नेपाल में आई फ्लैश फ्लड से भारी तबाही मची हुई है. 2,500 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्री भी शामिल हैं. भारत लगातार नेपाल में मदद मुहैया करा रहा है. इसी बीच सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने तिब्बत-नेपाल सीमा पर अपने कैलाश यात्रा समूह के साथ हुई घटना को लेकर जानकारी दी है.
काठमांडू में ‘इन सॉलिडैरिटी विद नेपाल’ कार्यक्रम में बोलते हुए सद्गुरु ने बताया कि उनके समूह की आदत थी कि वे इमिग्रेशन सेंटर पर सबसे पहले पहुंचते थे. बाद में उन्हें लगा कि काश वे थोड़े कम अनुशासित होते. उनके समूह के लीडर प्रवीण ने फोन कर बताया था कि सभी लोग सुबह 9:05 बजे इमिग्रेशन सेंटर पहुंच गए हैं. तिब्बत-नेपाल सीमा पर अफरा-तफरी और भ्रम की स्थिति को देखते हुए समूह वहां जल्दी पहुंचा था, क्योंकि थोड़ी देर होने पर इमिग्रेशन पूरा करने में घंटों लग सकते थे.
सद्गुरु ने बताया कि जब बाढ़ की पहली तस्वीरें सामने आईं तो पानी और मलबे का स्तर करीब 40 फीट दिखाई दे रहा था. उस समय उन्हें इस बात से राहत थी कि उनके लोग इमिग्रेशन सेंटर के अंदर थे. उन्होंने कहा कि अगर बाढ़ से इमारत में पानी भर भी जाए, तो सामान, पासपोर्ट और कपड़े चले जाएं, लेकिन लोग सुरक्षित रहें.
77 तीर्थयात्रियों का अब तक पता नहीं
ईशा फाउंडेशन की समन्वयक मां गंभीरि ने शुक्रवार को बताया कि आपदा के बाद से 77 लापता तीर्थयात्रियों के बारे में पिछले दो दिनों से कोई जानकारी नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि बचाव दल मौके पर मौजूद हैं, लेकिन अभी तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है. उन्होंने यह भी कहा कि 77 परिवार जवाब का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं और उनके लिए यह इमोशनल उथल-पुथल का समय है.
77 सदस्यों के इस समूह में 19 देशों के लोग शामिल थे. गंभीरि के मुताबिक, संगठन ने मदद के लिए भारत, चीन और नेपाल में दूतावासों से संपर्क किया है. इसके अलावा भारत और नेपाल के विभिन्न कार्यालयों और मंत्रालयों से भी जानकारी और मदद मांगी गई है. गंभीरि ने बताया कि सद्गुरु आपदा के केंद्र बताए जा रहे ग्यिरोंग जाने और स्थिति में मदद करना चाहते थे, लेकिन उन्हें जरूरी अनुमति नहीं मिली.
इमिग्रेशन सेंटर भी बाढ़ की चपेट में आया
सद्गुरु ने बुधवार को अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर बताया था कि कैलाश यात्रा का एक समूह नेपाल लौटते समय फ्लैश फ्लड की चपेट में आ गया था. समूह ग्यिरोंग के इमिग्रेशन कार्यालय में था, तभी बाढ़ आई और इमारत के साथ शहर का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया. सद्गुरु ने बताया कि नेपाल की तरफ तिमुरे में तीन स्वयंसेवक भी फंस गए थे. उन्होंने कहा कि जिस इमारत में समूह ने एक सप्ताह पहले इमिग्रेशन पूरा किया था, वही पूरी इमारत बाद में बह गई और शहर का एक हिस्सा भी बह गया.
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