नोएडा: सोसाइटी का फ्लैट नंबर 402 बना 'सीक्रेट स्टोर! मिली 2 करोड़ रुपये की कैंसर की दवाएं

Noida News: नोएडा की सेक्टर-76 स्थित आम्रपाली प्रिंसली सोसाइटी के एक फ्लैट से करीब 2 करोड़ रुपये की कैंसर और अन्य महंगी बायोलॉजिकल दवाएं बरामद हुई हैं. संयुक्त छापेमारी में एक आरोपी गिरफ्तार किया गया है. जांच में दिल्ली के बड़े दवा नेटवर्क और बिहार सरकार की सप्लाई से संभावित कनेक्शन की भी जांच की जा रही है. एजेंसियों को इस रैकेट में और गिरफ्तारियों की उम्मीद है.

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फ्लैट में मिली 2 करोड़ की जांच करते अधिकारी (Photo: ITG) फ्लैट में मिली 2 करोड़ की जांच करते अधिकारी (Photo: ITG)

भूपेन्द्र चौधरी

  • नोएडा ,
  • 22 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:44 PM IST

बाहर से देखने पर यह नोएडा की एक सामान्य हाईराइज सोसाइटी का फ्लैट था. पड़ोसियों के लिए भी यह किसी आम परिवार का घर जैसा ही था, लेकिन जब संयुक्त टीम ने फ्लैट का दरवाजा खोला तो अंदर का नजारा चौंकाने वाला था. कमरे में एक-दो नहीं, बल्कि करीब 2 करोड़ रुपये कीमत की कैंसर और अन्य महंगी बायोलॉजिकल दवाएं रखी थीं. शुरुआती जांच में यह मामला सिर्फ अवैध दवा भंडारण तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसके तार एक बड़े दवा नेटवर्क से जुड़ते नजर आ रहे हैं.

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गौतमबुद्ध नगर में हुई इस कार्रवाई ने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है. दिल्ली क्राइम ब्रांच, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और जिला औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने सेक्टर-76 स्थित अमरपाली प्रिंसली सोसाइटी के फ्लैट नंबर-402 पर छापा मारकर भारी मात्रा में महंगी दवाएं बरामद की हैं. मामले में आनंद कुमार नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया गया है.

दिल्ली की जांच से नोएडा तक पहुंची टीम

अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई किसी सामान्य शिकायत का नतीजा नहीं थी. दिल्ली में पहले से दर्ज एक मामले की जांच के दौरान एजेंसियों को सूचना मिली थी कि नोएडा के एक फ्लैट में नियंत्रित श्रेणी की महंगी दवाओं का अवैध भंडारण किया गया है. सूचना मिलने के बाद 20 और 21 जुलाई की दरमियानी रात संयुक्त टीम सेक्टर-76 स्थित अमरपाली प्रिंसली सोसाइटी पहुंची. फ्लैट नंबर-402 में तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाएं और बायोलॉजिकल इंजेक्शन मिले. जिला औषधि विभाग के अनुसार फ्लैट से बरामद दवाओं की अनुमानित कीमत करीब 2 करोड़ रुपये है. इनमें कैंसर के इलाज में उपयोग होने वाली कई महंगी और आयातित बायोलॉजिकल दवाएं शामिल हैं. दवाओं को मौके पर ही जब्त कर सील कर दिया गया. इसके बाद उन्हें जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है.

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जांच में सामने आया बिहार कनेक्शन

प्रारंभिक जांच में एक और अहम बात सामने आई है. अधिकारियों को आशंका है कि बरामद दवाओं में कुछ ऐसी दवाएं भी शामिल हो सकती हैं, जिनका संबंध बिहार सरकार की आपूर्ति से है. हालांकि जांच एजेंसियां अभी दस्तावेजों और बैच नंबरों का मिलान कर रही हैं. इस प्रक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दवाएं सरकारी सप्लाई चेन से बाहर कैसे पहुंचीं. इस मामले में गिरफ्तार आनंद कुमार का संबंध दिल्ली में सक्रिय एक बड़े दवा नेटवर्क से बताया जा रहा है. जांच एजेंसियों के मुताबिक इस पूरे मामले में अब तक 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इनमें से 9 आरोपी पहले ही दिल्ली से गिरफ्तार किए जा चुके थे. नोएडा से पकड़ा गया आनंद कुमार इस मामले का दसवां आरोपी है.

हाईराइज फ्लैट क्यों बना स्टोर

जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर एक रिहायशी सोसाइटी के फ्लैट का इस्तेमाल दवाओं के भंडारण के लिए क्यों किया जा रहा था. प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि हाईराइज सोसाइटी में इस तरह की गतिविधियों पर कम शक होता है. इसी वजह से फ्लैट को कथित तौर पर स्टोरेज प्वाइंट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था. फिलहाल एजेंसियां फ्लैट से मिले दस्तावेज, पैकिंग सामग्री और अन्य रिकॉर्ड की भी जांच कर रही हैं. जांच में यह आशंका भी जताई गई है कि सरकारी आपूर्ति की महंगी कैंसर रोधी दवाओं को अवैध तरीके से निजी मरीजों तक ऊंचे दामों पर पहुंचाया जा रहा था. अगर जांच में यह बात सही साबित होती है तो मामला केवल अवैध भंडारण का नहीं, बल्कि सरकारी दवाओं की आपूर्ति व्यवस्था में सेंध लगाने का भी हो सकता है. हालांकि जांच एजेंसियों ने फिलहाल इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है और जांच जारी है.

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हैदराबाद तक पहुंची जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का दायरा अब दूसरे राज्यों तक भी बढ़ाया गया है. अधिकारियों के अनुसार नेटवर्क की अन्य कड़ियों तक पहुंचने के लिए जांच टीम को हैदराबाद भी भेजा गया है. वहां से मिलने वाली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. संयुक्त टीम अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बरामद दवाएं कहां से लाई गईं, किन लोगों के माध्यम से फ्लैट तक पहुंचीं और इन्हें आगे किसे सप्लाई किया जाना था. इसके लिए सप्लाई चेन, खरीद-बिक्री के दस्तावेज, परिवहन और संपर्कों की भी जांच की जा रही है.

पूछताछ में जुटी एजेंसियां

गिरफ्तार आरोपी आनंद कुमार से लगातार पूछताछ की जा रही है. जांच एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा किन शहरों तक इसका दायरा फैला हुआ है. सूत्रों के अनुसार पूछताछ के आधार पर अन्य संभावित ठिकानों पर भी छापेमारी की तैयारी की जा रही है. अधिकारियों का मानना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है. जैसे-जैसे दस्तावेजों की जांच और पूछताछ आगे बढ़ेगी, इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं. इसी वजह से जांच एजेंसियां फिलहाल पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं.

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क्यों अहम है यह कार्रवाई

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं बेहद महंगी होती हैं. ऐसे में इन दवाओं के अवैध भंडारण और संभावित अवैध सप्लाई से जुड़े मामले को जांच एजेंसियां गंभीरता से देख रही हैं. फिलहाल संयुक्त टीम ने बरामद सभी दवाओं को जब्त कर लिया है और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं. यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं.

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