'बिहार का मखाना ग्रीस पहुंच रहा, कर्नाटक की दाल मालदीव...', मन की बात में बोले PM मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि 12 साल पहले विजयादशमी के मौके पर 'मन की बात' की शुरुआत हुई थी. तब से अब तक ये यात्रा लगातार जारी है. उन्होंने कहा कि मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से एक तरह से देश की लोकशक्ति की आराधना करता हूं.

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PM मोदी ने कहा- देश में अनेक पारंपरिक हुनर हैं जो पीढ़ियों से हमारी पहचान का हिस्सा रहे हैं. (Photo: X/@narendramodi) PM मोदी ने कहा- देश में अनेक पारंपरिक हुनर हैं जो पीढ़ियों से हमारी पहचान का हिस्सा रहे हैं. (Photo: X/@narendramodi)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:31 PM IST

PM मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम के 139वें संस्करण में कहा, 'त्योहारों के मौसम में सभी ने एक बदलाव महसूस किया होगा. अब लोग खरीदारी करते समय स्वदेशी उत्पादों को बहुत महत्व देने लगे हैं. वोकल फॉर लोकल की भावना अब हमारे उत्पादों को दुनिया के बाजारों तक पहुंचा रही है. बिहार के पूर्णिया का मखाना अब ग्रीस पहुंच रहा है. कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल अब मालदीव जा रही है, यानी, भारत के किसानों के लिए दुनिया में नए बाजार खुल रहे हैं.'

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PM मोदी ने बताया कि 12 साल पहले, विजयादशमी के मौके पर हमने 'मन की बात' की शुरुआत की थी. तब से अब तक ये यात्रा लगातार जारी है. उन्होंने कहा, 'मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से एक तरह से देश की लोकशक्ति की आराधना करता हूं. मुझे इसके माध्यम से देश के हर परिवार से जुड़ने का अवसर मिलता है.'

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में अनेक पारंपरिक हुनर हैं जो पीढ़ियों से हमारी पहचान का हिस्सा रहे हैं. अब उन परंपराओं से जुड़कर नए प्रयोग हो रहे हैं. इन्हें आज के समय के अनुरूप आगे बढ़ाया जा रहा है.

PM मोदी ने कहा कि पंजाब में ऐसा ही एक प्रयास काफी समय से चल रहा है, यहां 'खेती विरासत मिशन' नाम की एक संस्था ने जैविक खेती और पारंपरिक कृषि के तौर-तरीकों को नया जीवन देना शुरू किया. इस टीम के लोग पंजाब के मालवा क्षेत्र में कपास की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना चाहते थे. इस पहल को 'नव-त्रिन्जन' नाम दिया गया.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, 'हमारे यहां प्रकृति के प्रति सम्मान की बहुत पुरानी परंपरा रही है. हमारे पूर्वजों ने हमें सिखाया है कि अपने आस-पास स्वच्छता रखना, जल-स्रोतों की देखभाल करना ये हमारी अपनी ज़िम्मेदारी है. यही भाव उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में भी देखने को मिलता है. यहां लोगों ने मिलकर एक नदी को नया जीवन देने का प्रयास किया है. ये नदी हेवल है.'

उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले हेवल नदी में पानी कम होने लगा था. आस-पास के प्राकृतिक जल-स्रोत भी सूख रहे थे. ऐसे में स्थानीय प्रशासन और गांव के लोगों ने मिलकर हेवल नदी को बचाने का अभियान चलाया.

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