुल गांधी का आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 313 के तहत बयान दर्ज किया गया.
12 मार्च 2026 - वॉयस सैंपल की मांग
राहुल गांधी के वॉयस सैंपल का मिलान बयान की रिकॉर्डिंग से कराने के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की गई.
2 मई 2026 - मजिस्ट्रेट कोर्ट से अर्जी खारिज
मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने वॉयस सैंपल मिलान कराने की अर्जी खारिज कर दी.
21 मई 2026 - सेशन कोर्ट में निगरानी अर्जी
मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सेशन कोर्ट में निगरानी अर्जी दाखिल की गई.
15 जुलाई 2026 - एडीजे कोर्ट से राहत नहीं
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय (ADJ) ने निगरानी अर्जी खारिज कर दी.
10 सितंबर 2026 - हाईकोर्ट में याचिका खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने वॉयस सैंपल मिलान से जुड़ी याचिका खारिज कर दी.
6 अक्टूबर 2026 - बहस शुरू
राहुल गांधी के खिलाफ दाखिल मानहानि परिवाद पर अदालत में बहस शुरू हुई.
12 अक्टूबर 2026 - सुनवाई पूरी
मामले में दोनों पक्षों की बहस पूरी हुई. इसके बाद फैसले का इंतजार था.
26 अक्टूबर 2026 - फैसले वाले दिन कोर्ट में क्या हुआ?
- 11 बजे राहुल गांधी का काफिला सुल्तानपुर कोर्ट परिसर पहुंचा. 10 मिनट में राहुल गांधी कोर्ट रूम में पहुंचे. फैसले के लिए राहुल गांधी अदालत के अंदर पहुंचे.
- 11:50 AM पर अदालत ने फैसला सुनाया. एमपी-एमएलए कोर्ट ने राहुल गांधी को मानहानि के मामले में बरी कर दिया.
- 12:05 PM पर राहुल गांधी कोर्ट रूम से बाहर आए. फैसला सुनाए जाने के बाद राहुल गांधी अदालत से बाहर निकले.
- 12:15 PM पर राहुल गांधी कोर्ट परिसर से बाहर निकले और लखनऊ के रास्ते दिल्ली के लिए रवाना हो गए.
अब आगे क्या?
राहुल गांधी को बरी किए जाने के बाद अब शिकायतकर्ता पक्ष इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की तैयारी में है. वकील संतोष पांडे ने कहा है कि अदालत के आदेश की प्रति लेकर उसका अध्ययन किया जाएगा और इसके बाद अपील दाखिल की जाएगी. उनका कहना है कि कोर्ट ने बयान की सीडी को सही माना, लेकिन उसे मानहानिकारक नहीं माना और शिकायतकर्ता के अदालत में शिकायत करने के अधिकार पर भी सवाल उठाया. अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई अपीलेट कोर्ट में अपील दाखिल किए जाने पर निर्भर करेगी.
संतोष शर्मा