कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार(1 अगस्त) को प्रस्तावित परिसीमन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर बड़ा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि यह तमिलनाडु की राजनीतिक ताकत को कमजोर करने और संसद में राज्य के प्रभाव को कम करने की सोची-समझी कोशिश है. तमिलनाडु जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) के अध्यक्षों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि दशकों से जनसंख्या कंट्रोल में बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद तमिलनाडु को उसके उचित प्रतिनिधित्व से वंचित करने की कोशिश की जा रही है.
राहुल गांधी ने कहा कि 'परिसीमन तमिलनाडु के लोगों से उनकी ताकत छीनने के लिए बनाया गया है. यह बीजेपी की साजिश है. तमिल इतिहास में एट्टप्पन नाम का एक किरदार था, जिसे विश्वासघात के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. जो भी परिसीमन का समर्थन करता है, वह तमिलनाडु और उसके भविष्य के साथ विश्वासघात कर रहा है. किसी भी तमिल व्यक्ति को परिसीमन का समर्थन नहीं करना चाहिए. हर राष्ट्रीय पार्टी को परिसीमन को हराना होगा.'
तमिल इतिहास और लोककथाओं में विश्वासघात से जोड़े जाने वाले एट्टप्पन का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने प्रस्तावित परिसीमन का समर्थन करने वालों पर राज्य के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया. उन्होंने देशभर के राजनीतिक दलों से परिसीमन के खिलाफ एकजुट होने की अपील की. राहुल का कहना है कि इससे राष्ट्रीय स्तर पर दक्षिणी राज्यों की आवाज कमजोर हो सकती है.
राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज
राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब केंद्र के प्रस्तावित परिसीमन को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है. तमिलनाडु सहित कई दक्षिणी राज्यों ने चिंता जताई है कि अगर नए जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर परिसीमन किया जाता है, तो संसद में उनका तुलनात्मक प्रतिनिधित्व कम हो सकता है. इन राज्यों का तर्क है कि उन्होंने परिवार नियोजन को प्रभावी तरीके से लागू किया और कई उत्तरी राज्यों की तुलना में जनसंख्या वृद्धि को कम रखा है.
कांग्रेस लगातार कर रही विरोध
कांग्रेस और डीएमके परिसीमन का लगातार विरोध करती रही है. दोनों दलों का कहना है कि जनसंख्या वृद्धि को सफलतापूर्वक नियंत्रित करने वाले राज्यों को इसकी सजा नहीं मिलनी चाहिए. मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने भी ऐसे किसी परिसीमन का विरोध किया है, जिससे तमिलनाडु को नुकसान हो. संसद में फिलहाल पार्टी का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है, लेकिन उसका कहना है कि वह राज्य का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम करने या उसके संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने वाले किसी भी कदम का विरोध करती रहेगी.
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